दूसरी तरफ, ब्राजील के संघीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि वे अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं कर पाए हैं कि मरीज DRC के किस प्रांत से आया है, जिससे जोखिम का सही आकलन करना मुश्किल हो रहा है । फिलहाल स्थिति पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि ब्राजील और दक्षिण अमेरिका में इस बीमारी के फैलने का खतरा फिलहाल कम है
।
DRC ने 15 मई, 2026 को अपने 17वें इबोला प्रकोप की घोषणा की, जब देश के पूर्वोत्तर में स्थित इटुरी प्रांत में मामलों की पुष्टि हुई । यह प्रकोप बुंडिबुग्यो वायरस (प्रजाति: ऑर्थोइबोलावायरस बुंडिबुग्योएन्स) के कारण हुआ है
।
यह बीमारी DRC के भीतर ही इटुरी से फैलकर नॉर्थ किवु और साउथ किवु प्रांतों तक पहुंच गई। इतना ही नहीं, इसने सीमा पार करके युगांडा में भी दस्तक दे दी। यहां DRC से आया एक कांगोली व्यक्ति राजधानी कंपाला में बीमार पड़ा और उसकी मौत हो गई, जिसके बाद युगांडा ने भी अलग से प्रकोप की घोषणा कर दी ।
| स्थान | पुष्ट मामले | पुष्ट मौतें | संदिग्ध मामले | संदिग्ध मौतें |
|---|---|---|---|---|
| DRC (इटुरी, नॉर्थ किवु, साउथ किवु) | 125 | 17 | 906 | 223 |
| युगांडा | 9 | 1 | — | — |
| कुल योग | 134 | 18 | 906+ | 223+ |
स्रोत: यूरोपियन सेंटर फॉर डिजीज प्रिवेंशन एंड कंट्रोल (ECDC) साप्ताहिक खतरा रिपोर्ट, 30 मई 2026 । गौरतलब है कि संदिग्ध और पुष्ट मामलों को मिलाकर कुल संख्या 1,262 से अधिक हो चुकी है
।
इस प्रकोप को और भी खतरनाक बनाने वाली बात यह है कि बुंडिबुग्यो स्ट्रेन के लिए फिलहाल कोई भी स्वीकृत वैक्सीन या विशेष एंटीवायरल दवा मौजूद नहीं है । यह इसे इबोला के ज़ायरे स्ट्रेन से बिल्कुल अलग बनाता है, जिसके लिए अर्वेबो (Ervebo) जैसी वैक्सीन और दवाइयां उपलब्ध हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का कहना है कि आशाजनक दवाओं और वैक्सीन पर परीक्षण का काम जारी है, लेकिन अभी तक किसी को भी बुंडिबुग्यो के खिलाफ इस्तेमाल के लिए लाइसेंस नहीं मिला है ।
पुष्ट मामलों में, मृत्यु दर (Case Fatality Rate) लगभग 13.4% है (134 पुष्ट मामलों में से 18 मौतें) । हालांकि, संदिग्ध मामलों में मृत्यु दर कहीं अधिक है और बुंडिबुग्यो के पिछले प्रकोपों के ऐतिहासिक आंकड़े इससे भी ज्यादा मृत्यु दर दिखाते हैं। बड़ी संख्या में संदिग्ध मामलों की जांच अभी भी जारी है, जिसके कारण सही मृत्यु दर का अनुमान लगाना फिलहाल मुश्किल है।
ब्राजील के स्वास्थ्य मंत्रालय के पास पहले से ही "प्लानो डी कोंटिंजेंसिया पारा डोएंका पेलो वायरस इबोला" (इबोला वायरस रोग के लिए राष्ट्रीय आकस्मिक योजना) मौजूद है। यह योजना देश में वायरस के संभावित प्रवेश की स्थिति में संघीय स्तर पर जिम्मेदारियों और जरूरी ढांचे को परिभाषित करती है । साओ पाउलो में संदिग्ध मामले के आते ही इस योजना के प्रोटोकॉल सक्रिय कर दिए गए, जिसके तहत मरीज को तुरंत आइसोलेट किया गया और जांच शुरू कर दी गई
।
17 मई, 2026 को, WHO के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयसस ने बुंडिबुग्यो वायरस के इस प्रकोप को "अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल" (PHEIC) घोषित कर दिया। यह अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य नियमों (IHR) के तहत सबसे ऊंचे स्तर की चेतावनी है ।
MSF ने DRC और युगांडा के प्रभावित इलाकों में अपनी टीमें तैनात कर दी हैं। उन्होंने वहां इबोला उपचार केंद्र स्थापित किए हैं और मरीजों की देखभाल, कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग (संपर्क में आए लोगों की तलाश) और सामुदायिक जागरूकता अभियान में सहयोग कर रहे हैं। मई के मध्य तक, MSF ने DRC में सैकड़ों संदिग्ध मामलों की रिपोर्ट की थी और इटुरी तथा नॉर्थ किवु में उनके उपचार केंद्र सक्रिय थे ।
ECDC का मानना है कि प्रभावित क्षेत्रों से लौटने वाले यात्रियों की सीमा पर जांच करना यूरोप में बीमारी के प्रवेश को रोकने के लिए सीमित रूप से ही प्रभावी है । वहीं, WHO सीमाएं बंद करने या यात्रा और व्यापार पर प्रतिबंध लगाने के खिलाफ सलाह देता है, लेकिन प्रभावित देशों के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर बाहर जाने वाले यात्रियों की जांच करने की सिफारिश जरूर करता है
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