आधुनिक रूप में यह नियम मुख्यतः अमेरिकी है, लेकिन इसकी जड़ें पुरानी अंग्रेज़ी कानून प्रणाली में मिलती हैं। 19वीं सदी के अंग्रेज़ी मामलों (जैसे Raffles v. Wichelhaus) से लेकर आज तक, अदालतों ने लिखित अनुबंधों को प्राथमिकता देने की नीति अपनाई है।
यह नियम यह सुनिश्चित करता है कि अनुबंध की व्याख्या केवल उसी दस्तावेज़ के भीतर मौजूद जानकारी से की जाए। उदाहरण के लिए, अमेरिकी संघीय अदालतों ने कई फैसलों में कहा है: "अनुबंध व्याख्या के लिए सबसे पहले लिखित उपकरण के चार कोनों की जांच करनी चाहिए ताकि पार्टियों के इरादे का पता चल सके।"
हालांकि, आज यह नियम पूरी तरह सख्त नहीं है। अमेरिका के अलग-अलग राज्यों में और अलग-अलग प्रकार के अनुबंधों के लिए, अदालतें बाहरी साक्ष्यों को जल्दी देखने की अनुमति दे सकती हैं। इसलिए, फोर कॉर्नर्स रूल एक सार्वभौमिक बैन की बजाय एक व्याख्यात्मक दृष्टिकोण अधिक है।
फोर कॉर्नर्स रूल अनुबंध कानून का एक मूलभूत सिद्धांत है जो लिखित दस्तावेज़ों को महत्व देता है। यह सुनिश्चित करता है कि अनुबंधों की व्याख्या सिर्फ उनके पाठ के आधार पर हो, न कि बाहरी कारकों के आधार पर। हालांकि, आधुनिक कानूनी व्यवहार में यह एक लचीला नियम बन गया है, जहां अस्पष्टता होने पर बाहरी साक्ष्यों को भी शामिल किया जा सकता है।