प्राचीन विवरणों के अनुसार, अनैक्सिमैंडर का तर्क था कि पृथ्वी अपनी जगह इसलिए स्थिर है क्योंकि वह सभी चीज़ों से समान दूरी पर है; इसलिए उसके पास किसी एक दिशा में गिरने या जाने का कोई विशेष कारण नहीं है, और उसे सहारे की जरूरत नहीं पड़ती ।
यह बात आधुनिक विज्ञान जैसी नहीं थी, लेकिन उस समय के लिए यह एक अलग तरह की सोच थी: पृथ्वी को किसी भौतिक आधार पर टिकाकर समझाने के बजाय, उसकी स्थिति को ब्रह्मांडीय व्यवस्था से समझाया गया।
यहां एक जरूरी सावधानी है। अनैक्सिमैंडर का विचार आज के सौरमंडल वाले मॉडल जैसा नहीं था। वे पृथ्वी को आधुनिक अर्थ में सूर्य की परिक्रमा करता हुआ गोल ग्रह नहीं मानते थे। उनके मॉडल में पृथ्वी ब्रह्मांड के केंद्र में एक तरह के बेलनाकार पिंड जैसी समझी गई थी ।
इसलिए सही निष्कर्ष यह नहीं कि अनैक्सिमैंडर को आधुनिक खगोलशास्त्र मालूम था। सही निष्कर्ष यह है कि “पृथ्वी को किसी सहारे की जरूरत नहीं” वाला विचार केवल अय्यूब तक सीमित नहीं था।
अय्यूब की आयत अपने धार्मिक और साहित्यिक संदर्भ में उल्लेखनीय हो सकती है। लेकिन यह कहना कि “तीन हजार साल पहले अय्यूब को वह बात पता थी जो किसी और को नहीं पता थी” — ऐसा दावा ऐतिहासिक रूप से भरोसेमंद नहीं है, क्योंकि अनैक्सिमैंडर का प्राचीन मॉडल इस विचार का स्पष्ट प्रतिवाद देता है ।
सीधी बात: पृथ्वी के “बिना सहारे” होने का विचार प्राचीन दुनिया में बिल्कुल अकेला या विशिष्ट नहीं था।