यह कहना सही नहीं कि ‘किसी और’ ने पृथ्वी को बिना सहारे मानने का विचार नहीं रखा था। माइलीटस के यूनानी विचारक अनैक्सिमैंडर को शुरुआती छठी सदी ईसा पूर्व के आसपास का माना जाता है [3]। उन्हें यह विचार देने का श्रेय दिया जाता है कि पृथ्वी ब्रह्मांड के केंद्र में स्वतंत्र रूप से स्थित है और किसी चीज़ से टिकाई नहीं गई है [2]...

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: Stimmt es, dass sonst niemand wusste, dass die Erde nicht an etwas hängt?. Article summary: Es stimmt nicht, dass „sonst niemand“ wusste oder dachte, dass die Erde nicht auf etwas ruht.. Topic tags: general web, video, microsoft, education. Reference image context from search candidates: Reference image 1: visual subject "Dieses Buch bringt im wesentlichen den Inhalt der. Gifford::Vorträge, die ich von Januar bis März 1927 an der. Universität Edinburg gehalten habe." source context "Das Weltbild der Physik und ein Versuch seiner philosophischen Deutung: The nature of the physical world | Springer Natu" Reference image 2: visual subject "Dieses Buch bringt im wesentlichen den Inhalt der. Gifford::Vorträge, die ich von Januar bis März 1927 an der. Universität Edinburg gehalten habe." source context "Das Weltbild der Ph
संक्षेप में: नहीं। यह दावा कि “पृथ्वी किसी चीज़ पर नहीं टिकी” — यह बात अय्यूब या बाइबल के अलावा किसी को मालूम नहीं थी — इतिहास की कसौटी पर मजबूत नहीं ठहरता।
अक्सर यह तर्क दिया जाता है कि प्राचीन दुनिया में लोग पृथ्वी को किसी आधार, खंभे या सहारे पर टिका हुआ मानते थे, इसलिए अय्यूब में पृथ्वी के “बिना सहारे” होने का विचार असाधारण और बिल्कुल अनोखा था। लेकिन उपलब्ध प्राचीन दर्शन के इतिहास में कम-से-कम एक बड़ा अपवाद मिलता है: माइलीटस के अनैक्सिमैंडर।
अनैक्सिमैंडर एक यूनानी विचारक थे, जिन्हें शुरुआती छठी सदी ईसा पूर्व के आसपास रखा जाता है । उन्हें यह विचार देने का श्रेय दिया जाता है कि पृथ्वी ब्रह्मांड के केंद्र में स्वतंत्र रूप से स्थित है और किसी चीज़ से टिकी या उठाई नहीं गई है
।
प्राचीन विवरणों के अनुसार, अनैक्सिमैंडर का तर्क था कि पृथ्वी अपनी जगह इसलिए स्थिर है क्योंकि वह सभी चीज़ों से समान दूरी पर है; इसलिए उसके पास किसी एक दिशा में गिरने या जाने का कोई विशेष कारण नहीं है, और उसे सहारे की जरूरत नहीं पड़ती ।
यह बात आधुनिक विज्ञान जैसी नहीं थी, लेकिन उस समय के लिए यह एक अलग तरह की सोच थी: पृथ्वी को किसी भौतिक आधार पर टिकाकर समझाने के बजाय, उसकी स्थिति को ब्रह्मांडीय व्यवस्था से समझाया गया।
यहां एक जरूरी सावधानी है। अनैक्सिमैंडर का विचार आज के सौरमंडल वाले मॉडल जैसा नहीं था। वे पृथ्वी को आधुनिक अर्थ में सूर्य की परिक्रमा करता हुआ गोल ग्रह नहीं मानते थे। उनके मॉडल में पृथ्वी ब्रह्मांड के केंद्र में एक तरह के जैसी समझी गई थी ।
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यह कहना सही नहीं कि ‘किसी और’ ने पृथ्वी को बिना सहारे मानने का विचार नहीं रखा था।
यह कहना सही नहीं कि ‘किसी और’ ने पृथ्वी को बिना सहारे मानने का विचार नहीं रखा था। माइलीटस के यूनानी विचारक अनैक्सिमैंडर को शुरुआती छठी सदी ईसा पूर्व के आसपास का माना जाता है [3]।
उन्हें यह विचार देने का श्रेय दिया जाता है कि पृथ्वी ब्रह्मांड के केंद्र में स्वतंत्र रूप से स्थित है और किसी चीज़ से टिकाई नहीं गई है [2][4]।
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इसलिए सही निष्कर्ष यह नहीं कि अनैक्सिमैंडर को आधुनिक खगोलशास्त्र मालूम था। सही निष्कर्ष यह है कि “पृथ्वी को किसी सहारे की जरूरत नहीं” वाला विचार केवल अय्यूब तक सीमित नहीं था।
अय्यूब की आयत अपने धार्मिक और साहित्यिक संदर्भ में उल्लेखनीय हो सकती है। लेकिन यह कहना कि “तीन हजार साल पहले अय्यूब को वह बात पता थी जो किसी और को नहीं पता थी” — ऐसा दावा ऐतिहासिक रूप से भरोसेमंद नहीं है, क्योंकि अनैक्सिमैंडर का प्राचीन मॉडल इस विचार का स्पष्ट प्रतिवाद देता है ।
सीधी बात: पृथ्वी के “बिना सहारे” होने का विचार प्राचीन दुनिया में बिल्कुल अकेला या विशिष्ट नहीं था।
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