इसीलिए इस विषय में “लगभग इतना प्रतिशत” कहना ज्यादा ईमानदार है, बजाय इसके कि कोई बहुत सटीक दिखने वाली संख्या दे दी जाए। नैदानिक रूप से पहचानी जाने वाली गर्भावस्था से पहले के आंकड़े सीमित हैं, और पुराने अनुमानों को भी काफी अनिश्चित माना गया है ।
गर्भाशय में आरोपण यानी implantation से पहले भ्रूण-हानि प्राकृतिक परिस्थितियों में लगभग 10–40% आंकी गई है । लेकिन यह 40–60% कुल हानि के ऊपर अलग से जोड़ने वाली संख्या नहीं है। यह उसी पूरी प्रक्रिया का एक शुरुआती हिस्सा है—निषेचन से जन्म तक की श्रृंखला का एक चरण
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बहसों में अक्सर यही गणना-गलती हो जाती है: सबसे शुरुआती हानियां, बाद की गर्भावस्था-हानियां और जन्म—ये अलग-अलग जोड़ने योग्य ढेर नहीं, बल्कि एक ही जैविक यात्रा के क्रमिक चरण हैं।
कभी-कभी यह दावा सुनने को मिलता है कि 70% या उससे अधिक भ्रूण जन्म से पहले ही नष्ट हो जाते हैं। लेकिन “Early embryo mortality in natural human reproduction” नामक समीक्षा ऐसे ऊँचे अनुमानों पर सवाल उठाती है, क्योंकि बहुत शुरुआती चरण के केंद्रीय आंकड़े अनिश्चित हैं ।
एक बाद के लेख ने और भी चरम दावों की आलोचना की—जैसे यह कहना कि 15% से भी कम निषेचित अंडाणु जन्म तक पहुँचते हैं। उस लेख के अनुसार, ऐसे आंकड़े प्राकृतिक मानव प्रजनन में भ्रूण-हानि और गर्भावस्था-हानि के वैज्ञानिक ज्ञान का सही प्रतिनिधित्व नहीं करते ।
40–60% का अनुमान प्राकृतिक परिस्थितियों में निषेचन से जन्म तक की पूरी अवधि पर लागू होता है । यह केवल clinically recognized miscarriage यानी ऐसी गर्भहानि की दर नहीं है जिसे गर्भावस्था पहचाने जाने के बाद दर्ज किया गया हो। इसमें वे बहुत शुरुआती हानियां भी शामिल हैं, जो अक्सर गर्भावस्था का पता चलने से पहले हो जाती हैं
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सबसे संतुलित वाक्य यही होगा: प्राकृतिक परिस्थितियों में लगभग 40–60% निषेचित अंडाणु या जाइगोट जन्म तक नहीं पहुँचते । सटीक संख्या अब भी अनिश्चित है, खासकर इसलिए कि निषेचन के बाद पहले कुछ दिनों और हफ्तों की हानियों को मापना कठिन है
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