अब तक की स्थिति
6 सितंबर तक उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी के अनुसार, अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और जैरेड कुशनर मॉस्को में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से करीब तीन घंटे की बातचीत के बाद कीव पहुंचे। वहां उन्होंने यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की। एजेंडा रूस-यूक्रेन युद्ध समाप्त करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों को आगे बढ़ाना था, लेकिन किसी ठोस सफलता या समझौते की घोषणा नहीं हुई।
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अमेरिका-यूक्रेन की अलग बैठक में किन मुद्दों पर बात हुई?
- अमेरिकी दूतों से अपेक्षा थी कि वे मॉस्को में पुतिन के साथ हुई बातचीत का आकलन यूक्रेनी पक्ष के सामने रखें और आगे की कूटनीतिक राह पर चर्चा करें।
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- बातचीत शुरू होने से पहले ज़ेलेंस्की ने कहा था कि यूक्रेन रचनात्मक चर्चा के लिए तैयार है। विटकॉफ ने बाद में वार्ता को “महत्वपूर्ण” और सार्थक बताया।
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- फिर भी, सार्वजनिक रूप से किसी शांति-योजना का विस्तृत पाठ, क्षेत्रीय व्यवस्था, युद्धविराम की शर्तें या सुरक्षा गारंटी का दस्तावेज जारी नहीं किया गया। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि पक्ष किसी तय ढांचे पर सहमत हो गए हैं।
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- यह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में दोनों अमेरिकी दूतों की कीव की पहली यात्रा थी। इसका व्यापक उद्देश्य रूस के साथ अमेरिकी संपर्क को यूक्रेन और यूरोपीय साझेदारों के साथ समन्वय से जोड़ना था।
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ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी के सुरक्षा सलाहकार क्यों जुड़े?
ज़ेलेंस्की ने कहा था कि वार्ताओं का एक सत्र यूरोपीय राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के साथ होगा। रिपोर्टों के अनुसार, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी के सलाहकार कुछ बैठकों में शामिल होने वाले थे।
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इस विस्तारित प्रारूप का महत्व यह है कि यूरोप केवल बाद में जानकारी पाने वाला पक्ष न रहे, बल्कि चर्चा में सीधे शामिल हो। सार्वजनिक पृष्ठभूमि से तीन बड़े मुद्दे उभरते हैं:
- युद्ध खत्म करने के लिए ठहरी हुई कूटनीतिक प्रक्रिया को फिर से कैसे गति दी जाए;
- बातचीत और उसके संभावित क्रियान्वयन में यूरोप की भूमिका क्या हो;
- युद्धविराम या युद्धोत्तर व्यवस्था की स्थिति में यूक्रेन की सुरक्षा से जुड़े प्रबंध कैसे तय हों।
ज़ेलेंस्की पहले भी ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी के नेताओं के साथ शांति के लिए कूटनीति को फिर सक्रिय करने और यूरोप की भागीदारी पर चर्चा कर चुके हैं।
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किन बातों की अभी पुष्टि नहीं हुई है?
सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के आधार पर इन मुद्दों पर निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है:
- रूस की किसी विशिष्ट मांग पर अमेरिका, यूक्रेन और यूरोपीय पक्षों की साझा सहमति;
- यूक्रेन से क्षेत्रीय रियायत की कोई स्वीकृति;
- युद्धविराम की निगरानी का तंत्र;
- सुरक्षा गारंटी का कानूनी या सैन्य स्वरूप;
- अमेरिका या यूरोपीय देशों की किसी सैनिक तैनाती का प्रस्ताव या निर्णय।
फिलहाल सबसे स्पष्ट बात यही है कि संपर्क और वार्ता जारी हैं, लेकिन सार्वजनिक स्तर पर कोई निर्णायक समझौता सामने नहीं आया है।
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