इससे पहले ADNOC ने पुष्टि की थी कि जलडमरूमध्य पार करते समय उसके दो जहाज़ों पर हमला हुआ। कंपनी ने अभियान से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी साझा नहीं की। इसके बाद UAE ने हमलों के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराते हुए तेहरान से वाणिज्यिक नौवहन के खिलाफ कार्रवाई रोकने और जलडमरूमध्य को पूरी तरह फिर खोलने की मांग की।
इन घटनाओं का असर केवल जहाज़ों को हुए नुकसान या मार्ग में देरी तक सीमित नहीं है। तेल टैंकर संचालकों, चालक दल और ऊर्जा कारोबारियों को इस संकरे समुद्री मार्ग से गुजरने के जोखिम का दोबारा आकलन करना पड़ रहा है। नया हमला जहाज़ों की आवाजाही और घटा सकता है तथा कच्चे तेल के परिवहन की लागत बढ़ा सकता है।
हॉर्मुज़ की नौवहन स्थिति पर आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, जहाज़ों की आवाजाही सामान्य मात्रा के 10% से भी नीचे आ गई थी। उसी दौरान ईरान ने जहाज़ों को अपने बताए गए क्षेत्रीय जलमार्गों में रहने की चेतावनी दी। 17 अगस्त तक सप्ताहांत में तेल टैंकरों की आवाजाही धीमी बनी रही और अमेरिका तथा ईरान के बीच शांति समझौता नहीं हो सका।
यह समझना जरूरी है कि “बंद” होने का मतलब हमेशा यह नहीं होता कि कोई भी जहाज़ बिल्कुल नहीं गुजर सकता। इसका अर्थ जहाज़ों का रुकना, इंतजार करना, रास्ता बदलना या बेहद सीमित परिस्थितियों में आगे बढ़ना भी हो सकता है। अलग-अलग पक्षों के आंकड़ों और “पूरी तरह बंद” होने के दावों में अंतर है। इसलिए फिलहाल सबसे सावधान निष्कर्ष यही है कि वाणिज्यिक नौवहन गंभीर रूप से सिमट गया है, लेकिन वास्तविक स्थिति की पुष्टि के लिए ताजा जहाज़-आवागमन आंकड़ों की जरूरत है।
ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि अमेरिका की नीति में बदलाव होने तक हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य दोबारा नहीं खोला जाएगा। बताई गई शर्तों में युद्ध समाप्त करना, अमेरिकी समुद्री नाकाबंदी और प्रतिबंध हटाना तथा क्षेत्र से अमेरिकी सैन्य बलों की वापसी शामिल हैं।
ईरान की ओर से यह भी कहा गया कि जलडमरूमध्य “ईरानी ही रहेगा।” यह राजनीतिक और सैन्य दावा उस भौगोलिक तथा प्रशासनिक वास्तविकता से टकराता है जिसमें जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित है। रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि इसके संचालन और वास्तविक नियंत्रण का सवाल अभी विवादित है; किसी एक पक्ष के सार्वजनिक बयान से इसका अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
इसलिए मौजूदा विवाद को कम-से-कम दो अलग सवालों में देखना चाहिए: पहला, क्या जहाज़ सुरक्षित और लगातार गुजर सकते हैं; दूसरा, क्या किसी एक पक्ष के पास पूरे अंतरराष्ट्रीय नौवहन मार्ग का भविष्य अकेले तय करने का अधिकार है। दोनों बातें एक जैसी नहीं हैं।
अमेरिका ने कहा है कि वह ईरानी बंदरगाहों पर समुद्री नाकाबंदी जारी रखेगा और इसे अनिश्चितकाल तक बनाए रखा जा सकता है। वॉशिंगटन ने ईरान पर आर्थिक दबाव और बढ़ाने की भी बात कही है। इसी पृष्ठभूमि में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान को हराने के बाद अमेरिका जल्द ही हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को अमेरिकी क्षेत्र घोषित करेगा।
इस बयान पर तुरंत प्रतिक्रिया हुई। रिपोर्टों के अनुसार, जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित है और अमेरिका के पास इस जलमार्ग पर मौजूदा क्षेत्रीय अधिकार नहीं है। एक अन्य रिपोर्ट में व्हाइट हाउस के अधिकारी के हवाले से कहा गया कि ट्रंप का बयान मजाक में था और इस योजना पर उन्होंने अपने सलाहकारों से चर्चा नहीं की थी। इसलिए यह घोषणा फिलहाल विस्तृत नीति की तुलना में ईरान पर दबाव बनाने और कठोर रुख दिखाने वाले राजनीतिक संकेत के तौर पर अधिक दिखाई देती है।
UAE ने ADNOC से जुड़े जहाज़ों पर हमलों की निंदा करते हुए कहा कि वाणिज्यिक नौवहन और समुद्री सुरक्षा की रक्षा जरूरी है। कतर ने जलडमरूमध्य को बिना किसी शर्त के फिर खोलने की मांग की और हॉर्मुज़ को दबाव बनाने के साधन के रूप में इस्तेमाल करने का विरोध किया।
कुवैत और बहरीन ने भी हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून, समुद्री आवागमन की स्वतंत्रता और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 का उल्लंघन बताया। मार्च में पारित इस प्रस्ताव में ईरान से खाड़ी देशों पर हमले रोकने की मांग की गई थी। हालिया जहाज़ी घटनाओं की निंदा करते समय खाड़ी देशों ने बार-बार इसी प्रस्ताव का उल्लेख किया है।
इन प्रतिक्रियाओं से स्पष्ट है कि विवाद अब केवल अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत तक सीमित नहीं है। समुद्री ऊर्जा परिवहन और आयात-व्यापार पर निर्भर खाड़ी देशों के लिए जलडमरूमध्य में लगातार रुकावट का मतलब है—नौवहन सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय स्थिरता, तीनों पर एक साथ दबाव।
नौवहन में रुकावट और वार्ताओं के ठहरने से बाजार ने आपूर्ति बाधित होने के जोखिम को फिर कीमतों में शामिल करना शुरू किया। 17 अगस्त की शुरुआती ट्रेडिंग में ब्रेंट कच्चा तेल करीब 88.72 डॉलर प्रति बैरल पर था। रिपोर्ट के अनुसार, ADNOC टैंकरों पर हमलों और क्षेत्र की अन्य ऊर्जा सुविधाओं पर हमलों के बीच ब्रेंट और अमेरिकी कच्चे तेल के वायदा भाव पिछले सप्ताह 5% से अधिक चढ़े थे।
यह कीमत इस बात का प्रमाण नहीं है कि जलडमरूमध्य संकट के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति में उसी अनुपात में कमी आ चुकी है। यह मुख्य रूप से परिवहन में देरी, बीमा लागत बढ़ने, सैन्य तनाव बढ़ने और वार्ता विफल होने की आशंका को दर्शाती है। जब तक जहाज़ों की आवाजाही निचले स्तर पर रहती है या किसी नए वाणिज्यिक जहाज़ को निशाना बनाया जाता है, तब तक तेल की कीमतों में भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम बना रह सकता है।
निकट भविष्य में तीन संकेतक सबसे अहम होंगे:
फिलहाल सबसे स्पष्ट निष्कर्ष यह नहीं है कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पर किसी एक पक्ष का पूर्ण नियंत्रण स्थापित हो चुका है। स्पष्ट यह है कि वहां से गुजरने वाला वाणिज्यिक यातायात गंभीर रूप से सिमट गया है, जहाज़ लगातार हमलों के जोखिम में हैं, अमेरिका और ईरान इस समुद्री मार्ग को बातचीत और दबाव के औजार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं—और वैश्विक ऊर्जा बाजार इस अनिश्चितता की कीमत चुका रहा है।
इससे पहले ADNOC ने पुष्टि की थी कि जलडमरूमध्य पार करते समय उसके दो जहाज़ों पर हमला हुआ। कंपनी ने अभियान से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी साझा नहीं की। इसके बाद UAE ने हमलों के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराते हुए तेहरान से वाणिज्यिक नौवहन के खिलाफ कार्रवाई रोकने और जलडमरूमध्य को पूरी तरह फिर खोलने की मांग की।
इन घटनाओं का असर केवल जहाज़ों को हुए नुकसान या मार्ग में देरी तक सीमित नहीं है। तेल टैंकर संचालकों, चालक दल और ऊर्जा कारोबारियों को इस संकरे समुद्री मार्ग से गुजरने के जोखिम का दोबारा आकलन करना पड़ रहा है। नया हमला जहाज़ों की आवाजाही और घटा सकता है तथा कच्चे तेल के परिवहन की लागत बढ़ा सकता है।
हॉर्मुज़ की नौवहन स्थिति पर आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, जहाज़ों की आवाजाही सामान्य मात्रा के 10% से भी नीचे आ गई थी। उसी दौरान ईरान ने जहाज़ों को अपने बताए गए क्षेत्रीय जलमार्गों में रहने की चेतावनी दी। 17 अगस्त तक सप्ताहांत में तेल टैंकरों की आवाजाही धीमी बनी रही और अमेरिका तथा ईरान के बीच शांति समझौता नहीं हो सका।
यह समझना जरूरी है कि “बंद” होने का मतलब हमेशा यह नहीं होता कि कोई भी जहाज़ बिल्कुल नहीं गुजर सकता। इसका अर्थ जहाज़ों का रुकना, इंतजार करना, रास्ता बदलना या बेहद सीमित परिस्थितियों में आगे बढ़ना भी हो सकता है। अलग-अलग पक्षों के आंकड़ों और “पूरी तरह बंद” होने के दावों में अंतर है। इसलिए फिलहाल सबसे सावधान निष्कर्ष यही है कि वाणिज्यिक नौवहन गंभीर रूप से सिमट गया है, लेकिन वास्तविक स्थिति की पुष्टि के लिए ताजा जहाज़-आवागमन आंकड़ों की जरूरत है।
ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि अमेरिका की नीति में बदलाव होने तक हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य दोबारा नहीं खोला जाएगा। बताई गई शर्तों में युद्ध समाप्त करना, अमेरिकी समुद्री नाकाबंदी और प्रतिबंध हटाना तथा क्षेत्र से अमेरिकी सैन्य बलों की वापसी शामिल हैं।
ईरान की ओर से यह भी कहा गया कि जलडमरूमध्य “ईरानी ही रहेगा।” यह राजनीतिक और सैन्य दावा उस भौगोलिक तथा प्रशासनिक वास्तविकता से टकराता है जिसमें जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित है। रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि इसके संचालन और वास्तविक नियंत्रण का सवाल अभी विवादित है; किसी एक पक्ष के सार्वजनिक बयान से इसका अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
इसलिए मौजूदा विवाद को कम-से-कम दो अलग सवालों में देखना चाहिए: पहला, क्या जहाज़ सुरक्षित और लगातार गुजर सकते हैं; दूसरा, क्या किसी एक पक्ष के पास पूरे अंतरराष्ट्रीय नौवहन मार्ग का भविष्य अकेले तय करने का अधिकार है। दोनों बातें एक जैसी नहीं हैं।
अमेरिका ने कहा है कि वह ईरानी बंदरगाहों पर समुद्री नाकाबंदी जारी रखेगा और इसे अनिश्चितकाल तक बनाए रखा जा सकता है। वॉशिंगटन ने ईरान पर आर्थिक दबाव और बढ़ाने की भी बात कही है। इसी पृष्ठभूमि में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान को हराने के बाद अमेरिका जल्द ही हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को अमेरिकी क्षेत्र घोषित करेगा।
इस बयान पर तुरंत प्रतिक्रिया हुई। रिपोर्टों के अनुसार, जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित है और अमेरिका के पास इस जलमार्ग पर मौजूदा क्षेत्रीय अधिकार नहीं है। एक अन्य रिपोर्ट में व्हाइट हाउस के अधिकारी के हवाले से कहा गया कि ट्रंप का बयान मजाक में था और इस योजना पर उन्होंने अपने सलाहकारों से चर्चा नहीं की थी। इसलिए यह घोषणा फिलहाल विस्तृत नीति की तुलना में ईरान पर दबाव बनाने और कठोर रुख दिखाने वाले राजनीतिक संकेत के तौर पर अधिक दिखाई देती है।
UAE ने ADNOC से जुड़े जहाज़ों पर हमलों की निंदा करते हुए कहा कि वाणिज्यिक नौवहन और समुद्री सुरक्षा की रक्षा जरूरी है। कतर ने जलडमरूमध्य को बिना किसी शर्त के फिर खोलने की मांग की और हॉर्मुज़ को दबाव बनाने के साधन के रूप में इस्तेमाल करने का विरोध किया।
कुवैत और बहरीन ने भी हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून, समुद्री आवागमन की स्वतंत्रता और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 का उल्लंघन बताया। मार्च में पारित इस प्रस्ताव में ईरान से खाड़ी देशों पर हमले रोकने की मांग की गई थी। हालिया जहाज़ी घटनाओं की निंदा करते समय खाड़ी देशों ने बार-बार इसी प्रस्ताव का उल्लेख किया है।
इन प्रतिक्रियाओं से स्पष्ट है कि विवाद अब केवल अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत तक सीमित नहीं है। समुद्री ऊर्जा परिवहन और आयात-व्यापार पर निर्भर खाड़ी देशों के लिए जलडमरूमध्य में लगातार रुकावट का मतलब है—नौवहन सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय स्थिरता, तीनों पर एक साथ दबाव।
नौवहन में रुकावट और वार्ताओं के ठहरने से बाजार ने आपूर्ति बाधित होने के जोखिम को फिर कीमतों में शामिल करना शुरू किया। 17 अगस्त की शुरुआती ट्रेडिंग में ब्रेंट कच्चा तेल करीब 88.72 डॉलर प्रति बैरल पर था। रिपोर्ट के अनुसार, ADNOC टैंकरों पर हमलों और क्षेत्र की अन्य ऊर्जा सुविधाओं पर हमलों के बीच ब्रेंट और अमेरिकी कच्चे तेल के वायदा भाव पिछले सप्ताह 5% से अधिक चढ़े थे।
यह कीमत इस बात का प्रमाण नहीं है कि जलडमरूमध्य संकट के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति में उसी अनुपात में कमी आ चुकी है। यह मुख्य रूप से परिवहन में देरी, बीमा लागत बढ़ने, सैन्य तनाव बढ़ने और वार्ता विफल होने की आशंका को दर्शाती है। जब तक जहाज़ों की आवाजाही निचले स्तर पर रहती है या किसी नए वाणिज्यिक जहाज़ को निशाना बनाया जाता है, तब तक तेल की कीमतों में भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम बना रह सकता है।
निकट भविष्य में तीन संकेतक सबसे अहम होंगे:
फिलहाल सबसे स्पष्ट निष्कर्ष यह नहीं है कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पर किसी एक पक्ष का पूर्ण नियंत्रण स्थापित हो चुका है। स्पष्ट यह है कि वहां से गुजरने वाला वाणिज्यिक यातायात गंभीर रूप से सिमट गया है, जहाज़ लगातार हमलों के जोखिम में हैं, अमेरिका और ईरान इस समुद्री मार्ग को बातचीत और दबाव के औजार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं—और वैश्विक ऊर्जा बाजार इस अनिश्चितता की कीमत चुका रहा है।