इस खबर के बाद चीनी ऑप्टिकल मॉड्यूल कंपनियों के शेयरों में जबरदस्त बिकवाली देखने को मिली। दुनिया की सबसे बड़ी ट्रांसीवर सप्लायर Zhongji Innolight का शेयर शेनझेन कारोबार के दौरान 14% तक गिर गया, हालांकि बाद में यह लगभग 7% की गिरावट के साथ बंद हुआ । Eoptolink Technology के शेयर में कारोबार के दौरान 10% से अधिक की गिरावट आई और यह 5.3% नीचे बंद हुआ । पूरे CSI300 Telecommunication Services Index में शुरुआती कारोबार में 9% तक की गिरावट दर्ज की गई । Accelink, Hisense Broadband और Suzhou TFC Optical Communication जैसी अन्य कंपनियों के शेयर भी नीचे आए ।
FCC एक नियम बनाने पर काम कर रहा है जो AI डेटा सेंटर्स में इस्तेमाल होने वाले नए मॉडल के चीनी ऑप्टिकल ट्रांसीवर्स के आयात पर प्रतिबंध लगाएगा । यह प्रतिबंध अगली पीढ़ी के मॉड्यूल पर लक्षित है, लेकिन यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि पुराने मॉडल इससे छूट में रहेंगे या नहीं । अधिकारी 2026 में इस उपाय को प्रकाशित करना चाहते हैं, लेकिन इसमें अभी भी बदलाव या इसे पूरी तरह खारिज किया जा सकता है ।
यह प्रतिबंध उन कम्पोनेंट्स को निशाना बनाएगा जो Amazon, Microsoft, Google और Meta जैसी दिग्गज कंपनियों के विशाल AI इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए महत्वपूर्ण हैं। ये फाइबर-ऑप्टिक केबल हैं जो इन डेटा सेंटर्स के अंदर डेटा रूट करती हैं ।
चीनी निर्माताओं का वैश्विक ऑप्टिकल ट्रांसीवर आपूर्ति में लगभग दो-तिहाई (66%) हिस्सा है । अमेरिका इन कम्पोनेंट्स का एक बड़ा अंतिम बाजार है, जिसका इस्तेमाल चारों बड़ी हाइपरस्केलर कंपनियां अपने AI डेटा सेंटर्स के निर्माण में करती हैं ।
Counterpoint Research ने 5 अगस्त को एक नोट में चेतावनी दी कि कोई भी पश्चिमी विकल्प (Coherent, Lumentum, Applied Optoelectronics) एक से दो साल के भीतर इस मात्रा को अवशोषित नहीं कर सकता, जिसका मतलब है कि प्रतिबंध लगने से आपूर्ति में गंभीर बाधा उत्पन्न होगी । काउंटरपॉइंट के विश्लेषक नील शाह ने लिखा कि अगर चीनी ऑप्टिक्स आपूर्तिकर्ताओं को काट दिया जाता है, तो अमेरिकी हाइपरस्केलर कंपनियों को अपने AI बुनियादी ढांचे के लिए अधिक लागत और देरी का सामना करना पड़ेगा ।
चीनी सरकार ने इस प्रस्ताव को "असंभव परिदृश्य" बताया और चेतावनी दी कि चूंकि कोई वैकल्पिक आपूर्ति नहीं है, इसलिए यह कदम उलटा पड़ेगा और अमेरिकी उद्योग को नुकसान पहुंचाएगा ।
चीनी विक्रेता लंबे समय से इसी स्थिति के लिए तैयारी कर रहे थे। 2022 से ही, Zhongji Innolight, Eoptolink और अन्य कंपनियां मुख्य रूप से थाईलैंड में चीन के बाहर अपनी विनिर्माण इकाइयां स्थापित कर रही हैं। उत्तरी अमेरिका की कई शिपमेंट पहले से ही उन विदेशी कारखानों से आती हैं, जिसका मतलब है कि नए मॉडल के आयात को संभावित रूप से थाईलैंड जैसे देशों के जरिए रुट किया जा सकता है, जिससे प्रतिबंध का असर कम हो जाएगा ।
एक दिलचस्प बात सामने आई कि जहां चीनी ऑप्टिकल स्टॉक धराशायी हो गए, वहीं अमेरिकी ऑप्टिकल कम्पोनेंट स्टॉक्स में जबरदस्त तेजी देखी गई:
NVIDIA और अन्य अमेरिकी AI चिप स्टॉक्स में कोई बड़ी गिरावट नहीं आई और वे मोटे तौर पर स्थिर या बढ़त के साथ बंद हुए, क्योंकि प्रतिबंध को ट्रांसीवर की मांग को अमेरिकी/सहयोगी आपूर्तिकर्ताओं की ओर मोड़ने के संभावित अवसर के रूप में देखा गया ।
इसके विपरीत, एशियाई AI हार्डवेयर सेक्टर में Samsung और SK Hynix जैसी कंपनियों में मामूली गिरावट आई, जबकि सबसे बड़ा नुकसान चीनी ऑप्टिकल कंपनियों को हुआ ।
अधिकांश विश्लेषकों का मानना है कि कड़ाई से लागू किए जाने वाले प्रतिबंध की संभावना बहुत कम है।
Jefferies ने एक रिसर्च नोट में कहा कि प्रस्तावित प्रतिबंध को लागू किए जाने का जोखिम कम बना हुआ है। उन्होंने इसे सितंबर में होने वाली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच अपेक्षित बैठक से पहले एक संभावित सौदेबाजी की चाल करार दिया । ब्रोकरेज ने चीन की दुर्लभ मिट्टी के निर्यात पर प्रतिबंधों की ओर भी इशारा किया, जिसने अमेरिकी ऑप्टिक्स उद्योग को प्रभावित किया है और इसे चीन की जवाबी कार्रवाई के रूप में देखा जा सकता है ।
MarketWatch ने Jefferies समेत कई विश्लेषकों के हवाले से बताया कि वैश्विक ट्रांसीवर आपूर्ति पर चीनी कंपनियों के दबदबे के कारण इस प्रतिबंध के स्पष्ट रूप से लागू होने की संभावना नहीं है ।
विश्लेषकों के तर्कों में शामिल हैं:
Counterpoint Research ने आपूर्ति बाधाओं की चेतावनी देते हुए भी माना कि पश्चिमी विकल्प 1-2 साल के भीतर इस मात्रा को अवशोषित नहीं कर सकते, जिससे प्रतिबंध का प्रवर्तन अव्यावहारिक हो जाता है ।
Raymond James ने Coherent और Applied Optoelectronics को किसी भी प्रतिबंध का सबसे अधिक लाभ उठाने वाली अमेरिकी कंपनियां बताया, लेकिन उनके पास भी बड़े पैमाने पर चीनी आपूर्ति को बदलने की क्षमता नहीं है ।
संक्षेप में, 5 अगस्त को आई गिरावट एक बड़ी लेकिन मुख्य रूप से भावनात्मक प्रतिक्रिया थी, जो एक नीतिगत प्रस्ताव के कारण हुई जिसके लागू होने में भारी व्यावहारिक बाधाएं हैं। चीनी निर्माताओं का वैश्विक आपूर्ति पर दबदबा है, वे पहले से ही चीन के बाहर उत्पादन में विविधता ला चुके हैं, और उनके ग्राहक (हाइपरस्केलर) किसी भी व्यवधान का कड़ा विरोध करेंगे। Jefferies और वॉल स्ट्रीट के अन्य विश्लेषकों के अनुसार, यह प्रस्ताव अल्पकालिक खतरे से ज्यादा एक शोर है, जो सिर्फ एक सौदेबाजी की स्थिति है, न कि कोई तत्काल नियामक निश्चितता ।