तीसरा कारण: बढ़ती प्रतिस्पर्धा
Temu जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ने भी इसी तरह की रणनीति (कम कीमत, सब्सिडी, डायरेक्ट शिपिंग) अपनाकर कंज्यूमर्स को लुभाना शुरू कर दिया। इस प्रतिस्पर्धा ने SHEIN को प्राइसिंग, मार्केटिंग और डिलीवरी पर ज़्यादा खर्च करने पर मजबूर कर दिया। नतीजतन, निवेशक अब SHEIN को एक अनोखा और अनिवार्य प्लेटफॉर्म नहीं मानते, जिससे इसकी 'स्कार्सिटी वैल्यू' कम हो गई है।
चौथा कारण: IPO में देरी और नियामक अनिश्चितता
SHEIN ने पहले अमेरिका, फिर लंदन और अब हांगकांग में IPO की योजना बनाई, लेकिन इसमें बार-बार देरी हुई। इसके अलावा, कंपनी लगातार उत्पाद सुरक्षा, श्रम प्रथाओं, सप्लाई चेन पारदर्शिता और डेटा नियमों की जांच के दायरे में रही। IPO में देरी का मतलब है कि शुरुआती निवेशकों को अपना पैसा निकालने के लिए ज़्यादा इंतजार करना होगा, जो जोखिम बढ़ाता है। सार्वजनिक बाजार में लिक्विडिटी न होने के कारण, प्राइवेट मार्केट में शेयरों की बिक्री पर अक्सर डिस्काउंट मिलता है, जिससे वैल्यूएशन पर और दबाव पड़ता है।
निष्कर्ष
SHEIN के वैल्यूएशन में गिरावट सिर्फ 'बिज़नेस खराब होने' का नतीजा नहीं है, बल्कि इसके पीछे उन सभी आर्थिक और बाजारीय धारणाओं पर सवाल उठना है जिन पर SHEIN का पूरा मॉडल टिका था। टैरिफ, बढ़ती लागत, प्रतिस्पर्धा, धीमी ग्रोथ और IPO अनिश्चितता ने मिलकर निवेशकों को SHEIN का वैल्यूएशन अधिक रूढ़िवादी आधार पर करने पर मजबूर कर दिया है।