श्रवण-हानि वाले बच्चों के संदर्भ में भाषा-इनपुट और वयस्कों की भाषा-शैली की भूमिका अधिक संवेदनशील हो सकती है। एक संबंधित अध्ययन में माता-पिता के बच्चों से बातचीत करने के तरीके में समूहों के बीच अंतर नहीं पाया गया, फिर भी 48 महीने की उम्र में बच्चों की भाषा-क्षमता पर parental language input के प्रभाव में समूहों के बीच मजबूत अंतर दिखे ।
उस अध्ययन के अनुसार, सामान्य सुनने वाले बच्चे माता-पिता की भाषा-शैली के प्रति अपेक्षाकृत “resilient” थे। हियरिंग एड का उपयोग करने वाले बच्चे parental language input की मात्रा से अधिक प्रभावित हुए, जबकि कॉक्लियर इम्प्लांट वाले बच्चे ऐसे input से अधिक प्रभावित हुए जो बच्चे से भाषा निकलवाता था और अधिक जटिल भाषा का मॉडल देता था ।
इसका व्यावहारिक अर्थ यह नहीं है कि सभी परिवारों को एक ही “फॉर्मूला” अपनाना चाहिए। बल्कि संकेत यह है कि एक जैसी दिखने वाली बातचीत का असर बच्चे की सुनने की स्थिति और भाषा-प्रोफाइल के आधार पर अलग हो सकता है ।
संबंधित अध्ययनों से यह भी पता चलता है कि श्रवण-हानि वाले बच्चों में भाषा-नतीजों पर अतिरिक्त ध्यान की आवश्यकता हो सकती है। द्विपक्षीय श्रवण-हानि वाले बच्चों पर एक अध्ययन में औसत receptive language standard score 85 बताया गया, और भाषा प्रदर्शन को गैर-मौखिक संज्ञानात्मक स्तर की तुलना में देखा गया ।
एक अन्य अध्ययन में श्रवण-हानि वाले 5 साल के बच्चों के receptive और expressive language scores, सामान्य विकास वाले बच्चों के औसत से लगभग 1 मानक विचलन यानी 1 SD कम थे; speech production और everyday functioning के स्कोर 1 SD से भी अधिक कम बताए गए ।
2006 से 2016 तक के साहित्य पर आधारित एक systematic review ने श्रवण-हानि वाले और बिना श्रवण-हानि वाले बच्चों में भाषा-इनपुट की मात्रा के अंतर, और भाषा-इनपुट व receptive तथा expressive language outcomes के बीच संबंध को समझने का प्रयास किया ।
उपलब्ध स्रोतों में यह स्पष्ट है कि शोधकर्ताओं ने LENA रिकॉर्डिंग के लिखित अंशों से देखभालकर्ताओं की “high-level” प्रतिक्रियाएँ कोड कीं । लेकिन दिए गए प्रमाणों से यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं होता कि इस श्रेणी में कौन-कौन से उप-प्रकार शामिल थे—जैसे विस्तार, पुनर्व्याख्या, प्रश्न पूछना, या बच्चे के कथन में नया अर्थ जोड़ना।
इसलिए सबसे सुरक्षित भाषा में कहा जाए तो यह अध्ययन “बच्चे की बात पर अर्थपूर्ण, आगे बढ़ाने वाली प्रतिक्रिया” की दिशा में संकेत देता है, लेकिन उसकी सटीक परिभाषा और कोडिंग-श्रेणियों को मूल शोध-पद्धति से ही पुष्ट करना होगा।
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