यह कोई नया इंटरनेट-जनित विचार भी नहीं है। 1959 की एक मेडिकल जर्नल पेपर में महिलाओं के नॉक्टर्नल ऑर्गैज़्म और उसके मानसिक स्वास्थ्य, सपनों, विकास और यौन कारकों से संबंध पर चर्चा की गई थी। यानी यह विषय दशकों से चिकित्सा और शोध की नजर में रहा है।
फिर भी, उपलब्ध प्रमाणों को जरूरत से ज्यादा नहीं खींचना चाहिए। International Society for Sexual Medicine यानी यौन-चिकित्सा से जुड़ा एक अंतरराष्ट्रीय संगठन बताता है कि महिलाओं में नींद के दौरान ऑर्गैज़्म पर व्यापक शोध नहीं हुआ है। 2018 में NIH/PMC में प्रकाशित एक केस रिपोर्ट में 57 वर्षीय महिला का वर्णन है, जिन्हें लंबे समय से स्लीप-रिलेटेड ऑर्गैज़्म होते थे; बाद में जब यह परेशानी का कारण बनने लगा और इसके साथ नींद में झटके लगना तथा “exploding head syndrome” जैसे लक्षण दिखे, तब उनकी जांच हुई।
यानी अब तक की जानकारी यह समर्थन करती है कि महिलाओं में नींद के दौरान ऑर्गैज़्म हो सकता है, लेकिन यह कितनी बार होता है, किन लोगों में ज्यादा होता है और इसका पूरा जैविक तंत्र क्या है—इन सवालों पर अभी बहुत निश्चित निष्कर्ष नहीं निकाले जा सकते।
हर व्यक्ति के लिए इसका एक ही कारण बताना संभव नहीं है। सावधानी से कहा जाए तो सेक्स ड्रीम, नींद के दौरान मस्तिष्क में यौन उत्तेजना, शरीर का रिलैक्स होना, पेल्विक क्षेत्र में रक्त प्रवाह बढ़ना, और कभी-कभी सोने की मुद्रा, कपड़ों या बिस्तर से होने वाला शारीरिक स्पर्श—ये सभी कारक भूमिका निभा सकते हैं।
International Society for Sexual Medicine के अनुसार, महिलाओं में यौन सपने कभी-कभी योनि में लुब्रिकेशन और नॉक्टर्नल ऑर्गैज़्म से जुड़े हो सकते हैं, और यह किशोरावस्था से लेकर वयस्क जीवन तक हो सकता है। Flo Health इस अनुभव को पेल्विक क्षेत्र में बढ़े रक्त प्रवाह, रिलैक्सेशन और मनोवैज्ञानिक यौन उत्तेजना से जोड़ता है, और बताता है कि नींद में ऑर्गैज़्म किसी भी लिंग के व्यक्ति में हो सकता है।
कुछ लोकप्रिय चिकित्सा-व्याख्याओं में स्लीप लैब के अवलोकन का उल्लेख भी मिलता है: एक महिला में नींद के दौरान ऑर्गैज़्म के समय योनि रक्त प्रवाह, हृदय गति और सांस लेने की दर बढ़ी हुई दर्ज की गई; इसी संदर्भ में REM sleep यानी तेज़ नेत्र गति वाली नींद के दौरान जननांगों में लयबद्ध रक्त-संचार/उत्तेजना जैसी प्रतिक्रिया की बात भी कही गई है। लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि हर स्लीप ऑर्गैज़्म का कारण एक ही है, या हर मामले में बाहरी स्पर्श—जैसे कपड़ा, बिस्तर या मुद्रा—की भूमिका बिल्कुल नहीं होती।
नहीं, जरूरी नहीं। सेक्स ड्रीम ऑर्गैज़्म या योनि लुब्रिकेशन से जुड़ा हो सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर बार व्यक्ति को कोई स्पष्ट यौन सपना याद ही होगा।
महिलाओं के लिए यह पहचानना भी पुरुषों की तुलना में कठिन हो सकता है कि नींद में सचमुच ऑर्गैज़्म हुआ था या नहीं, क्योंकि महिलाओं के “wet dreams” में पुरुषों के स्खलन जैसा स्पष्ट बाहरी प्रमाण आम तौर पर नहीं होता। इसलिए सपना याद न होना अपने-आप यह साबित नहीं करता कि नींद में यौन उत्तेजना नहीं हुई। उसी तरह, सेक्स ड्रीम याद होना भी अपने-आप यह साबित नहीं करता कि ऑर्गैज़्म हुआ ही था।
सबसे ईमानदार जवाब यही है: हां, कई महिलाओं में यह अनुभव हो सकता है, लेकिन आज की सभी महिलाओं के लिए कोई एक सटीक और भरोसेमंद प्रचलन-दर बताना मुश्किल है।
अक्सर उद्धृत शुरुआती जानकारी में कहा जाता है कि 1953 में अल्फ्रेड किन्से ने पाया था कि करीब 40% साक्षात्कारित महिलाओं ने एक या अधिक बार रात में ऑर्गैज़्म या नॉक्टर्नल एमिशन जैसा अनुभव बताया था। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स ने इसे इस तरह प्रस्तुत किया कि 45 वर्ष की उम्र से पहले लगभग 37% महिलाओं ने नींद में ऑर्गैज़्म अनुभव किया।
ये आंकड़े यह समझाने में मदद करते हैं कि महिलाओं का स्लीप ऑर्गैज़्म कोई अकेली, असंभव या “कल्पना” जैसी बात नहीं है। लेकिन इन्हें आधुनिक समय की सभी महिलाओं के लिए बिल्कुल सटीक प्रतिशत मान लेना ठीक नहीं होगा, क्योंकि डेटा पुराना है, कुछ जानकारी सेकंडरी रिपोर्टिंग से आती है, और महिलाओं में नींद के दौरान ऑर्गैज़्म पर व्यापक शोध अभी भी सीमित है।
अगर यह अनुभव कभी-कभार हो, आपकी नींद बार-बार न तोड़े, और इससे लगातार चिंता, शर्म या जीवन में परेशानी न हो, तो इसे तुरंत बीमारी मानने की जरूरत नहीं है। यौन-स्वास्थ्य से जुड़े स्रोत महिलाओं में wet dreams या स्लीप ऑर्गैज़्म को ऐसा अनुभव बताते हैं जो हो सकता है और कई मामलों में सामान्य दायरे में समझा जा सकता है।
2018 की केस रिपोर्ट में ध्यान देने वाली बात यह नहीं थी कि “नींद में ऑर्गैज़्म होना” अपने-आप असामान्य है, बल्कि यह थी कि उस महिला के लिए स्लीप-रिलेटेड ऑर्गैज़्म परेशान करने वाले हो गए थे और उनके साथ अन्य नींद-संबंधी लक्षण भी थे। इसलिए कभी-कभार होने वाले अनुभव और चिकित्सकीय मूल्यांकन की जरूरत पैदा करने वाली नींद की समस्या—इन दोनों को अलग-अलग समझना चाहिए।
अगर नींद में ऑर्गैज़्म बार-बार होने लगे, नींद की गुणवत्ता को साफ तौर पर खराब करे, या इससे लगातार चिंता, डर, शर्म या परेशानी हो, तो डॉक्टर, स्लीप मेडिसिन विशेषज्ञ या यौन-स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह ली जा सकती है।
अगर इसके साथ नींद में झटके लगना, असामान्य ढंग से चौंककर उठना, या “exploding head syndrome” जैसे अनुभव हों—जैसे नींद में तेज आवाज़ या धमाके जैसा अहसास—तो इसे नींद-संबंधी समस्या के हिस्से के रूप में चर्चा करना और भी जरूरी हो सकता है। NIH/PMC में प्रकाशित केस रिपोर्ट में परेशानी देने वाले स्लीप-रिलेटेड ऑर्गैज़्म इसी तरह के नींद-संबंधी लक्षणों के साथ दर्ज हुए थे।
विशेषज्ञ से मिलने से पहले कुछ बातें नोट करना मददगार हो सकता है: यह कितनी बार हो रहा है, क्या इससे नींद खुलती है, उठने के बाद कैसा महसूस होता है, क्या कोई सपना याद रहता है, क्या साथ में कोई और नींद-संबंधी लक्षण हैं, और क्या हाल में नींद का पैटर्न बदला है। इससे डॉक्टर को समझने में मदद मिलती है कि यह कभी-कभार की नींद में यौन प्रतिक्रिया है या ऐसी नींद-संबंधी परेशानी, जिसकी जांच और प्रबंधन की जरूरत है।
महिलाएं सोते समय भी ऑर्गैज़्म अनुभव कर सकती हैं—इस बात के समर्थन में शोध, यौन-चिकित्सा से जुड़े स्रोत और क्लिनिकल केस रिपोर्ट मौजूद हैं। फिर भी, इस विषय पर उपलब्ध शोध सीमित है, इसलिए 37% या करीब 40% जैसे प्रचलन-आंकड़ों को सावधानी से पढ़ना चाहिए।
ध्यान देने वाली बात यह है कि अनुभव हुआ या नहीं, उससे ज्यादा जरूरी है: क्या यह बार-बार हो रहा है, क्या नींद खराब कर रहा है, क्या चिंता पैदा कर रहा है, या क्या इसके साथ अन्य नींद-संबंधी लक्षण हैं।
Comments
0 comments