गोल्डमैन सैक्स का अनुमान: मेटा, माइक्रोसॉफ्ट, अमेज़न और अल्फाबेट साल 2025 से 2030 के बीच AI और डेटा सेंटरों पर कुल 5.3 ट्रिलियन डॉलर खर्च करेंगी [2][4][6]। गोल्डमैन सैक्स की चेतावनी: इस खर्च का एक बड़ा हिस्सा कर्ज के ज़रिए आएगा, जिससे क्रेडिट मार्केट में संतृप्ति (Saturation) का खतरा पैदा हो गया है [4]। एनवाईयू के प...

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गोल्डमैन सैक्स ने चार हाइपरस्केलर (Meta, Microsoft, Amazon और Alphabet) के AI और डेटा सेंटरों पर होने वाले खर्च का अनुमान बढ़ाते हुए 2025 से 2030 तक की अवधि के लिए इसे 5.3 ट्रिलियन डॉलर (पिछले अनुमान में 4.5 ट्रिलियन डॉलर था) कर दिया है । यह राशि जापान, ब्रिटेन, भारत और फ्रांस जैसे देशों के कुल सकल घरेलू उत्पाद (GDP) से भी अधिक है
। हालांकि, इसी के साथ गोल्डमैन सैक्स ने कई ऐसे जोखिमों को भी रेखांकित किया है जो इस AI विस्तार योजना को प्रभावित कर सकते हैं।
गोल्डमैन सैक्स की मुख्य क्रेडिट रणनीतिकार अमांडा लिनैम ने चेतावनी दी है कि "तरल क्रेडिट बाजारों में संतृप्ति और जारीकर्ताओं की सघनता (Issuer Concentration) की समस्याएं आने वाले वर्षों में और गंभीर हो जाएंगी।" हाइपरस्केलर कंपनियां पहले ही कॉरपोरेट उधारी के एक बड़े हिस्से के लिए जिम्मेदार हैं, लेकिन सार्वजनिक ऋण बाजार में निवेशक अब एक ही कुछ कंपनियों से असीमित मात्रा में कर्ज लेने को तैयार नहीं होंगे। इससे इन कंपनियों की रेटिंग पर दबाव बढ़ेगा और उनकी उधारी की लागत (Pricing) प्रभावित होगी ।
गोल्डमैन सैक्स का कहना है कि इतना बड़ा खर्च सिर्फ अंदरूनी नकदी या बॉन्ड बाजार से पूरा नहीं किया जा सकता। अल्फाबेट द्वारा 85 बिलियन डॉलर का राइट्स इश्यू इस बात का सबूत है कि कंपनियां पारंपरिक साधनों की सीमाओं को छू रही हैं । हाइपरस्केलर को अब "विभिन्न बाजारों, संरचनाओं और मुद्राओं" से फंड जुटाने की आवश्यकता होगी ताकि वे संतृप्ति की समस्या से बच सकें
।
गोल्डमैन सैक्स के विश्लेषक रयान हैमंड ने नवंबर 2025 की एक रिपोर्ट में चेतावनी दी थी: "हालांकि सार्वजनिक कंपनियों पर कर्ज का बोझ अभी छोटा है, लेकिन फंडिंग में लगातार कर्ज की ओर बढ़ता रुझान AI बिल्ड-आउट से जुड़े मैक्रो जोखिमों को बढ़ा देगा।" बड़ी टेक कंपनियों ने चालू वर्ष में पहले ही 121 बिलियन डॉलर का कर्ज ले लिया है, जबकि पिछले पांच वर्षों में यह औसतन 28 बिलियन डॉलर था । हैमंड की टीम के अनुसार, ये कंपनियां सैद्धांतिक रूप से अपने कर्ज में 700 बिलियन डॉलर और बढ़ा सकती हैं
।
गोल्डमैन सैक्स स्पष्ट रूप से कहता है कि निजी बुनियादी ढांचे और रियल एस्टेट पूंजी को इस खर्च में बहुत बड़ी भूमिका निभानी होगी । साल 2025 में प्राइवेट इंफ्रास्ट्रक्चर फंड्स ने रिकॉर्ड 221 बिलियन डॉलर जुटाए, लेकिन रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि AI कैपेक्स अनुमान "डेटा सेंटरों के वास्तविक निर्माण की दर से कहीं आगे निकल रहे हैं।" यह एक ऐसा मीट्रिक है जिस पर लंबी अवधि की फाइनेंसिंग जरूरतों का अनुमान लगाने के लिए कड़ी निगरानी रखी जानी चाहिए
। एक डेटा सेंटर में ज़मीन, बिजली, नेटवर्क, भवन, कूलिंग और सर्वर सभी शामिल होते हैं, जिससे फंडिंग विभिन्न एसेट क्लासेज में फैल जाती है और इसमें अड़चनें आ सकती हैं
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गोल्डमैन सैक्स मानता है कि "पूंजीगत व्यय में अप्रत्याशित वृद्धि पर शेयर की कीमतों में नकारात्मक प्रतिक्रिया कंपनियों के प्रबंधन को भविष्य में खर्च की गति पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर सकती है" । रिपोर्ट में उद्धृत बाहरी विश्लेषकों के अनुसार, हाइपरस्केलर के भारी बॉन्ड जारी करने के कारण इन्वेस्टमेंट-ग्रेड बॉन्ड पर प्रसार (Spread) पहले ही लगभग 70 से बढ़कर 85 आधार अंक (Basis Points) हो गया है, और यह 95 आधार अंक तक पहुंच सकता है
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गोल्डमैन सैक्स स्वयं अपनी रिपोर्ट में ऐतिहासिक समानताएं नहीं निकालता, लेकिन NYU के प्रसिद्ध प्रोफेसर अश्वथ दामोदरन ने गोल्डमैन के इसी डेटा पर टिप्पणी करते हुए डॉट-कॉम बबल और वर्तमान AI बूम के बीच एक बड़ा अंतर बताया है। डॉट-कॉम का उछाल पूरी तरह इक्विटी (शेयरों) से फंडेड था, इसलिए उसके फटने का असर सिर्फ शेयरधारकों तक सीमित रहा। इसके विपरीत, AI कैपेक्स बूम "बहुत बड़ा है और इसका एक बड़ा हिस्सा कर्ज से फंड किया जा रहा है।" दामोदरन चेतावनी देते हैं कि अगर सुधार हुआ, तो "यह समस्या संकट और डिफॉल्ट के रूप में सामने आएगी, और यह सिर्फ एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगी। यह पूरे समाज में फैल जाएगी," जो 2008 के वित्तीय संकट की याद दिलाता है ।
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गोल्डमैन सैक्स का अनुमान: मेटा, माइक्रोसॉफ्ट, अमेज़न और अल्फाबेट साल 2025 से 2030 के बीच AI और डेटा सेंटरों पर कुल 5.3 ट्रिलियन डॉलर खर्च करेंगी [2][4][6]।
गोल्डमैन सैक्स का अनुमान: मेटा, माइक्रोसॉफ्ट, अमेज़न और अल्फाबेट साल 2025 से 2030 के बीच AI और डेटा सेंटरों पर कुल 5.3 ट्रिलियन डॉलर खर्च करेंगी [2][4][6]। गोल्डमैन सैक्स की चेतावनी: इस खर्च का एक बड़ा हिस्सा कर्ज के ज़रिए आएगा, जिससे क्रेडिट मार्केट में संतृप्ति (Saturation) का खतरा पैदा हो गया है [4]।
एनवाईयू के प्रोफेसर अश्वथ दामोदरन ने 2008 के वित्तीय संकट जैसी स्थिति की आशंका जताई है, क्योंकि इस बार डॉट कॉम बबल के विपरीत अधिकांश खर्च कर्ज से हो रहा है [5]।
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