3 अगस्त 2026 से Google, EEA, UK और स्विट्ज़रलैंड के यूज़र्स के IP एड्रेस का इस्तेमाल सिर्फ़ रूटिंग के लिए नहीं, बल्कि विज्ञापन मापन और पर्सनलाइज़ेशन के लिए भी करेगा। IP एड्रेस को GDPR के तहत व्यक्तिगत डेटा माना जाता है। इस नए उपयोग के लिए यूज़र्स की स्पष्ट सहमति लेना अनिवार्य होगा। एडवरटाइज़र को Google की EU यूज़र क...
शोध उत्तर

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3 अगस्त 2026 से, Google EEA (यूरोपीय आर्थिक क्षेत्र), UK और स्विट्ज़रलैंड के यूज़र्स के IP एड्रेस का इस्तेमाल विज्ञापन मापन और पर्सनलाइज़ेशन के लिए शुरू कर देगा । यह बदलाव IP एड्रेस के उद्देश्य में बदलाव है: पहले यह सिर्फ़ नेटवर्क रूटिंग और विज्ञापन डिलीवरी के काम आता था, अब इसका इस्तेमाल डिवाइस की पहचान करने और विज्ञापनों को पर्सनलाइज़ करने के लिए होगा
। चूँकि GDPR के तहत IP एड्रेस को व्यक्तिगत डेटा माना जाता है, इसलिए इस नए उद्देश्य के लिए यूज़र्स की स्पष्ट सहमति (affirmative consent) लेना अनिवार्य होगा
।
यह आर्टिकल बताता है कि क्या बदल रहा है, यह अनुपालन के लिए क्यों मायने रखता है, और एडवरटाइज़र को अभी से क्या कदम उठाने चाहिए।
Google पहले से ही अपने विज्ञापन इंफ्रास्ट्रक्चर (जैसे कस्टमर टैग्स, SDKs, HTTP कॉल्स) के ज़रिए IP एड्रेस प्राप्त करता है। बदलाव उद्देश्य में है: 3 अगस्त 2026 से, ये वही IP एड्रेस विज्ञापन मापन और पर्सनलाइज़ेशन के लिए डिवाइस की पहचान करने में इस्तेमाल होंगे । यह बदलाव EEA, UK और स्विट्ज़रलैंड के यूज़र्स पर लागू होगा
। Google ने एडवरटाइज़र को इस बदलाव के बारे में सूचित कर दिया है और इसके लिए IAB Europe Transparency and Consent Framework (TCF) के फ़ीचर 3 "Identify devices based on information transmitted automatically" के तहत रजिस्टर करेगा
।
IP एड्रेस GDPR के तहत व्यक्तिगत डेटा हैं । जब Google इसका उद्देश्य तकनीकी डिलीवरी से बदलकर विज्ञापन मापन और पर्सनलाइज़ेशन कर रहा है, तो इस उपयोग के लिए प्रभावित क्षेत्रों में यूज़र की स्पष्ट सहमति ज़रूरी हो जाती है
। एडवरटाइज़र को Google की EU यूज़र कंसेंट पॉलिसी (EU UCP) का पालन सुनिश्चित करना होगा
। अगर कोई यूज़र सहमति नहीं देता, तो Google उसके IP एड्रेस का इस्तेमाल विज्ञापन उद्देश्यों के लिए नहीं कर सकेगा।
पब्लिशर्स और एडवरटाइज़र को अपने कंसेंट फ्लो और डिस्क्लोज़र को अपडेट करना होगा ताकि वे स्पष्ट कर सकें कि IP एड्रेस का इस्तेमाल विज्ञापन मापन और पर्सनलाइज़ेशन के लिए हो सकता है । मुख्य अनुपालन आवश्यकताएँ इस प्रकार हैं:
ad_storage को आपकी साइट से जुड़े Google Ads अकाउंट्स के लिए विज्ञापन डेटा संग्रह पर एकमात्र अधिकार बना देगा उपलब्ध स्रोत इस बदलाव के लिए Google द्वारा उद्धृत विशिष्ट PETs (जैसे डिफरेंशियल प्राइवेसी, k-अनामिकता, या ऑन-डिवाइस प्रोसेसिंग) के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान नहीं करते हैं। दस्तावेज़ों में कंसेंट-संचालित नियंत्रणों की भूमिका का उल्लेख है, लेकिन इस विशिष्ट घोषणा के लिए PETs का कोई नाम स्पष्ट नहीं है ।
Google का IP एड्रेस रीपर्पज़िंग नियामक तनावों के बीच आ रहा है।
Google का फ़िंगरप्रिंटिंग रिवर्सल: दिसंबर 2024 में, Google ने अपने विज्ञापन नियमों में बदलाव कर फ़िंगरप्रिंटिंग की अनुमति दे दी, एक ऐसी तकनीक जो एडवरटाइज़र को IP एड्रेस और डिवाइस-विशिष्ट जानकारी सहित यूज़र्स का व्यापक डेटा इकट्ठा करने देती है । प्राइवेसी एडवोकेट्स ने इस कदम को यूज़र प्राइवेसी की अनदेखी बताया
।
ICO की आलोचना: UK के सूचना आयुक्त कार्यालय (ICO) ने Google की फ़िंगरप्रिंटिंग नीति को "गैर-जिम्मेदाराना" बताया और कहा कि यह यूज़र नियंत्रण और पारदर्शिता को कमज़ोर कर सकती है ।
ICO की मई 2026 की सलाह: 18 मई 2026 को, ICO ने UK सरकार को PECR के तहत स्टोरेज-एंड-एक्सेस तकनीकों की सहमति आवश्यकताओं में संभावित संशोधनों पर सलाह प्रकाशित की । ICO ने एक जोखिम-आधारित ढाँचा सुझाया जिसमें कुछ कम जोखिम वाली ऑनलाइन विज्ञापन गतिविधियाँ यूज़र सहमति के बिना चलाई जा सकती हैं, जबकि उच्च जोखिम वाली ट्रैकिंग के लिए अलग नियम होंगे
। हालाँकि, ICO ने स्पष्ट किया कि अभी कानूनी रूप से कुछ भी नहीं बदला है और मौजूदा सहमति नियम यथावत हैं
।
तनाव: एक तरफ Google IP एड्रेस-आधारित विज्ञापनों के साथ आगे बढ़ रहा है, वहीं ICO ने सुझाव दिया है कि भविष्य में कुछ कम जोखिम वाली गतिविधियों के लिए सहमति की ज़रूरत नहीं होगी, लेकिन मौजूदा नियम अभी नहीं बदले हैं ।
अनुपालन का तत्काल बोझ एडवरटाइज़र पर है क्योंकि Google ने उन्हें सूचित कर दिया है और इस उपयोग के लिए सहमति ज़रूरी है । इसका मतलब है:
मुख्य निष्कर्ष: Google EU, UK और स्विट्ज़रलैंड में IP एड्रेस के उद्देश्य को तकनीकी विज्ञापन डिलीवरी से बदलकर विज्ञापन मापन और पर्सनलाइज़ेशन की ओर ले जा रहा है, और स्रोतों के अनुसार इसके लिए प्रभावित क्षेत्रों में यूज़र की स्पष्ट सहमति ज़रूरी है । जब तक Google-नियंत्रित चॉइस मैकेनिज्म तैनात नहीं हो जाता, अनुपालन की ज़िम्मेदारी एडवरटाइज़र और पब्लिशर्स पर ही है
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3 अगस्त 2026 से Google, EEA, UK और स्विट्ज़रलैंड के यूज़र्स के IP एड्रेस का इस्तेमाल सिर्फ़ रूटिंग के लिए नहीं, बल्कि विज्ञापन मापन और पर्सनलाइज़ेशन के लिए भी करेगा।
3 अगस्त 2026 से Google, EEA, UK और स्विट्ज़रलैंड के यूज़र्स के IP एड्रेस का इस्तेमाल सिर्फ़ रूटिंग के लिए नहीं, बल्कि विज्ञापन मापन और पर्सनलाइज़ेशन के लिए भी करेगा। IP एड्रेस को GDPR के तहत व्यक्तिगत डेटा माना जाता है। इस नए उपयोग के लिए यूज़र्स की स्पष्ट सहमति लेना अनिवार्य होगा।
एडवरटाइज़र को Google की EU यूज़र कंसेंट पॉलिसी (EU UCP) का पालन करना होगा और IP एड्रेस आधारित पर्सनलाइज़ेशन के लिए सहमति संकेत (consent signals) पास करने होंगे।