पहला चीन जापान युद्ध (1894–95) कोरिया पर प्रभाव की प्रतिस्पर्धा के बीच हुआ। चीन की हार के बाद शिमोनोसेकी संधि के तहत उसने कोरिया की स्वतंत्रता स्वीकार की और ताइवान तथा पेस्काडोर्स द्वीप जापान को सौंपे। [9][10] दूसरा चीन जापान युद्ध 1937 में पूर्ण पैमाने पर शुरू हुआ, विश्व युद्ध का हिस्सा बना और 1945 में जापान के आत्...
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Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: Search & fact-check with cited sources for What happened during the Sino-Japanese Wars?. Article summary: The “Sino-Japanese Wars” usually means two conflicts between China and Japan: Japan defeated Qing China in 1894–95, while the much longer war of 1937–45 ended with Japan’s surrender in World War II. [2][1]. Topic tags: general, general web. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, charts with fake numbers, clickbait thumbnails, icons, and tiny thumbnail layouts. Make it useful
“चीन-जापान के युद्ध” कहने पर आम तौर पर दो बड़े संघर्षों का ज़िक्र होता है। पहला युद्ध 1894–95 में हुआ और मुख्य रूप से कोरिया पर प्रभाव को लेकर था। दूसरा 1937 में पूर्ण पैमाने पर शुरू हुआ, विश्व युद्ध का हिस्सा बना और 1945 में जापान के आत्मसमर्पण के साथ समाप्त हुआ। 9
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किंग चीन और जापान, दोनों कोरिया में अपना प्रभाव बढ़ाना चाहते थे। कोरिया में विद्रोह के बाद दोनों देशों की दखलअंदाज़ी से तनाव बढ़ा और युद्ध छिड़ गया। 9
जापानी सेना ने ज़मीन और समुद्र—दोनों मोर्चों पर बड़ी जीत हासिल की। अप्रैल 1895 में हुई शिमोनोसेकी संधि के साथ युद्ध समाप्त हुआ। चीन ने कोरिया की स्वतंत्रता स्वीकार की—जो पहले पारंपरिक रूप से चीनी अधिराज्य के अधीन था—और ताइवान तथा पेस्काडोर्स द्वीपसमूह जापान को सौंप दिए। 9
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इस युद्ध से पहले भी चीन में जापान का विस्तार जारी था। 1931 में जापान ने मंचूरिया पर कब्ज़ा किया, लेकिन उस घटना को आम तौर पर 1937 में शुरू हुए पूर्ण पैमाने के युद्ध से अलग माना जाता है। जुलाई 1937 में बीजिंग के बाहर मार्को पोलो ब्रिज के पास चीनी और जापानी सैनिकों के बीच झड़प हुई। यह लड़ाई जल्द ही दोनों देशों के बीच व्यापक युद्ध में बदल गई। 1
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युद्ध के शुरुआती दौर में जापान ने तेज़ी से बढ़त बनाई। ब्रिटैनिका के अनुसार, 1938 के अंत तक जापान की प्रगति तेज़ रही; इसके बाद लंबे समय तक लगभग गतिरोध बना रहा और फिर संघर्ष अपने अंतिम चरण में पहुँचा। 4
यह युद्ध द्वितीय विश्व युद्ध का हिस्सा बना और 1945 में जापान के आत्मसमर्पण के साथ समाप्त हुआ। 1
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दोनों तारीखें अलग घटनाओं को दर्शाती हैं। 1931 जापान के मंचूरिया पर कब्ज़े का साल है, जबकि 1937 मार्को पोलो ब्रिज की घटना के बाद पूर्ण पैमाने पर युद्ध शुरू होने का पारंपरिक साल माना जाता है। इस फर्क को समझने से यह स्पष्ट होता है कि कुछ इतिहास-विवरण संघर्ष की लंबी पृष्ठभूमि पर ज़ोर देते हैं, जबकि दूसरे दूसरे चीन-जापान युद्ध की शुरुआत 1937 से गिनते हैं। 1
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पहला चीन जापान युद्ध (1894–95) कोरिया पर प्रभाव की प्रतिस्पर्धा के बीच हुआ। चीन की हार के बाद शिमोनोसेकी संधि के तहत उसने कोरिया की स्वतंत्रता स्वीकार की और ताइवान तथा पेस्काडोर्स द्वीप जापान को सौंपे। [9][10]
पहला चीन जापान युद्ध (1894–95) कोरिया पर प्रभाव की प्रतिस्पर्धा के बीच हुआ। चीन की हार के बाद शिमोनोसेकी संधि के तहत उसने कोरिया की स्वतंत्रता स्वीकार की और ताइवान तथा पेस्काडोर्स द्वीप जापान को सौंपे। [9][10] दूसरा चीन जापान युद्ध 1937 में पूर्ण पैमाने पर शुरू हुआ, विश्व युद्ध का हिस्सा बना और 1945 में जापान के आत्मसमर्पण के साथ समाप्त हुआ। [1][4]
1931 में जापान ने मंचूरिया पर कब्ज़ा किया था; जुलाई 1937 में मार्को पोलो ब्रिज के पास हुई झड़प को आम तौर पर पूर्ण युद्ध की शुरुआत माना जाता है। [1][8]