ट्रंप के बयान के कुछ ही घंटों बाद, इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने CNN को दिए एक इंटरव्यू में इस सौदे का विरोध किया। उन्होंने चेतावनी दी कि यह सौदा "मध्य पूर्व में शक्ति संतुलन को नष्ट कर देगा" और कहा, "मुझे नहीं लगता कि उन्हें F-35 या इंजन मिलने चाहिए" । इज़राइल, जो इस क्षेत्र का एकमात्र देश है जिसके पास F-35 हैं, इस स्टील्थ जेट को अपनी सैन्य श्रेष्ठता का मुख्य आधार मानता है।
नेतन्याहू की आलोचना पर ट्रंप ने तीखी प्रतिक्रिया दी। Axios की एक रिपोर्ट के अनुसार, व्हाइट हाउस के दो अधिकारियों के हवाले से कहा गया कि ट्रंप "बहुत नाराज" थे और उनका मानना था कि नेतन्याहू को इस सौदे पर टिप्पणी करने का "कोई अधिकार नहीं" है । 27 जुलाई को, ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, "कोई मुझे नहीं बता सकता कि हमें क्या बेचना चाहिए," सीधे तौर पर नेतन्याहू की आपत्तियों को खारिज करते हुए
। यह विवाद तब और बढ़ गया जब रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने F-35 मामले पर चर्चा के लिए नेतन्याहू के साथ निर्धारित एक बैठक रद्द कर दी
।
F-35 विवाद ईरान नीति और अन्य रणनीतिक मतभेदों के कारण ट्रंप और नेतन्याहू के बीच चल रहे तनाव का हिस्सा है। इज़राइली मीडिया ने दोनों नेताओं के बीच F-35 के सवाल से परे घर्षण की सूचना दी, हालांकि ईरान पर असहमति के विशिष्ट विवरण स्रोत रिपोर्टों में कम विस्तृत थे।
ट्रंप के राजनीतिक समर्थन के बावजूद, एक बड़ी कानूनी बाधा बनी हुई है। अमेरिकी कानून - विशेष रूप से CAATSA क़ानून और सीनेटर जेम्स लैंकफोर्ड द्वारा लिखित NDAA प्रावधान - F-35 के हस्तांतरण पर तब तक प्रतिबंध लगाता है जब तक तुर्की अपने S-400 सिस्टम और संबंधित उपकरणों को नहीं हटा देता और भविष्य में इसी तरह के रूसी सिस्टम नहीं खरीदने की प्रतिबद्धता नहीं जताता । मध्य-2026 तक, तुर्की के पास अभी भी S-400 मौजूद है, हालांकि वॉल स्ट्रीट जर्नल ने बताया कि अंकारा F-35 के लिए रास्ता साफ करने हेतु सिस्टम को बेचने के विकल्प तलाश रहा है
।
22 जुलाई, 2026 को, स्टेट डिपार्टमेंट के ब्यूरो ऑफ लेजिस्लेटिव अफेयर्स ने प्रतिनिधि वेस्ले बेल (डी-एमओ) को एक पत्र भेजा जिसमें कहा गया कि तुर्की ने "अभी तक शर्तें पूरी नहीं की हैं" जो कानून के अनुसार F-35 कार्यक्रम में फिर से शामिल होने के लिए आवश्यक हैं । पत्र में स्पष्ट रूप से दोहराया गया कि वैधानिक आवश्यकताएं - जिनमें S-400 को हटाना और CAATSA का पूर्ण अनुपालन शामिल है - अपरिवर्तित हैं
। इस औपचारिक निर्धारण का मतलब है कि यदि राष्ट्रपति तुरंत आगे बढ़ना भी चाहें, तो भी कार्यपालिका शाखा ने स्वीकार किया है कि तुर्की वर्तमान में बिक्री के लिए कानूनी पूर्वापेक्षाएँ पूरी नहीं करता है।
| तत्व | स्थिति |
|---|---|
| ट्रंप का राजनीतिक रुख | सार्वजनिक रूप से तुर्की पर प्रतिबंध हटाने और F-35 बेचने का समर्थन करते हैं |
| CAATSA प्रतिबंध | ट्रंप ने घोषणा की कि उन्हें हटा दिया जाएगा (7 जुलाई, 2026) |
| तुर्की के कब्जे में S-400 | अभी भी मौजूद; जुलाई 2026 के अंत तक हटाने की कोई पुष्टि नहीं |
| F-35 हस्तांतरण पर वैधानिक प्रतिबंध | अभी भी लागू; FY20 NDAA में संहिताबद्ध |
| स्टेट डिप्ट. का आकलन (22 जुलाई) | तुर्की ने "अभी तक" पुन: प्रवेश के लिए कानूनी आवश्यकताएं पूरी नहीं की हैं |
| नेतन्याहू का विरोध | सार्वजनिक रूप से कहा; सौदा "शक्ति संतुलन नष्ट करेगा" |
| ट्रंप-नेतन्याहू में तनाव | पुष्टि; नेतन्याहू की सार्वजनिक आलोचना से ट्रंप नाराज़ |
सबसे अहम बात यह है कि ट्रंप ने तुर्की की F-35 तक पहुंच बहाल करने की प्रबल राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाई है और CAATSA प्रतिबंध हटाने की दिशा में कदम बढ़ाया है, लेकिन तुर्की के पास S-400 सिस्टम का बने रहना निर्णायक कानूनी बाधा है। स्टेट डिपार्टमेंट के 22 जुलाई के पत्र ने औपचारिक रूप से पुष्टि की है कि अंकारा वर्तमान में कार्यक्रम में फिर से शामिल होने के लिए वैधानिक शर्तों को पूरा नहीं करता है, और कांग्रेस ने इन आवश्यकताओं को माफ करने के लिए द्विदलीय प्रतिरोध दिखाया है । जब तक तुर्की S-400 को नहीं हटाता या कांग्रेस कानून में संशोधन नहीं करती, तब तक कोई F-35 हस्तांतरण नहीं हो सकता।