ईसीबी की सितंबर में ब्याज दर बढ़ाने की तैयारी क्यों दिख रही है? काज़िमिर का महंगाई पर सख्त रुख
ईसीबी गवर्निंग काउंसिल के सदस्य पीटर काज़िमिर ने 27 जुलाई को कहा कि आर्थिक परिदृश्य सुधरने पर भी सितंबर में ब्याज दर बढ़ाना जरूरी हो सकता है, क्योंकि महंगाई को नियंत्रित करने के लिए कम से कम एक और बढ़ोतरी चाहिए [37]. ईसीबी ने जुलाई में जमा दर 2.25% पर स्थिर रखी, लेकिन आगे सख्ती की गुंजाइश छोड़ी। बाजार वर्ष के अंत तक...
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ईसीबी गवर्निंग काउंसिल के सदस्य पीटर काज़िमिर ने 27 जुलाई को कहा कि आर्थिक परिदृश्य सुधरने पर भी सितंबर में ब्याज दर बढ़ाना जरूरी हो सकता है, क्योंकि महंगाई को नियंत्रित करने के लिए कम से कम एक और बढ़ोतरी चाहिए [37].
ईसीबी ने जुलाई में जमा दर 2.25% पर स्थिर रखी, लेकिन आगे सख्ती की गुंजाइश छोड़ी। बाजार वर्ष के अंत तक लगभग दो और दर बढ़ोतरी का अनुमान लगा रहा है [20].
काज़िमिर का रुख सहयोगी कोचर से अधिक सख्त है। कोचर ने कहा कि उन्हें अभी महंगाई के दूसरे दौर के प्रभावों के ठोस प्रमाण नहीं दिख रहे, जिससे सितंबर की बैठक से पहले गवर्निंग काउंसिल में मतभेद उभरते दिख रहे हैं [9].
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यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ईसीबी) ने जुलाई 2026 में अपनी सख्ती की प्रक्रिया पर विराम लगाते हुए जमा सुविधा दर को 2.25% पर बनाए रखा। यह जून में हुई दर वृद्धि के बाद लिया गया फैसला था। हालांकि, सितंबर की अगली बैठक से पहले ही केंद्रीय बैंक के भीतर बहस तेज हो गई है।
स्लोवाकिया के केंद्रीय बैंक के प्रमुख और ईसीबी गवर्निंग काउंसिल के सदस्य पीटर काज़िमिर ने साफ संकेत दिया है कि सितंबर में एक और दर वृद्धि जरूरी हो सकती है। उनका तर्क है कि ऊर्जा कीमतों से पैदा हो रहा दबाव वेतन और दूसरी वस्तुओं की कीमतों में फैलने से पहले मौद्रिक नीति को और सख्त किया जाना चाहिए।
27 जुलाई को काज़िमिर ने क्या कहा?
सोमवार, 27 जुलाई 2026 को काज़िमिर ने कहा कि आर्थिक परिदृश्य बेहतर होने पर भी सितंबर में ब्याज दर बढ़ाना संभवतः जरूरी होगा. उनके अनुसार, महंगाई पर काबू पाने के लिए ईसीबी को कम-से-कम एक बार और दरें बढ़ानी होंगी। अगर आर्थिक और महंगाई का परिदृश्य बिगड़ता है, तो अपेक्षा से अधिक सख्ती की जरूरत पड़ सकती है .
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"ईसीबी की सितंबर में ब्याज दर बढ़ाने की तैयारी क्यों दिख रही है? काज़िमिर का महंगाई पर सख्त रुख" का संक्षिप्त उत्तर क्या है?
ईसीबी गवर्निंग काउंसिल के सदस्य पीटर काज़िमिर ने 27 जुलाई को कहा कि आर्थिक परिदृश्य सुधरने पर भी सितंबर में ब्याज दर बढ़ाना जरूरी हो सकता है, क्योंकि महंगाई को नियंत्रित करने के लिए कम से कम एक और बढ़ोतरी चाहिए [37].
सबसे पहले सत्यापित करने योग्य मुख्य बिंदु क्या हैं?
ईसीबी गवर्निंग काउंसिल के सदस्य पीटर काज़िमिर ने 27 जुलाई को कहा कि आर्थिक परिदृश्य सुधरने पर भी सितंबर में ब्याज दर बढ़ाना जरूरी हो सकता है, क्योंकि महंगाई को नियंत्रित करने के लिए कम से कम एक और बढ़ोतरी चाहिए [37]. ईसीबी ने जुलाई में जमा दर 2.25% पर स्थिर रखी, लेकिन आगे सख्ती की गुंजाइश छोड़ी। बाजार वर्ष के अंत तक लगभग दो और दर बढ़ोतरी का अनुमान लगा रहा है [20].
मुझे अभ्यास में आगे क्या करना चाहिए?
काज़िमिर का रुख सहयोगी कोचर से अधिक सख्त है। कोचर ने कहा कि उन्हें अभी महंगाई के दूसरे दौर के प्रभावों के ठोस प्रमाण नहीं दिख रहे, जिससे सितंबर की बैठक से पहले गवर्निंग काउंसिल में मतभेद उभरते दिख रहे हैं [9].
यह रुख जून में दिए गए उनके बयान से मेल खाता है। तब उन्होंने चेतावनी दी थी कि अर्थव्यवस्था में फैल रही महंगाई ईसीबी को ब्याज दरें और बढ़ाने के लिए मजबूर कर सकती है और बिना हस्तक्षेप के कीमतों का दबाव कम होता उन्हें नहीं दिख रहा .
‘दूसरे दौर’ की महंगाई से क्यों चिंतित हैं?
काज़िमिर की दलील का केंद्र ऊर्जा कीमतों के बढ़ने से पैदा होने वाले दूसरे दौर के प्रभाव हैं। इसका मतलब है कि तेल और गैस महंगे होने का शुरुआती असर आगे चलकर वेतन, सेवाओं और अन्य वस्तुओं की कीमतों में भी दिखाई देने लगे। काज़िमिर के मुताबिक, ऐसे प्रभाव पहले से उभर रहे हैं और ईसीबी की कार्रवाई के बिना लंबे समय तक बने रह सकते हैं .
उनका कहना है कि ऊर्जा लागत बढ़ने से वेतन पर दबाव बढ़ सकता है और कंपनियां अपनी लागत ग्राहकों पर डाल सकती हैं। उनके अनुसार, अमेरिका-ईरान के बीच संभावित शांति समझौता भी महंगाई को तुरंत 2% के लक्ष्य पर वापस नहीं लाएगा; इसके लिए अतिरिक्त दर वृद्धि की जरूरत हो सकती है .
काज़िमिर ने पहले यह भी कहा था कि अगर महंगाई लंबे समय तक लक्ष्य से ऊपर रहने का जोखिम बढ़ता है, तो ईसीबी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा .
कोचर और काज़िमिर के रुख में अंतर
गवर्निंग काउंसिल के सदस्य कोचर का आकलन फिलहाल कुछ नरम है। 24 जुलाई को उन्होंने कहा कि उन्हें अभी दूसरे दौर के प्रभावों के कोई ठोस प्रमाण नहीं दिख रहे हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर महंगाई का परिदृश्य बिगड़ता है, तो ईसीबी कार्रवाई करेगा .
यह अंतर महत्वपूर्ण है। काज़िमिर जहां पहले से दर वृद्धि के पक्ष में दबाव बना रहे हैं, वहीं कोचर वास्तविक आंकड़ों के आधार पर आगे फैसला लेने की बात कर रहे हैं। इससे 9-10 सितंबर की बैठक से पहले गवर्निंग काउंसिल में मतभेद अधिक स्पष्ट हो गए हैं।
जुलाई में 2.25% पर दर रोकने का क्या मतलब है?
ईसीबी ने 22-23 जुलाई की बैठक के बाद जमा सुविधा दर 2.25% पर बरकरार रखी। फैसला सर्वसम्मत था, लेकिन चर्चा के दौरान कुछ गवर्नरों ने आगे दर बढ़ाने के विकल्प पर विचार किया था .
ईसीबी अध्यक्ष क्रिस्टीन लगार्ड ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि कुछ सदस्यों ने खुद से यह सवाल किया कि क्या एक और दर वृद्धि उचित होगी। बैंक के आधिकारिक बयान में यह भी कहा गया कि वह बढ़ती ऊर्जा कीमतों के असर पर करीबी नजर रख रहा है और उनके प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष तथा दूसरे दौर के प्रभावों का आकलन कर रहा है .
इसलिए बाजार ने जुलाई के फैसले को दर वृद्धि चक्र के अंत के रूप में नहीं, बल्कि एक अस्थायी विराम के तौर पर देखा। काज़िमिर का 27 जुलाई का बयान इसी खुले विकल्प को सार्वजनिक समर्थन देता है।
2026 में ईसीबी का रुख कैसे बदला?
2026 की दर दिशा 2025 के आसान मौद्रिक नीति चक्र से बिल्कुल अलग है। ईसीबी ने 2025 में कई बार दरें घटाईं, जून 2026 में फिर दर बढ़ाई और जुलाई में उसे स्थिर रखा। जुलाई के फैसले के बाद वित्तीय बाजार वर्ष के अंत तक लगभग दो और दर वृद्धि की संभावना को कीमतों में शामिल कर रहे थे, जिसकी शुरुआत सितंबर की बैठक से मानी जा रही थी .
हालांकि, यह बाजार का अनुमान है, ईसीबी की पूर्व-घोषित प्रतिबद्धता नहीं। बैंक लगातार कहता रहा है कि उसकी नीति आने वाले आर्थिक और महंगाई आंकड़ों पर निर्भर करेगी।
ईसीबी के आंकड़े काज़िमिर के पक्ष में क्या कहते हैं?
जून 2026 के यूरोसिस्टम स्टाफ के आधिकारिक अनुमानों में महंगाई और वृद्धि का मिला-जुला, लेकिन चुनौतीपूर्ण परिदृश्य सामने आया है :
व्यापक एचआईसीपी महंगाई—यानी यूरो क्षेत्र में उपभोक्ता कीमतों का सामंजस्यपूर्ण सूचकांक—2026 की तीसरी और चौथी तिमाही में 3.4% पर पहुंचने का अनुमान है .
महंगाई 2027 की शुरुआत तक 3% से ऊपर रहने की संभावना है .
वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि 2026 में केवल 0.8% रहने का अनुमान है। इसके बाद 2027 में 1.2% और 2028 में 1.5% वृद्धि का अनुमान है .
ईसीबी के अनुसार, यदि तेल की कीमतें वायदा बाजार के मौजूदा संकेतों के अनुरूप घटती हैं, तो महंगाई 2028 में 2% के लक्ष्य पर लौट सकती है। लेकिन मध्य पूर्व के युद्ध के कारण यह अनुमान काफी अनिश्चित है .
ईसीबी के प्रोफेशनल फोरकास्टर्स सर्वे के दूसरे तिमाही के नतीजों में भी 2026 की महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 2.7% कर दिया गया। लंबी अवधि की महंगाई का अनुमान 2% पर अपरिवर्तित रहा .
यह बदलाव इसलिए बड़ा है क्योंकि दिसंबर 2025 के यूरोसिस्टम अनुमानों में 2026 और 2027, दोनों के लिए व्यापक महंगाई औसतन केवल 1.9% रहने की उम्मीद थी . मध्य पूर्व के संघर्ष से ऊर्जा कीमतों को लगे झटके ने इस अनुमान को पूरी तरह बदल दिया।
सितंबर की बैठक में किन संकेतों पर नजर रहेगी?
सितंबर का फैसला केवल काज़िमिर के बयान पर निर्भर नहीं करेगा। गवर्निंग काउंसिल के भीतर अलग-अलग संकेत मिल रहे हैं:
क्रिस्टीन लगार्ड, 23 जुलाई: उन्होंने सर्वसम्मत दर-स्थिरता के फैसले की पुष्टि की, लेकिन बताया कि कुछ सदस्यों ने आगे दर वृद्धि पर विचार किया। उन्होंने आंकड़ों पर निर्भर रहने और किसी निश्चित दर-पथ का वादा न करने पर जोर दिया .
कोचर, 24 जुलाई: उन्हें अभी दूसरे दौर के प्रभावों के ठोस प्रमाण नहीं दिख रहे, लेकिन महंगाई का परिदृश्य बिगड़ने पर कार्रवाई के लिए तैयार हैं .
सितंबर 2025 का पुराना आम-सहमति वाला रुख: उस समय ईसीबी की बैठक के आधिकारिक विवरण में कहा गया था कि ब्याज दरें सही स्तर पर हैं और मौद्रिक नीति चक्र अपने अंत के करीब है . मध्य पूर्व के संघर्ष और ऊर्जा कीमतों के झटके ने उस सहमति को कमजोर कर दिया है।
बाजारों के लिए इसका क्या अर्थ है?
जुलाई की बैठक के बाद बाजार पहले ही आगे की सख्ती का अनुमान लगा रहे थे। रॉयटर्स के अनुसार, ईसीबी ने आने वाले महीनों में और दर वृद्धि की गुंजाइश छोड़ी, क्योंकि मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष से ऊर्जा कीमतें फिर ऊपर गईं . बाजार वर्ष के अंत तक लगभग दो और बढ़ोतरी की संभावना देख रहे थे, जिसकी शुरुआत 9-10 सितंबर की बैठक से हो सकती है .
दर वृद्धि से यूरो क्षेत्र में कर्ज लेना महंगा हो सकता है। इससे महंगाई पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती है, लेकिन कमजोर आर्थिक वृद्धि के दौर में मांग और निवेश पर अतिरिक्त दबाव भी पड़ सकता है। ईसीबी के सामने यही मुख्य संतुलन है: कीमतों को नियंत्रित करना, बिना आर्थिक सुस्ती को और गहरा किए।
निष्कर्ष
पीटर काज़िमिर ईसीबी के सख्त रुख वाले गुट की सबसे स्पष्ट आवाज बनकर उभरे हैं। उनका मानना है कि ऊर्जा कीमतों से महंगाई के दूसरे दौर के प्रभावों को जड़ पकड़ने से रोकने के लिए सितंबर में कम-से-कम एक और दर वृद्धि होनी चाहिए।
जुलाई में 2.25% पर दर रोकने का फैसला दर वृद्धि चक्र के अंत से अधिक एक विराम जैसा दिखा। जून 2026 के अनुमानों में महंगाई के 2026 की दूसरी छमाही में 3.4% तक पहुंचने और 2027 की शुरुआत तक 3% से ऊपर रहने का अनुमान भी आगे की सख्ती का आधार देता है .
फिर भी, सितंबर का निर्णय पहले से तय नहीं है। अगले छह हफ्तों में आने वाले आंकड़े—विशेष रूप से अगस्त की महंगाई रिपोर्ट और सितंबर में जारी होने वाले नए यूरोसिस्टम स्टाफ अनुमान—यह तय करने में अहम होंगे कि ईसीबी के भीतर काज़िमिर के सख्त रुख को बहुमत मिलता है या नहीं।