26 27 जुलाई 2026 को ईरान के सर्वोच्च नेता मोज्तबा खामेनेई ने हिजबुल्लाह को लिखित पत्र भेजकर समर्थन को 'रणनीतिक नीति' घोषित किया और कहा कि अमेरिका इजरायल के खिलाफ 'जिहाद और प्रतिरोध' के अलावा कोई रास्ता नहीं है। [1][3]... उन्होंने जून 2026 में पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में हुए 14 सूत्रीय इस्लामाबाद ज्ञापन (Islama...
26-27 जुलाई 2026 को ईरान के सर्वोच्च नेता (Supreme Leader) आयतुल्लाह मोज्तबा खामेनेई ने हिजबुल्लाह के नए महासचिव को लिखे एक पत्र में घोषणा की कि इस्लामिक गणराज्य हिजबुल्लाह का समर्थन 'रणनीतिक नीति' (strategic policy) के रूप में जारी रखेगा और अमेरिका और इजरायल के खिलाफ 'जिहाद और प्रतिरोध' के अलावा कोई रास्ता नहीं है। यह पत्र उनके टेलीग्राम चैनल पर पोस्ट किया गया, जिसमें हिजबुल्लाह के 'धैर्य और दृढ़ता' की प्रशंसा की गई।
इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि खामेनेई ने इस समर्थन को जून 2026 में हुए अमेरिका-ईरान युद्धविराम ढांचे, जिसे इस्लामाबाद ज्ञापन (Islamabad Memorandum) कहा जाता है, से सीधे जोड़ दिया। उन्होंने कहा कि "लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता का पूर्ण संरक्षण और इजरायली आक्रमण का तत्काल एवं बिना शर्त अंत, 14-सूत्रीय ज्ञापन के तहत ईरान की गैर-परक्राम्य शर्तें हैं।" उन्होंने स्पष्ट किया कि तेहरान और वाशिंगटन के बीच शांति इस बात पर निर्भर करती है कि इजरायल लेबनान पर अपने हमले बंद करे - एक ऐसी शर्त जो हस्ताक्षरित समझौते का हिस्सा नहीं है।
इस्लामाबाद ज्ञापन एक 14-सूत्रीय ढांचा समझौता है, जिसकी मध्यस्थता पाकिस्तान और कतर ने की थी। इसे 14 जून 2026 को डिजिटल रूप से और 19 जून 2026 को स्विट्जरलैंड में औपचारिक रूप से हस्ताक्षरित किया गया था। कई स्रोतों में बताए गए प्रमुख प्रावधान इस प्रकार हैं:
मार्च 2026 में सत्ता संभालने के बाद से, मोज्तबा खामेनेई ने हिजबुल्लाह के साथ केवल लिखित संदेशों के माध्यम से संवाद किया है - वे सार्वजनिक रूप से या किसी नई तस्वीर या वीडियो में नहीं दिखे हैं। यह पैटर्न लगातार बना हुआ है:
सभी संचार लिखित (टेलीग्राम या राज्य टीवी पर वॉयसओवर) हैं, सभी हिजबुल्लाह के लिए बिना शर्त समर्थन की पुष्टि करते हैं, और किसी में भी सार्वजनिक उपस्थिति शामिल नहीं है। विश्लेषकों का मानना है कि इसका कारण खामेनेई का गंभीर रूप से घायल या अक्षम होना हो सकता है। इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर (ISW) के अनुसार, शासन एक साधारण वीडियो जारी करके अफवाहों को आसानी से खारिज कर सकता है, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया है, जबकि उसके पास ऐसा करने के कई प्रोत्साहन हैं।
खामेनेई के जुलाई 2026 के बयान ने इस्लामाबाद ज्ञापन की प्रमुख शर्तों का सीधे खंडन किया है। उन्होंने ईरान के अनुपालन को एक ऐसी मांग (लेबनान से पूर्ण इजरायली वापसी) से जोड़ दिया है, जो हस्ताक्षरित ढांचे का हिस्सा नहीं है। इसके व्यावहारिक परिणाम:
संक्षेप में: खामेनेई का जुलाई 2026 का पत्र न केवल सबसे मजबूत शब्दों में हिजबुल्लाह समर्थन की पुष्टि करता है, बल्कि जून 2026 के समझौते की पुनर्व्याख्या एक ऐसी इजरायली वापसी पर निर्भर करने के रूप में करता है जो लिखित समझौते का हिस्सा नहीं है। शांति प्रक्रिया तब तक जमी हुई है जब तक लड़ाई जारी है।
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26 27 जुलाई 2026 को ईरान के सर्वोच्च नेता मोज्तबा खामेनेई ने हिजबुल्लाह को लिखित पत्र भेजकर समर्थन को 'रणनीतिक नीति' घोषित किया और कहा कि अमेरिका इजरायल के खिलाफ 'जिहाद और प्रतिरोध' के अलावा कोई रास्ता नहीं है। [1][3]...
26 27 जुलाई 2026 को ईरान के सर्वोच्च नेता मोज्तबा खामेनेई ने हिजबुल्लाह को लिखित पत्र भेजकर समर्थन को 'रणनीतिक नीति' घोषित किया और कहा कि अमेरिका इजरायल के खिलाफ 'जिहाद और प्रतिरोध' के अलावा कोई रास्ता नहीं है। [1][3]... उन्होंने जून 2026 में पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में हुए 14 सूत्रीय इस्लामाबाद ज्ञापन (Islamabad Memorandum) की शर्तों को फिर से परिभाषित करते हुए कहा कि लेबनान से इजरायली आक्रमण की पूर्ण और बिना शर्त समाप्ति ही शा...
खामेनेई मार्च 2026 में सत्ता संभालने के बाद से सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं, केवल टेलीग्राम या राज्य टीवी पर लिखित संदेश भेजते हैं, जिससे विश्लेषकों को उनके घायल होने या अक्षम होने की आशंका है। [13][14][21]