पुलिस ने संदिग्ध की पहचान अब्दुल बैलौट (पूरा नाम अब्दुल रहमान तौफिक बैलौट) के रूप में की, जो एक 21 वर्षीय जर्मन नागरिक था, जिसका जन्म बर्लिन में लेबनानी माता-पिता के यहां हुआ था । वह एक कट्टर इस्लामिक स्टेट (ISIS) समर्थक था और उसे पहले भी ISIS में शामिल होने की कोशिश करने के लिए आतंकवाद के आरोप में सजा मिल चुकी थी । जर्मनी के गृह मंत्री अलेक्जेंडर डोब्रिंट ने स्पष्ट रूप से इसे "इस्लामी आतंकी हमला" करार दिया ।
बैलौट को मई 2026 में किशोर न्यायालय से रिहा किया गया था, जो हमले से कुछ ही हफ्ते पहले की बात है । रिहाई के बाद वह पैरोल पर था और उसे डिरेडिकलाइज़ेशन कोर्स करना अनिवार्य था । चौंकाने वाली बात यह है कि वह प्राइड परेड के रूट से महज 100 मीटर की दूरी पर रहता था । अभियोजकों के अनुसार, वह 2025 में लेबनान गया था, जहां से सीरिया में ISIS में शामिल होने का प्रयास किया ।
हमले के बाद बैलौट पैदल ही मौके से फरार हो गया, जब उसकी वैन एक पेड़ से जा टकराई । बर्लिन पुलिस ने तुरंत एक बड़ा अभियान शुरू किया और 2,200 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया । पुलिस ने बैलौट को "संभावित रूप से सशस्त्र और खतरनाक" बताते हुए जनता से उससे दूर रहने की अपील की ।
26 जुलाई की शाम को पुलिस ने उसे बर्लिन के स्पांडाऊ (Spandau) जिले में एक बगीचे (एलॉटमेंट गार्डन) में घेर लिया । जैसे ही पुलिस ने उसे गिरफ्तार करने का प्रयास किया, बैलौट ने पुलिसकर्मियों पर चाकू से हमला कर दिया, जिसके जवाब में पुलिस ने गोली चला दी और वह मारा गया । इस तरह इस आतंकी की मौत हो गई।
हमले के तुरंत बाद प्राइड परेड और इससे जुड़े सभी कार्यक्रम रद्द कर दिए गए । ब्रैंडनबर्ग गेट के पास परेड के स्टेज और अन्य ढांचे को हटा दिया गया । 26 जुलाई को ब्रैंडनबर्ग गेट पर हजारों लोगों ने एक विशाल श्रद्धांजलि सभा (विजिल) में भाग लिया, जहां पीड़ितों को याद किया गया और एलजीबीटीक्यू समुदाय के प्रति एकजुटता दिखाई गई । जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने भी इस सभा में शामिल होकर फूल चढ़ाकर श्रद्धांजलि दी । जर्मन सरकार ने हमले की जांच और सभी दोषियों को सजा दिलाने का संकल्प लिया ।