यहां जानिए पूरा मामला, क्यों इतना विरोध हुआ और यह हमें इस बारे में क्या सिखाता है कि यूजर्स पहले से खरीदे गए हार्डवेयर पर सब्सक्रिप्शन के बारे में क्या सोचते हैं।
कन्वर्सेशन फोकस ग्लासेज़ में लगे माइक्रोफोन का उपयोग करके किसी एक व्यक्ति की आवाज को बाकी पृष्ठभूमि के शोर से अलग करके और बढ़ाकर प्रस्तुत करता है। यह भीड़-भाड़ वाले रेस्तरां, व्यस्त सड़कों या शोरगुल वाले ऑफिसों में बातचीत को आसान बनाता है । सबसे अहम बात यह है कि यह फीचर पूरी तरह से डिवाइस पर ही काम करता है — यह ग्लासेज़ के बीमफॉर्मिंग माइक्रोफोन का उपयोग करके ऑडियो को स्थानीय स्तर पर प्रोसेस करता है और इसे काम करने के लिए किसी इंटरनेट कनेक्शन या क्लाउड प्रोसेसिंग की ज़रूरत नहीं होती ।
The Verge द्वारा सबसे पहले रिपोर्ट की गई इस योजना को Meta ने "रेट लिमिट" (दर सीमा) का नाम दिया, न कि पेमेंट वॉल । नई शर्तों के तहत:
कंपनी ने इसे वैकल्पिक बताते हुए कहा कि "अधिकांश लोग कन्वर्सेशन फोकस का इस्तेमाल मासिक सीमा तक पहुंचे बिना ही करेंगे" । लेकिन जो यूजर्स इस फीचर पर निर्भर थे, खासकर सुनने में कठिनाई वाले लोगों के लिए, यह सीमा एक बड़ा झटका थी।
1. यूजर्स ने हार्डवेयर के लिए पहले ही पैसे दे दिए थे। रे-बैन मेटा स्मार्ट ग्लासेज़ की कीमत लगभग $300 (लगभग ₹25,000) है। ग्राहकों का मानना था कि उन्होंने डिवाइस और उसकी सभी क्षमताओं, जिसमें ऑन-डिवाइस ऑडियो प्रोसेसिंग भी शामिल है, के लिए पहले ही भुगतान कर दिया है। बार-बार फीस वसूलना उन्हें दोगुनी उगाही लगा ।
2. यह डिवाइस पर चलता है, Meta के सर्वर पर नहीं। क्लाउड-आधारित AI फीचर्स के विपरीत, जिनके लिए सर्वर की लागत होती है, कन्वर्सेशन फोकस पूरी तरह से स्थानीय रूप से काम करता है। आलोचकों ने इसे "सिकुड़ाऊ महंगाई" (श्रिंकफ्लेशन) करार दिया — एक ऐसी सुविधा के लिए सब्सक्रिप्शन शुल्क वसूलना जिसे चलाने में Meta की कोई लागत नहीं आती ।
3. यह एक एक्सेसिबिलिटी फीचर है। कन्वर्सेशन फोकस खासतौर पर उन लोगों के लिए मूल्यवान है जिन्हें सुनने में कठिनाई होती है। एक ऐसे टूल को सीमित करना और उसके लिए शुल्क वसूलना जो यूजर्स को रोजमर्रा की बातचीत में मदद करता है, व्यापक रूप से असंवेदनशील बताया गया ।
जुलाई 2026 के अंत तक, Meta के प्रवक्ता टायलर यी ने The Verge को पुष्टि की कि कंपनी दर सीमा और पेमेंट वॉल को लागू करने की योजना को टाल रही है । Meta ने योजना को पूरी तरह से रद्द नहीं किया और कंपनी अन्य प्रीमियम फीचर्स के लिए सब्सक्रिप्शन योजनाओं पर आगे बढ़ रही है। लेकिन कन्वर्सेशन फोकस की कैप को फिलहाल खत्म कर दिया गया ।
यह पूरा प्रकरण चार स्पष्ट सबक देता है कि जब हार्डवेयर कंपनियां डिवाइस खरीदने के बाद फीचर्स का मुद्रीकरण करना चाहती हैं तो यूजर्स कहां लाइन खींचते हैं।
1. ऑन-डिवाइस AI को हार्डवेयर का हिस्सा माना जाता है, कोई सेवा नहीं। यूजर्स क्लाउड-आधारित फीचर्स (जिनके लिए सर्वर की लागत हो सकती है) और लोकल ऑन-डिवाइस प्रोसेसिंग के बीच स्पष्ट अंतर करते हैं, जिसे वे पहले से खरीदी गई क्षमता मानते हैं। स्थानीय कंप्यूटेशन को पेमेंट वॉल के पीछे रखना अनुचित माना गया ।
2. एक्सेसिबिलिटी फीचर्स पर कोई समझौता नहीं। किसी सहायक उपकरण को सब्सक्रिप्शन के पीछे रखने पर विशेष रूप से भावनात्मक प्रतिक्रिया हुई। भविष्य में एक्सेसिबिलिटी-केंद्रित AI के लिए किसी भी सब्सक्रिप्शन योजना की बहुत बारीकी से जांच की जाएगी ।
3. 'रेट-लिमिट श्रिंकफ्लेशन' उल्टा पड़ता है। किसी नए फीचर के लिए सीधे सब्सक्रिप्शन पेश करने के बजाय, Meta ने एक सॉफ्ट पेमेंट वॉल लगाई — एक मुफ्त भत्ता और फिर एक सख्त सीमा — जिसे यूजर्स ने एक ऐसे फीचर से पैसा वसूलने का जानबूझकर भ्रामक तरीका माना जिसे चलाने की कोई लागत नहीं है। यह रणनीति उलटी पड़ गई ।
4. यूजर्स तेजी से संगठित होते हैं और विरोध को बढ़ाते हैं। चुपचाप सपोर्ट पेज अपडेट करने के कुछ ही हफ्तों में, BBC, The Verge, TechRadar, Tom's Guide और Android Central जैसी बड़ी वेबसाइटों ने इस कहानी को कवर किया। समन्वित आलोचना के कारण Meta को अपनी योजना टालनी पड़ी ।