नतीजे चौंकाने वाले हैं। वैश्विक भाषा विविधता लगभग 20,000 से 75,000 भाषाओं के साथ करीब 2,000 साल पहले (लगभग 1000 ईसा पूर्व से 1000 ईस्वी के बीच) अपने चरम पर थी। यह आज बोली और सांकेतिक रूप में इस्तेमाल की जाने वाली लगभग 7,500 भाषाओं से 10 गुना अधिक है।
इस अध्ययन की सबसे बड़ी खोज यह है कि भाषा विविधता का पतन यूरोपीय उपनिवेशवाद से बहुत पहले शुरू हो गया था। यह 'स्वर्ण युग' लगभग 3,000 से 1,000 साल पहले समाप्त हुआ। इसका मुख्य कारण था कृषि का विस्तार। जब मनुष्य खेती करने लगा और बड़े, केंद्रीकृत समाजों का उदय हुआ, तो छोटे भाषा समूह बड़े समूहों में विलीन होने लगे।
शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि होलोसीन युग की शुरुआत (~12,000 साल पहले) में, मानव आबादी बहुत छोटी होने के कारण, दुनिया में केवल 4,500 से 6,200 भाषाएं थीं - जो आज से भी कम थीं। इससे पता चलता है कि भाषाई विविधता लगातार घटती नहीं गई, बल्कि यह आबादी के साथ बढ़ी, अपने चरम पर पहुँची और फिर गिरावट शुरू हुई।
आज दुनिया में लगभग 7,500 भाषाएं बोली या संकेतों में प्रयोग की जाती हैं। लेकिन नुकसान की गति तेज़ हो रही है। Science के इस अध्ययन से अलग, Nature Ecology & Evolution में प्रकाशित एक अन्य शोध का अनुमान है कि अगर हस्तक्षेप नहीं किया गया तो भाषा नुकसान की दर 40 वर्षों में तीन गुना हो सकती है। हर महीने कम से कम एक भाषा खत्म हो सकती है और इस सदी के अंत तक 1,500 से अधिक भाषाएं विलुप्त हो सकती हैं।
Science का अध्ययन मुख्य रूप से ऐतिहासिक पुनर्निर्माण पर केंद्रित है, लेकिन व्यापक शोध संदर्भ स्पष्ट करता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) छोटी भाषाओं के हाशिए पर जाने की इस प्रक्रिया को और तेज़ कर रहा है।
जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय के एक शोध में पाया गया कि लोकप्रिय LLM एक समतामूलक मंच बनाने के बजाय, 'सूचना कोकून' (जानकारी के घेरे) बना रहे हैं। Nature के नवंबर 2025 के एक लेख के अनुसार, एशिया, अफ्रीका और अमेरिका के समुदायों द्वारा बोली जाने वाली भाषाएं - जो दुनिया की लगभग 7,000 भाषाओं में से 5,500 हैं - इस सदी के अंत तक गायब होने के खतरे में हैं।
Science का यह अध्ययन मानव भाषाई इतिहास के बारे में हमारी समझ को पूरी तरह बदल देता है। भाषाओं की विविधता कभी आज की तुलना में कहीं अधिक थी, जो लगभग 2,000 साल पहले अपने चरम पर पहुँची थी। गिरावट की शुरुआत उपनिवेशवाद से नहीं, बल्कि कृषि से हुई। और जहाँ ये ऐतिहासिक ताकतें हज़ारों साल पुरानी हैं, वहीं आधुनिक AI सिस्टम दुनिया की अधिकांश भाषाओं को डिजिटल भविष्य से बाहर करके इस नुकसान की प्रक्रिया को और तेज़ करने का जोखिम पैदा कर रहे हैं।