नेचर कम्युनिकेशंस में 2025 में प्रकाशित एक अध्ययन ने वास्तविक दुनिया के उपग्रह डेटा का उपयोग करके उष्णकटिबंधीय समुद्री निचले बादलों के फीडबैक को समझने का प्रयास किया। अध्ययन का निष्कर्ष है कि यह फीडबैक वर्तमान जलवायु मॉडलों (CMIP6 मॉडल) के औसत अनुमान से काफी मजबूत है । इसका मतलब है कि हमारी जलवायु प्रणाली ग्रीनहाउस गैसों के प्रति मॉडलों के औसत अनुमान से अधिक संवेदनशील है
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हांगकांग यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (HKUST) के शोधकर्ताओं ने एक बेहतर तरीका विकसित किया। उन्होंने पाया कि उष्णकटिबंधीय बादलों का फीडबैक ग्रीनहाउस प्रभाव को पिछले अनुमानों की तुलना में 71% अधिक बढ़ा सकता है [6, 25]। यह शोध, जो नेचर कम्युनिकेशंस में प्रकाशित हुआ, समुद्री सीमा-परत (मरीन बाउंड्री लेयर) में स्थित निचले बादलों को एक विशेष रूप से शक्तिशाली प्रवर्धक बताता है । इस अध्ययन ने इस संभावना को भी खारिज कर दिया कि उष्णकटिबंधीय निचले बादल गर्मी को कम करने वाला कोई शीतलन प्रभाव (कूलिंग इफेक्ट) उत्पन्न कर सकते हैं
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निचले बादलों के फीडबैक की ताकत इस बात पर निर्भर करती है कि समुद्र की सतह कहाँ गर्म हो रही है। एक 'वार्मर-गेट-हायर' (Warmer-get-higher) सिद्धांत बताता है कि SST वृद्धि के स्थानिक पैटर्न उष्णकटिबंधीय बादलों की मात्रा और ऊंचाई में बदलाव लाते हैं, जो अंततः फीडबैक के आकार को नियंत्रित करते हैं ।
हाल के दशकों में देखा गया वार्मिंग पैटर्न - पश्चिमी प्रशांत में अधिक गर्मी और पूर्वी प्रशांत में कम गर्मी - ने ऐतिहासिक रूप से निचले बादलों के फीडबैक को कुछ हद तक नियंत्रित किया है [1, 8]। हालांकि, जलवायु मॉडल भविष्यवाणी करते हैं कि यह पैटर्न बदल जाएगा और सदी के अंत तक पूर्वी प्रशांत में अधिक गर्मी होगी, जिससे फीडबैक और मजबूत होने की संभावना है ।
नवीनतम आंकड़ों का उपयोग करते हुए अपडेटेड उभरते बाध्यांकों (एमर्जेंट कंस्ट्रेंट्स) के अनुसार, क्षणिक जलवायु प्रतिक्रिया (ट्रांज़िएंट क्लाइमेट रिस्पॉन्स - TCR) लगभग 1.81 K (बहुत संभावित सीमा 1.28–2.33 K) है, जो 2019 से पहले के अनुमानों से मामूली वृद्धि है । कुछ विश्लेषणों से पता चलता है कि जलवायु संवेदनशीलता (CO₂ दोगुना होने पर गर्मी) 2.5–3°C के सामान्य अनुमान के बजाय 4.5°C के करीब हो सकती है
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निचले बादलों के अल्बेडो में गिरावट ने रिकॉर्ड-तोड़ पृथ्वी ऊर्जा असंतुलन (अर्थ्स एनर्जी इम्बैलेंस) में योगदान दिया है, जो 2023 में अपने सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया था [9, 12]। यह अनुमान है कि निचले बादलों की कमी हाल के ऊर्जा असंतुलन प्रवृत्ति का लगभग 70% हिस्सा है ।
2020 के बाद अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के नियमों के कारण वैश्विक शिपिंग से सल्फर एरोसोल उत्सर्जन में भारी गिरावट आई है। इससे प्रशांत और अटलांटिक महासागरों के ऊपर निचले बादलों की परावर्तनशीलता और कम हो गई है, जिसने गर्मी को और बढ़ाया है । यह 'स्वच्छ हवा' (क्लीनर एयर) प्रभाव 2023-2024 में वैश्विक तापमान में अचानक वृद्धि का एक कारण माना जा रहा है
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जुलाई 2026 के एक अध्ययन में पाया गया कि 1979 से 2025 तक उष्णकटिबंधीय निचले बादलों की संख्या वास्तव में प्रति दशक लगभग 0.18% बढ़ी है। इससे पता चलता है कि पिछले लगभग 47 वर्षों में बादलों ने आंशिक रूप से गर्मी को कम किया है । यह वृद्धि मुख्य रूप से स्ट्रैटोक्यूम्यलस बादलों में हुई, जो सूर्य के प्रकाश को परावर्तित करने में विशेष रूप से प्रभावी होते हैं, और इसका शीतलन प्रभाव लगभग −0.79 W m⁻² K⁻¹ होने का अनुमान है
। हालांकि, जलवायु मॉडल लगातार दिखाते हैं कि यह सुरक्षात्मक प्रभाव भविष्य में उलट जाएगा और कमजोर हो जाएगा, और निचले बादलों का फीडबैक भविष्य में अधिक मजबूती से सकारात्मक (पॉजिटिव) हो जाएगा
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वर्ष 2023 और 2024 अब तक के सबसे गर्म वर्ष रहे हैं, 2024 पूर्व-औद्योगिक स्तरों से 1.5°C से अधिक गर्म होने वाला पहला कैलेंडर वर्ष था [11, 14]। पिछले 11 वर्ष रिकॉर्ड पर 11 सबसे गर्म वर्ष रहे हैं ।
सबूत मजबूती से इस ओर इशारा करते हैं कि उष्णकटिबंधीय निचले बादलों का घटना वैश्विक तापन का एक प्रमुख प्रवर्धक है। उपग्रह डेटा पहले से ही निचले बादलों की मात्रा और अल्बेडो में कमी दर्शाता है, और अवलोकन संबंधी बाध्यांक बताते हैं कि फीडबैक मॉडल रेंज के उच्च सिरे पर है। यह जलवायु संवेदनशीलता के केंद्रीय अनुमान को बढ़ाता है और सुझाव देता है कि भविष्य का तापन औसत CMIP6 मॉडल प्रक्षेपण से अधिक तेज़ हो सकता है - जब तक कि गहरे और तीव्र उत्सर्जन में कमी नहीं की जाती। मुख्य अनिश्चितताएं फीडबैक के सटीक परिमाण और बदलते SST वार्मिंग पैटर्न इसे आने वाले दशकों में कैसे नियंत्रित करेंगे, ये हैं।