TikTok, अमेरिकी क्रिएटर्स के एक छोटे समूह के लिए 'लाइकनेस डिटेक्शन' नामक एक ऑप्ट इन टूल का परीक्षण कर रहा है, जो AI द्वारा बनाए गए कंटेंट में क्रिएटर के चेहरे की पहचान करता है और इसे रिपोर्ट करने की सुविधा देता है। इस टूल का उपयोग करने के लिए क्रिएटर्स को Jumio के ज़रिए अपनी पहचान सत्यापित करनी होगी, जिसमें एक लाइव...

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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म TikTok ने अपने क्रिएटर्स को डीपफेक और AI से बने फर्जी कंटेंट से बचाने के लिए एक नए टूल का परीक्षण शुरू किया है। इस टूल का नाम Likeness Detection है। यह टूल AI द्वारा बनाए गए उन वीडियोज़ को स्कैन करता है जिनमें किसी क्रिएटर की शक्ल का इस्तेमाल किया गया हो, और फिर क्रिएटर को इसे रिपोर्ट करने का अधिकार देता है । सोशल मीडिया कंसल्टेंट मैट नवारा ने सबसे पहले इस टूल को देखा था, और TikTok के US प्रवक्ता ज़ाचरी किज़र ने The Verge को इसकी पुष्टि की
। यह परीक्षण ऐसे समय में शुरू हुआ है जब EU AI एक्ट के आर्टिकल 50 के तहत पारदर्शिता से जुड़ी बाध्यताएं 2 अगस्त 2026 से लागू होने वाली हैं
।
इस टूल का उपयोग करने के लिए क्रिएटर्स को पहले अपनी पहचान सत्यापित करनी होगी। यह सत्यापन Jumio नामक तीसरे पक्ष की सेवा के ज़रिए होता है। इसमें दो चरण शामिल हैं :
TikTok का दावा है कि वह क्रिएटर्स के ID दस्तावेज़ों या चेहरे के बायोमेट्रिक डेटा को स्टोर नहीं करता । सत्यापन की प्रक्रिया Jumio द्वारा संभाली जाती है और इसका उपयोग केवल यह पुष्टि करने के लिए किया जाता है कि नामांकन करने वाला व्यक्ति वही है जो वह होने का दावा करता है। हालांकि, Jumio की ओर से, एक "रेफरेंस सेल्फी" आमतौर पर उसके सर्वर पर स्टोर की जाती है और यह संगठन की डेटा रिटेंशन सेटिंग्स पर निर्भर करता है
, लेकिन TikTok की नीति है कि वह स्वयं इन छवियों को नहीं रखता
।
एक बार सत्यापित होने के बाद, TikTok का AI प्लेटफॉर्म पर अपलोड किए गए किसी भी ऐसे कंटेंट को स्कैन करना शुरू कर देता है जो क्रिएटर की शक्ल का उपयोग करता हुआ प्रतीत होता है। यदि संभावित मिलान मिलते हैं, तो क्रिएटर उनकी समीक्षा कर सकता है और AI द्वारा बनाए गए अनधिकृत रूप का सीधे TikTok पर रिपोर्ट कर सकता है ।
यह परीक्षण वर्तमान में केवल US के क्रिएटर्स के एक छोटे समूह तक सीमित है । TikTok ने अभी तक इसके व्यापक रोलआउट या अंतरराष्ट्रीय विस्तार की कोई घोषणा नहीं की है
।
यूट्यूब का सिस्टम काफी अधिक परिपक्व और व्यापक रूप से सुलभ है:
यूट्यूब ने 2024 में YouTube पार्टनर प्रोग्राम के क्रिएटर्स के साथ लाइकनेस डिटेक्शन का परीक्षण शुरू किया था, और फिर 2026 की शुरुआत में इसे सार्वजनिक हस्तियों और मनोरंजन उद्योग तक बढ़ा दिया । 18 मई, 2026 को, YouTube ने घोषणा की कि यह टूल 18 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध है
। YouTube इसे Content ID के समान एक मिलान सेवा के रूप में वर्णित करता है, जो क्रिएटर्स को उनके चेहरे का उपयोग करने वाले AI-जनरेटेड कंटेंट को खोजने, समीक्षा करने और हटाने का अनुरोध करने की क्षमता देता है
। मुख्य अंतर पैमाने और पहुंच का है: YouTube का टूल करोड़ों वयस्क उपयोगकर्ताओं के लिए खुला है, जबकि TikTok का टूल अभी भी एक संकीर्ण US-केंद्रित पायलट है जिसके व्यापक रिलीज़ के लिए कोई घोषित समय-सीमा नहीं है।
TikTok ने अपने प्लेटफॉर्म पर 1.3 बिलियन से अधिक AI-जनरेटेड वीडियो को लेबल किया है, और अब TikTok पर सभी कंटेंट का 52% किसी न किसी रूप में AI से जुड़ा है — फिल्टर और इफेक्ट्स से लेकर पूर्ण AI अवतार तक । अनुमान है कि रोज़ाना 7.5 मिलियन AI-जनरेटेड वीडियो अपलोड किए जाते हैं, जो कुल अपलोड का लगभग 22% है
। प्लेटफॉर्म पहले ही अनिवार्य AI कंटेंट लेबलिंग और एक फीड-कंट्रोल सुविधा शुरू कर चुका है जो उपयोगकर्ताओं को AI कंटेंट की दृश्यता कम करने की सुविधा देता है
।
TikTok का यह परीक्षण ऐसे समय में आया है जब EU AI एक्ट के आर्टिकल 50 के तहत पारदर्शिता की बाध्यताएं 2 अगस्त 2026 से लागू होने वाली हैं । इस नियम के अनुसार, सभी AI-जनरेटेड या हेरफेर किए गए कंटेंट — डीपफेक, सिंथेटिक ऑडियो, इमेज, वीडियो, टेक्स्ट — को EU में तैनात होने पर मशीन-रीडेबल फॉर्मेट में चिह्नित और स्पष्ट रूप से लेबल किया जाना चाहिए
। 8 मई, 2026 को, यूरोपीय आयोग ने ड्राफ्ट दिशानिर्देश प्रकाशित किए जिसमें निर्दिष्ट किया गया कि बिना धोखा देने के इरादे के बनाए गए डीपफेक कंटेंट को भी लेबल किया जाना चाहिए
। आयोग द्वारा सुगम AI-जनरेटेड कंटेंट की पारदर्शिता पर आचार संहिता इन चिह्नीकरण आवश्यकताओं को और मजबूत करती है
। EU में काम करने वाले प्लेटफार्मों — जिनमें TikTok और YouTube शामिल हैं — को उस तारीख तक अनुपालन के लिए मजबूत डिटेक्शन, लेबलिंग और प्रवर्तन प्रणाली की आवश्यकता होगी।
TikTok के परीक्षण को उन अनुपालन आवश्यकताओं की दिशा में एक सक्रिय कदम के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन EU की समय-सीमा में केवल कुछ सप्ताह शेष रहने के साथ, यह वैश्विक उपयोगकर्ता आधार को कवर करने वाली एक पूर्ण प्रवर्तन प्रणाली के बजाय एक बाजार में एक सीमित पायलट बना हुआ है।
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TikTok, अमेरिकी क्रिएटर्स के एक छोटे समूह के लिए 'लाइकनेस डिटेक्शन' नामक एक ऑप्ट इन टूल का परीक्षण कर रहा है, जो AI द्वारा बनाए गए कंटेंट में क्रिएटर के चेहरे की पहचान करता है और इसे रिपोर्ट करने की सुविधा देता है।
TikTok, अमेरिकी क्रिएटर्स के एक छोटे समूह के लिए 'लाइकनेस डिटेक्शन' नामक एक ऑप्ट इन टूल का परीक्षण कर रहा है, जो AI द्वारा बनाए गए कंटेंट में क्रिएटर के चेहरे की पहचान करता है और इसे रिपोर्ट करने की सुविधा देता है। इस टूल का उपयोग करने के लिए क्रिएटर्स को Jumio के ज़रिए अपनी पहचान सत्यापित करनी होगी, जिसमें एक लाइव सेल्फी और सरकारी ID शामिल है। TikTok का दावा है कि वह इन दस्तावेज़ों को स्टोर नहीं करता है।
यूट्यूब का समान टूल कहीं अधिक परिपक्व है: इसे 18 मई 2026 को 18 वर्ष से अधिक के सभी उपयोगकर्ताओं के लिए रोल आउट किया गया था, जबकि TikTok का परीक्षण अभी शुरुआती चरण में है।