कूटनीतिक प्रयास विफल हो गए हैं। पाकिस्तान की मध्यस्थता में 8 अप्रैल 2026 को दो सप्ताह का युद्धविराम तय हुआ था । इसे बढ़ाया गया और 17 जून 2026 को इस्लामाबाद ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर हुए, जिसे स्थायी शांति के लिए 60-दिवसीय रूपरेखा के रूप में तैयार किया गया था । यह युद्धविराम लगभग तीन सप्ताह तक चला, लेकिन जुलाई 2026 की शुरुआत में हमलों और जवाबी हमलों के एक नए दौर में टूट गया । 8 जुलाई को राष्ट्रपति ट्रम्प ने युद्धविराम को 'खत्म' घोषित कर दिया ।
एक महत्वपूर्ण सुधार: 'ईरान के सर्वोच्च नेता ने इसे बेकार बताया' के दावे पर ध्यान दें। मूल सर्वोच्च नेता, अली खामेनेई, युद्ध के पहले दिन, 28 फरवरी 2026 को मारे गए थे । उनके उत्तराधिकारी, मोज्तबा खामेनेई ने 18 जुलाई को एक बयान जारी कर अमेरिका पर एमओयू का बार-बार उल्लंघन करने का आरोप लगाया और कहा कि राष्ट्रपति ट्रम्प का हस्ताक्षर 'पूरी तरह से बेकार और अमान्य है' । इसलिए, नए सर्वोच्च नेता ने, न कि मूल नेता ने, इस समझौते को खारिज किया है।
पुष्टि हो गई है। ईरान ने कुवैत, बहरीन, जॉर्डन और कतर में अमेरिकी सैन्य बुनियादी ढांचे पर मिसाइलों और ड्रोनों के कई दौर के हमले किए हैं:
यह संघर्ष सीधे तौर पर कुवैत, बहरीन, जॉर्डन, कतर और इराक को युद्ध क्षेत्र या हमले के क्षेत्र के रूप में खींच चुका है । 19-20 जुलाई तक, अमेरिकी सेना लगातार नौ रातों से हमले कर रही थी । युद्ध अपने पाँचवें महीने में पहुँच रहा है और इसमें कोई कमी नहीं आ रही है, सैनिकों की मौत जॉर्डन और इराक में हुई है ।
होर्मुज जलडमरूमध्य से वाणिज्यिक शिपिंग में गंभीर और चल रहा व्यवधान है:
संयुक्त राष्ट्र की शिपिंग एजेंसी के महासचिव, आर्सेनियो डोमिंगुएज़ ने भयावह मानवीय और आर्थिक परिणामों की चेतावनी दी है, और होर्मुज में यातायात के ठप होने को इतिहास का सबसे बड़ा आपूर्ति व्यवधान बताया है । संयुक्त राष्ट्र ने कर्मियों को निकाला लेकिन 26 जून को एक मालवाहक जहाज पर फिर से हमले ने निकासी योजना को रोक दिया । इस स्थिति ने खाड़ी देशों को और हमलों के लिए हाई अलर्ट पर रखा है ।