इससे पहले 7-8 जुलाई 2026 को अंकारा (तुर्की) में नाटो शिखर सम्मेलन हुआ था जहाँ 32 सदस्य देशों ने औपचारिक रूप से यूक्रेन को 2026 में 70 अरब यूरो (करीब 80 अरब डॉलर) की सैन्य सहायता देने और 2027 में भी कम-से-कम इसी स्तर पर समर्थन जारी रखने की प्रतिज्ञा की । रूसी विदेश मंत्रालय ने इसे 'विनाशकारी परिणाम' वाला कदम बताया था
।
कादिरोव ने अपने टेलीग्राम चैनल पर लिखा, "उन देशों से शुरुआत करने में कोई बुराई नहीं होगी जो नाटो के नाम के पीछे छिपकर बेशर्मी से यूक्रेन को हथियार, खुफिया डेटा और दूसरी सहायता मुहैया करा रहे हैं" । उसने 'गोली चलाने' और 'आग लगाने' का समर्थन किया
।
उसने कहा, "जैसे ही उन्हें टीएनटी (विस्फोटक) की गंध आएगी, जैसे ही वे कलाश्निकोव की आवाज़ और टी-90 टैंक की क्लैंग-क्लैंग सुनेंगे, वे सबकुछ समझ जाएँगे और सच्चाई पर आ जाएँगे। यह गोली चलाने का वक़्त आ गया है" । उसने यह भी कहा कि चेचन इकाइयाँ पुतिन के आदेश का इंतज़ार कर रही हैं और किसी भी दिशा में तैनात होने को तैयार हैं
।
कादिरोव के ये बयान नाटो के अंकारा शिखर सम्मेलन के करीब दस दिन बाद आए । उस सम्मेलन में नाटो ने यूक्रेन को दीर्घकालिक हथियार आपूर्ति की प्रतिबद्धता जताई थी
। अनुच्छेद 5 (सामूहिक रक्षा) पर 'लोहे जैसी प्रतिबद्धता' दोहराई गई थी
। कादिरोव का बयान ड्रोन हमले के तुरंत बाद आया, लेकिन विशेषज्ञ इसे अंकारा सम्मेलन के फैसलों के विरोध की एक और कड़ी मानते हैं
।
विश्लेषकों का मानना है कि कादिरोव के ये बयान क्रेमलिन की सरकारी नीति से कहीं आगे जाते हैं । इसके पीछे चार वजहें हैं:
कुल मिलाकर, कादिरोव रूसी सिस्टम का एक 'अनियंत्रित किंतु नियंत्रित तुरुप का पत्ता' है — उसकी कट्टरता प्रचार और डराने में कारगर है, लेकिन ये बयान आधिकारिक रूसी नीति नहीं दर्शाते और क्रेमलिन इनसे दूरी बनाए रखता है।