अमेरिका ईरान के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता में 17 जून 2026 को हस्ताक्षरित 60 दिवसीय 'इस्लामाबाद ज्ञापन' होर्मुज जलडमरूमध्य में यातायात नियंत्रण को लेकर विवाद के चलते तीन हफ्तों में तहस नहस हो गया। ईरान ने भारत समर्थित चाबहार बंदरगाह पर अमेरिकी हमले को 'युद्ध अपराध' करार दिया, जबकि नए सर्वोच्च नेता के सैन्य सलाहकार न...

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जून 2026 में बड़ी उम्मीदों के साथ हस्ताक्षरित अमेरिका-ईरान अंतरिम शांति समझौता एक महीने से भी कम समय में चरमरा गया। यह पतन तेजी से और विनाशकारी रूप से हुआ, जिसकी वजह समझौते के एक ही खंड की अलग-अलग व्याख्याएं थीं। यह लेख स्रोतों के आधार पर इस पतन के कारणों, ईरान की विशिष्ट प्रतिक्रियाओं—जिसमें सामरिक चाबहार बंदरगाह पर हमले की निंदा शामिल है—और लगातार सातवीं रात जारी खुले संघर्ष की स्थिति का विवरण प्रस्तुत करता है।
'इस्लामाबाद ज्ञापन' के नाम से ज्ञात यह अंतरिम युद्धविराम 17 जून, 2026 को पाकिस्तान की मध्यस्थता में हस्ताक्षरित हुआ था । इसका उद्देश्य एक स्थायी शांति समझौते पर बातचीत के लिए 60 दिनों की खिड़की उपलब्ध कराना था
। लेकिन तीन सप्ताह के भीतर ही यह चकनाचूर हो गया। इस पतन के तीन मुख्य कारण थे:
समझौते में एक खंड था जिसकी ईरान ने व्याख्या यह की कि उसे होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों के आवागमन को नियंत्रित करने का अधिकार मिल गया है। वहीं, अमेरिका का मानना था कि इस खंड के तहत ईरान की कोई भी कार्रवाई वाणिज्यिक जहाजों पर हमले के समान है । 7 जुलाई को जलडमरूमध्य में तीन टैंकरों को निशाना बनाया गया, जिसका दोष अमेरिका ने ईरान पर लगाया
। इस व्याख्या के टकराव ने ही समझौते की नींव हिला दी। जैसा कि एसोसिएटेड प्रेस ने कहा, यह खंड "समझौते के पतन का कारण" बना
।
टैंकर हमलों के कुछ ही घंटों बाद अमेरिकी सेना ने ईरान पर हमलों का एक नया दौर शुरू किया। अमेरिका ने ईरान को तेल बेचने का लाइसेंस भी रद्द कर दिया और तेल प्रतिबंध फिर से लगा दिए । हमलों की पहली लहर में ईरान के 80 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया गया
।
8 जुलाई को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ज्ञापन "खत्म" हो चुका है और वे तेहरान से बात नहीं करना चाहते । ईरान ने भी इसी तरह की प्रतिक्रिया दी। 15 जुलाई को तेहरान ने घोषणा की कि अमेरिकी हमलों ने ज्ञापन को "शून्य" कर दिया है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर कालीबाफ ने कहा कि ईरान "अमेरिका के साथ एक मूलभूत और अस्तित्वगत युद्ध में" है और उसके पास समझौते की शर्तों का पालन जारी रखने का कोई कारण नहीं है
।
अमेरिकी हमलों ने ईरान के शहीद कलंतरी बंदरगाह (चाबहार) को निशाना बनाया—जो भारत द्वारा समर्थित एक सामरिक रूप से महत्वपूर्ण बंदरगाह है। यह हमला अमेरिकी सैन्य अभियान की दूसरी रात (9 जुलाई) को हुआ । ईरान की प्रतिक्रिया बहुआयामी थी:
18 जुलाई को भारत में ईरानी दूतावास ने एक कड़ी निंदा जारी करते हुए चाबहार बंदरगाह पर अमेरिकी हमले को "युद्ध अपराध" करार दिया। बयान में विशेष रूप से बंदरगाह पर एक निगरानी टॉवर के नष्ट होने का उल्लेख किया गया और इस कार्रवाई को "अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का स्पष्ट उल्लंघन" बताया ।
यहां नेतृत्व में हुए बदलाव को समझना ज़रूरी है। फरवरी 2026 में एक अमेरिकी-इजरायली हमले में आयतुल्लाह अली खामेनेई मारे गए थे और उनके उत्तराधिकारी मोज्तबा खामेनेई ने पदभार संभाला था । जुलाई में चाबहार पर हमले के समय तक, नए सर्वोच्च नेता के एक सैन्य सलाहकार, मेजर जनरल मोहसिन रजाई ने एक सख्त चेतावनी जारी की। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिकी हमले अगले दो-तीन दिनों तक जारी रहे तो तेहरान "पूर्ण-पैमाने पर आक्रामक अभियान" फिर से शुरू कर देगा
।
हमले और जारी युद्ध के बावजूद, भारत में ईरान के राजदूत ने सार्वजनिक रूप से कहा कि चाबहार परियोजना अपने लक्ष्यों के अनुसार आगे बढ़ रही है । भारत ने बाद में पुष्टि की कि बंदरगाह पर शहीद बेहेश्टी टर्मिनल को हमलों में कोई नुकसान नहीं पहुंचा है
।
17-18 जुलाई, 2026 तक अमेरिका और ईरान लगातार सातवीं रात से एक तीव्र, अनवरत गोलीबारी में उलझे हुए थे ।
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अमेरिका ईरान के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता में 17 जून 2026 को हस्ताक्षरित 60 दिवसीय 'इस्लामाबाद ज्ञापन' होर्मुज जलडमरूमध्य में यातायात नियंत्रण को लेकर विवाद के चलते तीन हफ्तों में तहस नहस हो गया।
अमेरिका ईरान के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता में 17 जून 2026 को हस्ताक्षरित 60 दिवसीय 'इस्लामाबाद ज्ञापन' होर्मुज जलडमरूमध्य में यातायात नियंत्रण को लेकर विवाद के चलते तीन हफ्तों में तहस नहस हो गया। ईरान ने भारत समर्थित चाबहार बंदरगाह पर अमेरिकी हमले को 'युद्ध अपराध' करार दिया, जबकि नए सर्वोच्च नेता के सैन्य सलाहकार ने लगातार सातवीं रात भी जारी हमलों के बीच 'पूर्ण पैमाने पर आक्रामक' कार्रवाई की चेतावनी दी।