बाथ यूनिवर्सिटी के जीवाश्म विज्ञानी और विकासवादी जीवविज्ञानी निकोलस लॉन्गरिच (Nicholas Longrich) के नेतृत्व में टीम ने संग्रहालयों के संग्रहों की छानबीन करते हुए दो महत्वपूर्ण नमूनों की पहचान की । पहला नमूना टी-रेक्स के बच्चे के पैर की एक छोटी हड्डी (मेटाटार्सल) है (नमूना RSKM P2416.82, जो सस्केचेवान के फ्रेंचमैन फॉर्मेशन से मिला था)। दूसरा नमूना गोरगोसॉरस लाइब्रेटस (Gorgosaurus libratus) के बच्चे की ऐसी ही हड्डी है (TMP 1981.16.475, जो अल्बर्टा के डायनासोर पार्क फॉर्मेशन से मिली थी) । ये नाजुक हड्डियां वर्षों से अनदेखी, गलत लेबल लगी या बस संग्रहालयों के स्टोररूम की दराजों में धूल खा रही थीं, जब तक टीम ने उनकी असली पहचान नहीं कर ली । लॉन्गरिच ने कहा, "संग्रहालयों के संग्रहों को देखते हुए, मैं और मेरे सहयोगी हैचलिंग टायरानोसॉर के पहले अवशेष खोजने में सफल रहे हैं" । साइंसअलर्ट (ScienceAlert) ने इस खोज को 'बेहद दुर्लभ' बताया ।
टी-रेक्स के बच्चे की हड्डी से पता चला कि उस डायनासोर का वज़न लगभग 2.5 किलोग्राम (करीब 5.5 पाउंड) था, जो एक छोटी घरेलू बिल्ली के बराबर है । मरते समय यह बच्चा कुछ हफ्ते से लेकर कुछ महीने का ही रहा होगा । यह आकार उस कुत्ते या टर्की के आकार के बच्चे से कहीं छोटा है, जो अक्सर 'जुरासिक पार्क' जैसी फिल्मों और लोकप्रिय मीडिया में दिखाया जाता है ।
इससे पहले, पुराने अध्ययनों और भ्रूण की हड्डियों के आधार पर अक्सर अनुमान लगाया जाता था कि टी-रेक्स के बच्चे बॉर्डर कॉली कुत्ते (करीब 3 फीट लंबे) या एक बड़े टर्की के आकार के होते थे । लेकिन अब मिले प्रत्यक्ष जीवाश्म सबूतों ने इस आकार को काफी हद तक छोटा कर दिया है।
शरीर के वजन और अंडों के आकार के बीच के संबंध का उपयोग करते हुए, टीम ने अनुमान लगाया कि टी-रेक्स के अंडे पहले के अनुमानों से कहीं छोटे थे। इस आधार पर, एक घोंसले में अंडों की संख्या 15 से 30 के बीच होने का अनुमान लगाया गया । हालांकि इससे बड़े क्लच (एक बार में दिए जाने वाले अंडों का समूह) भी संभव थे, लेकिन लेखकों का मानना था कि अंडों की संख्या 15 से कम होना असंभव था । यह एक प्रजनन रणनीति की ओर इशारा करता है, जिसमें बहुत बड़े अंडे देने के बजाय अधिक संख्या में अंडे देने पर जोर दिया जाता था।
शायद सबसे चौंकाने वाली खोज माता-पिता के व्यवहार से जुड़ी है। हड्डियों की हिस्टोलॉजिकल जांच (Histological analysis) में 'ग्रोथ रिंग्स' (LAGs - Lines of Arrested Growth) नहीं पाई गईं, जिसका मतलब है कि बच्चे लगातार और तेज़ी से बढ़ रहे थे, बिना किसी मौसमी ठहराव के । यह वृद्धि पैटर्न 'प्रीकोशियल' (precocial) शिशुओं के लिए विशिष्ट होता है, यानी ऐसे बच्चे जो अंडे से निकलते ही चल सकते हैं, अपना खाना खुद ढूंढ सकते हैं और शिकारियों से भाग सकते हैं, ठीक वैसे ही जैसे मुर्गी या बत्तख के बच्चे करते हैं ।
ये नतीजे बताते हैं कि वयस्क टायरानोसॉर अपने बच्चों को लंबे समय तक खाना नहीं खिलाते थे और न ही उनकी रक्षा करते थे । इसके बजाय, उनकी प्रजनन रणनीति में अधिक अंडे देना और प्रति बच्चे पर कम निवेश करना शामिल था, जो एक समुद्री कछुए (sea turtle) की तरह है, न कि किसी आधुनिक शिकारी पक्षी की तरह । लेखकों ने बच्चों के दांतों पर घिसाव को इस बात का सबूत माना कि वे बहुत छोटी उम्र से ही अपेक्षाकृत बड़े कशेरुकी जीवों (vertebrates) को खाते थे, जो बच्चों के स्वतंत्र और सक्रिय शिकारी होने के विचार को और मजबूत करता है ।
एक वयस्क टी-रेक्स के अपने घोंसले और बच्चों की रक्षा करने का प्रतिष्ठित दृश्य अब काल्पनिक लगता है। एक रिपोर्ट में कहा गया, "पता चला, जुरासिक पार्क फिर से गलत था" । हालांकि पहले के शोध में टायरानोसॉर के माता-पिता की देखभाल पर बहस हुई थी, लेकिन इस अध्ययन ने पहला प्रत्यक्ष जीवाश्म सबूत दिया है कि टी-रेक्स के बच्चे जन्म से ही काफी हद तक अपने दम पर थे ।
संग्रहालयों की दराजों में खोजे गए पहले पक्के टी-रेक्स हैचलिंग जीवाश्मों से पता चलता है कि नवजात शिशु कुत्ते या टर्की के आकार के नहीं, बल्कि छोटी बिल्ली (~2.5 किग्रा) के आकार के थे; घोंसलों में संभवतः 15 से 30 छोटे अंडे होते थे; और बच्चे 'प्रीकोशियल' थे, यानी जन्म से ही काफी हद तक स्वतंत्र थे, जो फिल्मों में लोकप्रिय सुरक्षात्मक माता-पिता की छवि का खंडन करता है ।