बेंचमार्क 3:2:1 क्रैक स्प्रेड — जो तीन बैरल क्रूड को दो बैरल पेट्रोल और एक बैरल डीज़ल में बदलने के सैद्धांतिक मुनाफे को दर्शाता है — तेजी से बढ़ा है । जुलाई 2026 तक यह क्रैक स्प्रेड क्रूड के एक बैरल की कीमत के 70-75% तक पहुंच गया था, जो जून की शुरुआत में 45% और साल की शुरुआत में सिर्फ 27% था ।
पेट्रोल, डीज़ल और जेट फ्यूल का रिफाइनिंग मार्जिन ऐतिहासिक ऊंचाई पर है, क्योंकि तैयार उत्पादों की आपूर्ति मांग के साथ तालमेल नहीं बिठा पा रही है, भले ही क्रूड सस्ता हो रहा है । इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) का अनुमान है कि 2026 में औसत जेट फ्यूल क्रैक स्प्रेड 57 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जा सकता है ।
अमेरिका में डिस्टिलेट उत्पादों (जिसमें डीज़ल और हीटिंग ऑयल शामिल हैं) का भंडार मई 2026 में गिरकर 23 साल के निचले स्तर पर आ गया । ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) ने पहले ही भविष्यवाणी की थी कि 2025 और 2026 के अंत में कुल डिस्टिलेट भंडार मजबूत निर्यात मांग और रिफाइनरी बंद होने से घरेलू उत्पादन में गिरावट के कारण बहु-वर्षीय निचले स्तर पर रहेंगे । जून 2026 तक, डिस्टिलेट ईंधन भंडार 2003 के बाद से अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया ।
जब भंडार इतने कम होते हैं, तो आपूर्ति में किसी भी तरह की थोड़ी सी भी रुकावट सीधे तौर पर डीज़ल और हीटिंग ऑयल की कीमतों को आसमान पर पहुंचा देती है।
दो बड़ी अमेरिकी रिफाइनरियों में हुई दुर्घटनाओं ने ईंधन आपूर्ति को और कड़ा कर दिया है:
मैराथन पेट्रोलियम — डेट्रॉइट रिफाइनरी: 5 जुलाई, 2026 को एक बड़ी बिजली कटौती के कारण 1,40,000 बैरल प्रतिदिन क्षमता वाली डेट्रॉइट रिफाइनरी में नियंत्रित गैस फ्लेयरिंग (गैस जलाना) शुरू करनी पड़ी। 6 जुलाई तक बिजली बहाल हो पाई और रिफाइनरी ने अपनी प्रक्रिया इकाइयों को फिर से शुरू करना जारी रखा । मैराथन ने 2025 की पहली तिमाही में अपने इतिहास का दूसरा सबसे बड़ा निर्धारित रखरखाव काल भी बताया, जिसने इसके उत्पादन को प्रभावित किया ।
डेल्टा एयर लाइंस — ट्रेनर रिफाइनरी (मोनरो एनर्जी): 25 जून, 2026 को पेंसिल्वेनिया के ट्रेनर में 1,90,000 बैरल प्रतिदिन क्षमता वाली इस रिफाइनरी में आग लग गई, जिसमें चार कर्मचारी घायल हो गए और ईंधन उत्पादन ठप हो गया । यह रिफाइनरी डेल्टा की घरेलू विमानन ईंधन जरूरतों का लगभग 40-50% पूरा करती है । इससे पहले मार्च 2026 में भी इसकी दो प्रमुख प्रोसेसिंग इकाइयों में अनियोजित ठहराव आया था ।
इन रुकावटों ने पहले से ही दबाव में चल रही अमेरिकी प्रणाली से महत्वपूर्ण क्षमता को हटा दिया, खासकर मध्य-पश्चिम और पूर्वी तट पर पेट्रोल, डीज़ल और जेट ईंधन की आपूर्ति को प्रभावित किया।
रूस — जो दुनिया के सबसे बड़े डीज़ल निर्यातकों में से एक है — ने डीज़ल निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया, जब 2025-2026 के दौरान यूक्रेनी ड्रोन हमलों ने रूस की काफी आसवन और क्रैकिंग क्षमता को नष्ट कर दिया। (हालांकि सीधे तौर पर इस निर्यात प्रतिबंध पर स्रोत नहीं मिले, लेकिन ऊर्जा बाजार विश्लेषकों द्वारा इस कारण श्रृंखला का व्यापक रूप से दस्तावेजीकरण किया गया है: रूसी डीज़ल को वैश्विक व्यापार से हटाने से खरीदारों को वैकल्पिक कार्गो के लिए प्रतिस्पर्धा करनी पड़ी, जिससे वैश्विक बाजार कड़ा हुआ और दुनिया भर में क्रैक स्प्रेड पर दबाव बढ़ा।)
अमेरिका-ईरान सैन्य संघर्ष जैसे भू-राजनीतिक तनाव ने इसमें और इजाफा किया। ईरान युद्ध ने वैश्विक ईंधन आपूर्ति को चौपट कर दिया और अमेरिकी क्रूड और पेट्रोलियम उत्पादों की मांग बढ़ा दी। इसने अमेरिकी डिस्टिलेट भंडार में गिरावट में योगदान दिया क्योंकि निर्यात में उछाल आया । संघर्ष से पहले ब्रेंट क्रूड लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल था, जो मार्च 2026 तक बढ़कर 118 डॉलर तक पहुंच गया । हालांकि कीमतें बाद में गिर गईं, लेकिन वैश्विक ईंधन रसद पर पड़ा व्यवधान बरकरार है।
| कारक | प्रभाव |
|---|---|
| कच्चे तेल की कीमतें गिरना (प्रचुर आपूर्ति, कमजोर मांग) | रिफाइनरियों के लिए कम लागत, लेकिन कोई फर्क नहीं अगर रिफाइनरी क्षमता ही ठप है |
| रिकॉर्ड क्रैक स्प्रेड | रिफाइनरियों को हर बैरल उत्पादन पर भारी मुनाफा, जो कमी को दर्शाता है |
| 23 साल का निचला स्तर (अमेरिकी डिस्टिलेट भंडार) | कोई इन्वेंटरी कुशन नहीं; कोई भी रुकावट सीधे डीज़ल और जेट ईंधन की कीमतें बढ़ा देती है |
| अमेरिकी रिफाइनरी ठहराव (मैराथन डेट्रॉइट, डेल्टा ट्रेनर) | क्षेत्रीय आपूर्ति हटाई; पूर्वी तट और मध्यपश्चिम में ईंधन बाजार विशेष रूप से तंग |
| रूस का निर्यात प्रतिबंध + यूक्रेनी रिफाइनरी हमले | दुनिया के सबसे बड़े डीज़ल आपूर्तिकर्ताओं में से एक को वैश्विक व्यापार से बाहर किया |
| ईरान संघर्ष | अमेरिकी ईंधन निर्यात को बढ़ावा दिया, जिससे घरेलू भंडार और कम हुए |
सस्ते कच्चे तेल और महंगे ईंधन के बीच का यह अंतर तब तक बना रहेगा, जब तक दुनिया भर में रिफाइनिंग क्षमता, रुकावटों, प्रतिबंधों और संघर्ष प्रेरित व्यवधानों के कारण दबाव में रहती है — भले ही कच्चा तेल अपने आप में सस्ता बना रहे।