शोधकर्ताओं ने AAV5 कैप्सिड्स (एक प्रकार का वायरल वेक्टर) को सीधे सिस्टर्ना मैग्ना (cisterna magna) में इंजेक्ट किया, जो दिमाग के आधार पर स्थित एक तरल कम्पार्टमेंट है। इसके साथ ही, उन्होंने सिस्टमिक हाइपरटोनिसिटी (systemic hypertonicity) उत्पन्न की, जिससे मस्तिष्कमेरु द्रव (CSF) और वायरल वेक्टर्स ग्लिम्फैटिक नेटवर्क में प्रवेश कर जाते हैं। यह तकनीक वेक्टर्स को पूरे दिमाग में फैलने देती है, जबकि लिवर जैसे बाहरी अंगों पर इसका असर कम से कम होता है।
मानव ग्लियल काइमेरिक चूहों में इन विवो कैप्सिड सिलेक्शन (In vivo capsid selection): AAV5 वेक्टर्स की एक लाइब्रेरी को उन चूहों में जांचा गया जिनमें मानव ग्लियल प्रोजेनिटर कोशिकाएं (hGPCs) लगाई गई थीं। पीसीआर-आधारित ट्रैकिंग के जरिए उन वेरिएंट्स की पहचान की गई जो मानव GPCs, एस्ट्रोसाइट्स और ओलिगोडेंड्रोसाइट्स को सबसे ज्यादा प्रभावित करते हैं।
हाइपरटोनिक उपचार के साथ ग्लिम्फैटिक डिलीवरी (Glymphatic delivery): इंट्रासिस्टर्नल डिलीवरी और सिस्टमिक हाइपरटोनिसिटी का यह संयोजन ग्लिम्फैटिक सिस्टम के तरल प्रवाह का फायदा उठाकर वेक्टर्स को पूरे दिमाग में फैला देता है, बिना BBB को पार किए।
ये दोनों तरीके लंबे समय से चली आ रही दो बड़ी बाधाओं को एक साथ हल करते हैं: BBB को पार करना और ग्लियल कोशिकाओं (न्यूरॉन नहीं) को चुनिंदा रूप से लक्षित करना।
यह प्लेटफॉर्म उन बीमारियों के लिए बनाया गया है जिनमें ग्लियल कोशिकाओं की शिथिलता और व्हाइट मैटर की हानि शामिल है।
हालांकि यह एक बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि है, लेकिन इसे मरीजों तक पहुंचाने से पहले कई बाधाओं को पार करना होगा। URMC की खबर और प्रकाशित प्रीप्रिंट में इन बाधाओं की विस्तृत सूची नहीं दी गई है, लेकिन AAV जीन थेरेपी की सामान्य चुनौतियों को देखते हुए ये स्पष्ट हैं:
निष्कर्ष: यह एक महत्वपूर्ण प्रीक्लिनिकल प्रगति है, लेकिन अभी इसने मानव परीक्षणों में प्रवेश नहीं किया है।