1. केविन वार्श का फेड अध्यक्ष बनना — राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा केविन वार्श (Kevin Warsh) को फेडरल रिजर्व (Fed) के नए प्रमुख के रूप में चुनने की खबर ने जनवरी के अंत में सबसे पहले बड़ी बिकवाली शुरू कर दी। वार्श को एक सख्त (Hawkish) नीति वाला माना जाता है, जिससे बाजार ने तुरंत कड़ी मौद्रिक नीति की कीमत तय कर ली और सोने से अरबों डॉलर का पैसा निकल गया ।
2. मजबूत अमेरिकी डॉलर — मार्च से डॉलर में तेजी आई क्योंकि फेड ने ब्याज दरों को स्थिर रखा। चूंकि सोने की कीमत डॉलर में तय होती है, एक मजबूत डॉलर इसे विदेशी खरीदारों के लिए महंगा बना देता है और सीधे तौर पर इस पर दबाव डालता है ।
3. फेड का सख्त रुख — जून 2026 की फेड बैठक (FOMC) के बाद बाजार ने ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें छोड़ दीं। लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरों (Higher-for-Longer) ने सोने (जिस पर कोई ब्याज नहीं मिलता) को पकड़े रहने की लागत बढ़ा दी, जिससे निवेशक ब्याज देने वाली संपत्तियों (Yield-Bearing Assets) की ओर भागे ।
4. मुनाफावसूली और रुझान का उलटना — 2025 के अंत में खरीदारी करने वाले रिटेल निवेशकों और मोमेंटम-आधारित ETF निवेशकों ने बाहर निकलने की होड़ लगा दी। जेपी मॉर्गन के अनुसार, ग्राहकों की सोने में दिलचस्पी 'सूख गई' ।
5. बिटकॉइन से प्रतिस्पर्धा — बिटकॉइन का $80,000 से ऊपर चढ़ना उन सट्टा निवेशकों को आकर्षित कर गया जो पहले सोने का रुख कर रहे थे, जिससे सोने की मांग और कमजोर पड़ी ।
6. केंद्रीय बैंकों की खरीदारी में ठंडक — वह खरीदारी जो सोने की तेजी की मुख्य रीढ़ थी, धीमी पड़ने लगी। इससे एक अहम संरचनात्मक सहारा हट गया जो आपूर्ति को सोख रहा था ।
7. अमेरिका-ईरान संघर्ष ने डॉलर को मजबूत किया — होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के गतिरोध से पैदा हुआ भू-राजनीतिक तेल का झटका, जैसा कि आमतौर पर होता है, सोने के लिए सुरक्षित निवेश (Safe-Haven) का मौका नहीं बना। इसके विपरीत, इसने डॉलर को और मजबूत किया, जो सोने के सामान्य सिद्धांत के बिल्कुल उलट था और कई तेजड़ियों (Bulls) को चौंका दिया ।
| मीट्रिक | विवरण |
|---|---|
| स्पॉट गोल्ड कीमत | ~$3,990–$4,000/औंस |
| शिखर से गिरावट | $5,589 से लगभग 29% |
| जून 2026 में नुकसान | 6–8% |
| तकनीकी संकेत | 'डेथ क्रॉस' (50-दिवसीय मूविंग एवरेज 200-दिवसीय मूविंग एवरेज से नीचे आ गया); 250-दिवसीय MA टूटा |
| Q2 2026 | सोने के लिए वर्षों में सबसे खराब तिमाही |
| संभावित समेकन | अधिकांश तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार $4,000–$4,500 |
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (World Gold Council) ने आगाह किया है कि अगर कीमतों का यह समेकन (Consolidation) जारी रहता है, तो सोना 2026 के अंत तक $3,500/औंस तक गिर सकता है ।
अधिकांश बड़े बैंकों ने अपने एक बार के बुलिश लक्ष्यों को काफी कम कर दिया है। 2026 के अंत के लिए आम सहमति (Consensus) लगभग $4,800–$6,300/औंस है, जो मौजूदा स्तरों से सुधार का संकेत देता है, लेकिन कुछ ही जनवरी के शिखर पर तेजी से वापसी की उम्मीद करते हैं ।
बियर मार्केट के बावजूद, कई प्रमुख विश्लेषकों का तर्क है कि संरचनात्मक तेजी वाला मामला (Structural Bull Case) बरकरार है:
1. 'बेस कैंप' ठहराव, अंत नहीं (रोनी स्टॉफ़रले, इंक्रीमेंटम एजी) — स्टॉफ़रले मौजूदा गिरावट को एक 'बेस कैंप' ठहराव कहते हैं, जो एक धर्मनिरपेक्ष (Secular), रीमॉनेटाइज़ेशन-आधारित तेजी बाजार में अगली ऊपरी चाल से पहले का है। उनका तर्क है कि मूलभूत चालक — डी-डॉलराइजेशन, केंद्रीय बैंकों का रिजर्व विविधीकरण, और राजकोषीय घाटे — नहीं बदले हैं ।
2. डी-डॉलराइजेशन और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी (जेपी मॉर्गन, वैनएक) — जेपी मॉर्गन और वैनएक इस बात पर जोर देते हैं कि केंद्रीय बैंकों की सोने की खरीद, भले ही धीमी हुई हो, संरचनात्मक रूप से ऊंची बनी हुई है। उभरते बाजारों के केंद्रीय बैंकों द्वारा डॉलर रिजर्व से दूर जाना एक बहु-वर्षीय प्रवृत्ति है जो फेड की नीति से स्वतंत्र रूप से सोने का समर्थन करती रहेगी ।
3. अमेरिकी राजकोषीय घाटा और कर्ज मुद्रीकरण — कई विश्लेषकों का तर्क है कि अमेरिकी राजकोषीय घाटे का रास्ता अस्थिर बना हुआ है, जो अंततः मौद्रिक राहत (Monetary Accommodation) के लिए मजबूर करता है। यह फेड की अल्पकालिक सख्ती के बावजूद, सोने के लिए एक शक्तिशाली दीर्घकालिक उत्प्रेरक है ।
4. यूबीएस: 'एक अपट्रेंड के भीतर सामान्य अस्थिरता' — यूबीएस के रणनीतिकारों ने इस बिकवाली को एक सामान्य तेजी बाजार की अस्थिरता बताया, न कि कोई संरचनात्मक ब्रेक। उन्होंने शिखर के बाद भी अपने 2026 के लक्ष्य बढ़ा दिए, यह तर्क देते हुए कि भू-राजनीतिक अनिश्चितता और रिजर्व विविधीकरण अभी भी मांग को रेखांकित करते हैं ।
5. $10,000 के दीर्घकालिक पूर्वानुमान (CNBC के अनुसार) — मार्च 2026 में CNBC द्वारा उद्धृत कुछ अनुभवी सोने के विश्लेषकों ने अब भी $10,000/औंस के दीर्घकालिक लक्ष्य बनाए रखे हैं। उनका तर्क है कि वर्तमान बियर मार्केट वैश्विक मौद्रिक प्रणाली के पुनर्गठन द्वारा संचालित बहु-दशकीय तेजी चक्र में एक सुधार मात्र है ।
6. सिटी का 'संरचनात्मक समेकन' सिद्धांत — सिटी के विश्लेषकों ने सोने को 'संरचनात्मक समेकन' में बताया, न कि किसी अंतिम गिरावट में। उन्हें उम्मीद है कि एक बार फेड की नीति की दिशा स्पष्ट होने और भू-राजनीतिक जोखिम कम होने पर यह धातु फिर से गति पकड़ लेगी ।
सोने का तीन साल का तेजी बाजार तब खत्म हुआ जब एक सख्त फेड, एक मजबूत डॉलर और कमजोर होती केंद्रीय बैंक मांग एक साथ आ गए। यह धातु अब बियर मार्केट में है और तकनीकी संकेत और गिरावट की ओर इशारा कर रहे हैं। हालांकि बड़े बैंकों की आम सहमति 2026 के अंत तक $4,800–$6,300 तक रिकवरी की उम्मीद करती है, लेकिन सबसे सतर्क संस्थान, जैसे डॉयचे बैंक और मैक्वेरी, निकट भविष्य में बहुत अधिक तेजी नहीं देखते हैं। दीर्घकालिक तेजड़ियों को भरोसा है कि डी-डॉलराइजेशन और राजकोषीय दबाव के संरचनात्मक चालक अंततः फिर से सक्रिय हो जाएंगे, लेकिन फिलहाल, व्यापक आर्थिक हवाएं (Macro Winds) सोने के खिलाफ हैं।