पैराग्वे की सीनेटर सेलेस्टे अमरिला ने फ्रांस से हार के बाद किलियन एमबाप्पे पर सोशल मीडिया पर जातिवादी टिप्पणी की, उन्हें 'उपनिवेशित कैमरूनी' बताया और 'नारियल चूसने' जैसी बातें कहीं। एमबाप्पे ने उन्हें 'घृणित महिला' और 'अपने पद के लायक नहीं' कहकर जवाब दिया, जिसके बाद फीफा, फ्रांस के राष्ट्रपति और फ्रेंच फुटबॉल फेडरेश...

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फीफा वर्ल्ड कप 2026 में नस्लवाद का एक बड़ा विवाद सामने आया है, जब पैराग्वे की सीनेटर सेलेस्टे अमरिला ने फ्रांस के कप्तान किलियन एमबाप्पे के खिलाफ सोशल मीडिया पर सीधे तौर पर नस्लीय टिप्पणियां कीं। यह घटना उस मैच के दो दिन बाद हुई जब एमबाप्पे ने पेनल्टी शूटआउट में निर्णायक गोल करके पैराग्वे को प्री-क्वार्टर फाइनल से बाहर कर दिया था। इस घटना ने फीफा से लेकर फ्रांस की राजनीति तक, हर स्तर पर आक्रोश पैदा कर दिया है
।
4 जुलाई, 2026 को फिलाडेल्फिया में खेले गए राउंड ऑफ 16 मैच में फ्रांस ने पैराग्वे को पेनल्टी पर 1-0 से हराया था। यह मैच पैराग्वे की बेहद आक्रामक खेल शैली के लिए जाना जाएगा। बीबीसी के विशेषज्ञों और फ्रांस के कोच डिडिएर देस्चैम्प्स ने पैराग्वे की 'बदनाम' रणनीति की निंदा की थी
। मैच के बाद, एमबाप्पे ने पलटवार करते हुए कहा था, "उन्होंने शायद सोचा था कि हम सिर्फ टक्सीडो पहनते हैं और फैंसी फुटबॉल खेलते हैं, लेकिन हम गंदा खेल भी खेलना जानते हैं"
।
सोमवार, 6 जुलाई को पैराग्वे की सीनेटर सेलेस्टे अमरिला (61 वर्ष) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एमबाप्पे के लिए एक जातिवादी संदेश पोस्ट किया। उनकी पोस्ट में ये बातें शामिल थीं
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एमबाप्पे ने आपत्तिजनक पोस्टों का तुरंत जवाब दिया। उन्होंने 6 जुलाई को एक्स पर पोस्ट करके सेलेस्टे अमरिला को 'घृणित महिला' और 'अपने पद के लायक नहीं' बताया
। उन्होंने फ्रेंच में लिखा, "अपनी अज्ञानता और मध्यमता से आप पूरे देश का अपमान करती हैं। आप घृणित महिला हैं, अपने कार्यालय के लिए अयोग्य हैं"
। एमबाप्पे ने पैराग्वे की टीम और जनता की प्रशंसा करते हुए उन्हें सीनेटर के विचारों से अलग किया
।
इस घटना की कड़ी निंदा हुई और यह फुटबॉल से आगे राजनीतिक स्तर पर भी पहुंच गई
:
7 जुलाई को पेरिस अभियोजक कार्यालय ने पुष्टि की कि उसने सीनेटर अमरिला के खिलाफ 'बढ़े हुए सार्वजनिक अपमान और हिंसा के लिए उकसाने' के आरोप में औपचारिक जांच शुरू कर दी है
। यह जांच फ्रेंच फुटबॉल फेडरेशन की शिकायत पर शुरू हुई
। फ्रांसीसी कानून के तहत, विदेश में रहने वाला व्यक्ति भी फ्रांसीसी नागरिकों के खिलाफ ऑनलाइन नफरत फैलाने के आरोप में मुकदमा चला सकता है
।
भारी आलोचना का सामना करते हुए, सेलेस्टे अमरिला ने अपने पोस्ट हटा दिए, लेकिन इसके बाद उन्होंने स्थिति को और उलझा दिया। उन्होंने
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यह विवाद वर्ल्ड कप की सुर्खियों में छा गया। फ्रांसीसी और अंतर्राष्ट्रीय मीडिया एमबाप्पे की सफलता या फ्रांस के अगले मुकाबले की बजाय इस घटना पर ज्यादा ध्यान दे रही थी
। यह फ्रांसीसी खेमे के लिए एक बड़ा ध्यान भटकाने वाला मामला बन गया
। यह विवाद नस्लवाद, राजनीति और लैंगिकता के चौराहे पर खड़ा है, जिसे हाल के वर्ल्ड कप इतिहास में सबसे चर्चित नस्लवाद विवादों में से एक माना जा रहा है
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पैराग्वे की सीनेटर सेलेस्टे अमरिला ने फ्रांस से हार के बाद किलियन एमबाप्पे पर सोशल मीडिया पर जातिवादी टिप्पणी की, उन्हें 'उपनिवेशित कैमरूनी' बताया और 'नारियल चूसने' जैसी बातें कहीं।
पैराग्वे की सीनेटर सेलेस्टे अमरिला ने फ्रांस से हार के बाद किलियन एमबाप्पे पर सोशल मीडिया पर जातिवादी टिप्पणी की, उन्हें 'उपनिवेशित कैमरूनी' बताया और 'नारियल चूसने' जैसी बातें कहीं। एमबाप्पे ने उन्हें 'घृणित महिला' और 'अपने पद के लायक नहीं' कहकर जवाब दिया, जिसके बाद फीफा, फ्रांस के राष्ट्रपति और फ्रेंच फुटबॉल फेडरेशन ने उनका समर्थन किया।
पेरिस के अभियोजकों ने 7 जुलाई को सीनेटर अमरिला के खिलाफ 'बढ़े हुए सार्वजनिक अपमान और नफरत फैलाने' के आरोप में औपचारिक जांच शुरू कर दी है।