डॉ. अबू सफिया को इज़राइल के 'अवैध लड़ाकू कानून' (Unlawful Combatants Law) के तहत हिरासत में रखा गया है। यह कानून 2002 में बनाया गया था और इसके तहत बिना किसी आरोप या मुकदमे के अनिश्चितकाल तक हिरासत में रखने की अनुमति है। इस कानून के तहत, बंदियों को अपने खिलाफ सबूत देखने का अधिकार नहीं है, और एक अदालत उनकी हिरासत के आदेश को अनिश्चित काल तक बढ़ा सकती है।
डॉ. अबू सफिया के खिलाफ कोई आपराधिक आरोप पत्र (इंडिक्टमेंट) दायर नहीं किया गया है और न ही कोई मुकदमे की तारीख तय की गई है।
16 जून 2026 को, इज़राइल के सुप्रीम कोर्ट ने डॉ. अबू सफिया की हिरासत के खिलाफ उनकी अपील को खारिज कर दिया। अदालत ने 'अवैध लड़ाकू कानून' के तहत उनकी निरंतर हिरासत को बरकरार रखा। कोर्ट ने अपने फैसले का आधार तथाकथित 'गोपनीय सामग्री' और 'गुप्त सामग्री' को बनाया, जो डॉ. अबू सफिया या उनकी कानूनी टीम को उपलब्ध नहीं कराई गई।
फैसले में उन्हें कम से कम अक्टूबर 2026 तक हिरासत में रखने का आदेश दिया गया है।
फिजीशियन्स फॉर ह्यूमन राइट्स इज़राइल और एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसे मानवाधिकार संगठनों ने इस फैसले को 'गहरी नैतिक और कानूनी विफलता' बताया है।
डॉ. अबू सफिया की सेहत में तेजी से गिरावट आई है। उनके बेटे, जो खुद एक डॉक्टर हैं, ने 5 जुलाई 2026 को एक वीडियो जारी कर कहा कि उनके पिता पर गंभीर शारीरिक अत्याचार के निशान हैं। उनके वकील, नासिर ओदेह ने बताया है कि डॉ. अबू सफिया बहुत अधिक कमजोर हो गए हैं, उनकी हालत गंभीर बनी हुई है, और उनकी बाईं जांघ में धंसे छर्रे (गोली या बम के टुकड़े) को निकालने के लिए सर्जरी नहीं हो पाई है, जो हिरासत में लिए जाने से पहले लगी थी।
जेल से रिहा हुए बंदियों और वकीलों के अनुसार, उनका वजन काफी कम हो गया है और वे मौत के करीब हैं।
एकांत कारावास: 3 जून 2026 को, डॉ. अबू सफिया को नफ़्हा जेल (एक अधिकतम सुरक्षा वाली जेल) के एकांत कारावास में स्थानांतरित कर दिया गया। यह अलगाव अब संयुक्त राष्ट्र के नेल्सन मंडेला नियमों में निर्धारित लगातार 15 दिनों की सीमा से अधिक हो चुका है।
उनके वकील ने इस स्थानांतरण को सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करने की सजा बताया है।
डॉ. अबू सफिया के वकील और मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि हिरासत में उनके साथ गंभीर शारीरिक और मानसिक दुर्व्यवहार किया गया:
इज़राइल का जवाब: इज़राइल जेल सेवा ने इन आरोपों को 'झूठा और पूरी तरह से तथ्यहीन' बताकर खारिज कर दिया है और कहा है कि वह 'दुर्व्यवहार, भुखमरी या चिकित्सा देखभाल से वंचित करने के आरोपों को खारिज करती है', हालांकि इसने कोई स्वतंत्र सत्यापन उपलब्ध नहीं कराया है।
इज़राइली अधिकारियों, जिसमें इज़राइल रक्षा बल (IDF) शामिल है, का दावा है कि डॉ. अबू सफिया 'हमास से जुड़े' हैं और उन्हें 'आतंकवादी गतिविधियों में संदिग्ध भागीदारी' के लिए गिरफ्तार किया गया था। इज़राइली समाचार आउटलेट जेएनएस ने उन्हें 'एक हमास आतंकवादी जो गाजा के कमाल अदवान अस्पताल चलाता था' कहकर संबोधित किया।
महत्वपूर्ण बिंदु:
यह मामले का केंद्रीय विवादित तथ्य बना हुआ है: इज़राइली अधिकारी संबद्धता का दावा करते हैं लेकिन सबूत जारी नहीं करते; मानवाधिकार संगठन और उनकी कानूनी टीम इससे इनकार करते हैं और किसी भी आरोप या अभियोग की अनुपस्थिति की ओर इशारा करते हैं।
डॉ. अबू सफिया कोई अकेला मामला नहीं है। फिजीशियन्स फॉर ह्यूमन राइट्स इज़राइल (PHRI) ने इज़राइल के सुप्रीम कोर्ट में गाजा के कम से कम 14 फिलिस्तीनी डॉक्टरों को रिहा करने की याचिका दायर की है, जिन्हें 'अवैध लड़ाकू कानून' के तहत बिना किसी आरोप के हिरासत में रखा गया है। ले मोंडे की रिपोर्ट के अनुसार, 7 अक्टूबर 2023 के बाद से गाजा के 17 डॉक्टरों और कुल 58 स्वास्थ्य कर्मियों को गिरफ्तार किया गया है।
PHRI और अन्य अधिकार समूह इन हिरासतों को फिलिस्तीनी स्वास्थ्य कर्मियों को 'व्यवस्थित रूप से निशाना बनाने' का हिस्सा बताते हैं। उनका आरोप है कि डॉक्टरों को पर्याप्त चिकित्सा देखभाल, भोजन से वंचित रखा जा रहा है और पूछताछ के दौरान उनके साथ शारीरिक दुर्व्यवहार किया जाता है। अनुमान है कि गाजा के 1,000 से अधिक फिलिस्तीनी उसी कानून के तहत बिना आरोप के इज़राइली हिरासत में हैं।
इस व्यापक संदर्भ में अल-शिफा अस्पताल के आर्थोपेडिक्स प्रमुख डॉ. अदनान अल-बुर्श की अप्रैल 2024 में इज़राइली हिरासत में मौत भी शामिल है, जिसे मानवाधिकार संगठन हिरासत में लिए गए चिकित्सा कर्मियों के लिए जानलेवा जोखिम के सबूत के रूप में पेश करते हैं।