TRM Labs, Elliptic और Chainalysis जैसी फोरेंसिक जांच एजेंसियों ने इस हमले को उत्तर कोरिया से जुड़े हैकर ग्रुप UNC4736 (जिसे AppleJeus, Citrine Sleet या Lazarus Group के नाम से भी जाना जाता है) से जोड़ा है ।
हमलावरों ने इस हमले के लिए महीनों तक ज़मीन तैयार की। यह पूरी तरह से लोगों और प्रक्रियाओं में हेरफेर करने की रणनीति थी, न कि कोड में बग ढूंढने की।
1. नकली टोकन का निर्माण: हमलावरों ने CarbonVote Token (CVT) नाम का एक बिल्कुल बेकार टोकन बनाया, जिसकी शुरुआती सप्लाई 750 मिलियन टोकन थी ।
2. कीमत में हेरफेर: उन्होंने Raydium पर सिर्फ $500 का एक छोटा लिक्विडिटी पूल बनाया और फिर CVT को आपस में बार-बार खरीद-बेचकर (wash trading) इसकी कीमत को कृत्रिम रूप से लगभग $1 तक पहुंचा दिया। Drift के ओरेकल्स (मूल्य निर्धारण के लिए इस्तेमाल होने वाले सिस्टम) ने इस गतिविधि को देखकर CVT को एक वैध कोलैटरल के रूप में स्वीकार कर लिया ।
3. सोशल इंजीनियरिंग अभियान: मुख्य हमला तकनीकी नहीं, बल्कि मानवीय कमजोरी पर आधारित था। हैकर्स ने खुद को एक प्रतिष्ठित क्वांटिटेटिव ट्रेडिंग फर्म के प्रतिनिधि के रूप में पेश किया और कई महीनों तक Drift की टीम के मल्टीसिग साइनर्स (वे लोग जो बड़े लेन-देन को मंजूरी देते हैं) के साथ कॉन्फ्रेंस और बैठकों के ज़रिए भरोसा बनाया ।
4. पहले से साइन किए गए ट्रांजैक्शन का जाल: जब भरोसा बन गया, तो हैकर्स ने Drift के मल्टीसिग साइनर्स को कुछ लेन-देन पहले से मंज़ूर करवा लिए। ये लेन-देन दिखने में सामान्य थे, लेकिन असल में वे Drift के सिक्योरिटी काउंसिल पर पूर्ण प्रशासनिक नियंत्रण (एडमिन टेकओवर) की अनुमति दे रहे थे ।
5. 'ड्यूरेबल नॉन्स' का शोषण: Solana ब्लॉकचेन की एक विशेषता, जिसे 'ड्यूरेबल नॉन्स' (durable nonces) कहते हैं, का उपयोग करके हैकर बिना किसी टाइमलॉक के पूर्ण एडमिन नियंत्रण लेने में सफल रहा। इसने प्रोटोकॉल की आखिरी सुरक्षा को भी तोड़ दिया ।
6. फंड्स की निकासी: एक बार नियंत्रण पाने के बाद, हैकर ने बेकार CVT को वैध कोलैटरल के रूप में सूचीबद्ध किया, निकासी की सीमाएं हटा दीं, और एक के बाद एक कुल 31 तेजी से निकासी करके असली यूज़र एसेट्स (ETH, USDC, SOL, रैप्ड BTC) खाली कर लिए। इस प्रक्रिया में 12 मिनट से भी कम समय लगा ।
TRM Labs ने इस हमले के मूल कारण को 'मल्टीसिग साइनर्स को छिपे हुए अधिकारों के लिए पूर्व-हस्ताक्षर करने के लिए राजी करना और एक शून्य-टाइमलॉक सिक्योरिटी काउंसिल माइग्रेशन जिसने प्रोटोकॉल की अंतिम सुरक्षा को खत्म कर दिया' बताया । Drift टीम ने स्पष्ट किया कि यह एक कोड बग नहीं, बल्कि एक ऑपरेशनल सिक्योरिटी फेलियर था ।
हमले के तुरंत बाद Drift ने कई कदम उठाए।
जून 2026 में, Drift ने एक व्यापक रीब्रांडिंग की घोषणा की। यह कोई 'वेलोसिटी DEX' जैसा नाम नहीं था, बल्कि Drift ने खुद को एक समर्पित Solana-आधारित Perpetual Futures एक्सचेंज (Solana Perp DEX) के रूप में पुनः लॉन्च किया, जो पूरी तरह से USDT-आधारित perpetual swap ट्रेडिंग पर केंद्रित है ।
रीब्रांड के मुख्य बिंदु:
Drift हैक 2026 का सबसे बड़ा DeFi एक्सप्लॉइट और Solana के इतिहास में दूसरा सबसे बड़ा हैक था । इस हमले ने गवर्नेंस सिस्टम और मल्टीसिग ऑपरेशंस की मानवीय कमजोरियों को उजागर किया, जिसे कोई भी स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट ऑडिट नहीं रोक सकता था।
Drift का रीब्रांड एक तरह से यह स्वीकारोक्ति है कि पिछले मल्टी-प्रोडक्ट दृष्टिकोण ने बहुत अधिक जोखिम पैदा किया। अब एक सीमित, उच्च-सुरक्षा वाले प्लेटफॉर्म पर ध्यान केंद्रित करके, Tether की मदद से रिकवरी फंड और अनुभवी सुरक्षा नेतृत्व के साथ, Drift यूज़र्स का विश्वास फिर से जीतना चाहता है। पूरे Solana इकोसिस्टम के लिए यह घटना एक सबक है कि मजबूत साइनर वेरिफिकेशन, व्यवहारिक निगरानी और पूर्व-हस्ताक्षरित लेन-देन के जोखिमों को खत्म करना कितना महत्वपूर्ण है ।