नई ट्रांसड्यूरल तकनीक: नए डिज़ाइन किए गए R1 सर्जिकल रोबोट में Neuralink के अल्ट्रा-पतले, लचीले इलेक्ट्रोड थ्रेड्स को सीधे ड्यूरा मेटर के ज़रिए दिमाग के कॉर्टेक्स में धकेला जाता है, जिससे सुरक्षात्मक झिल्ली पूरी तरह बरकरार रहती है । यह रोबोट लेज़र-कट सुइयों (Laser-cut needles) का उपयोग करता है, जो इंसान के बाल से भी पतली होती हैं और कंपनी में ही लेज़र एब्लेशन (laser ablation) तकनीक से बनाई जाती हैं
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रोबोट की क्षमताएं: नई पीढ़ी का R1 रोबोट हर 1.5 सेकंड में एक इलेक्ट्रोड थ्रेड डाल सकता है, और इसकी इंसर्शन डेप्थ 50 मिमी से अधिक तक जा सकती है — जो दिमाग के लगभग किसी भी हिस्से तक पहुंचने के लिए काफी है । 7 मई 2026 को Neuralink ने घोषणा की कि उनका रोबोट अब पार्किंसंस, मिर्गी और डिप्रेशन जैसी बीमारियों से जुड़े दिमागी क्षेत्रों में भी इलेक्ट्रोड लगा सकता है
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दिमाग पर कम चोट: ड्यूरा को बरकरार रखने से दिमाग की मुख्य सुरक्षा कवच को भेदने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे संक्रमण, सूजन और ब्रेन फ्लूइड (CSF) लीक का खतरा कम हो जाता है । Neuralink का कहना है कि इसका मतलब है "एक सुरक्षित और अधिक दोहराई जा सकने वाली सर्जरी"
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तेज रिकवरी: कम नुकसान पहुंचाने वाली यह प्रक्रिया (minimally invasive) अस्पताल में कम समय तक रहने और पोस्ट-सर्जिकल हीलिंग तेज करने में मदद करेगी ।
पिछली विफलता का समाधान: Neuralink के पहले ह्यूमन इम्प्लांट के कुछ हफ्तों बाद, कुछ इलेक्ट्रोड थ्रेड्स दिमाग से पीछे हट गए (retract) थे — इसकी वजह संभवतः ड्यूरा को काटने और ठीक से सील न करने के बाद उस पर पड़ने वाला दबाव था । बरकरार ड्यूरा के माध्यम से थ्रेड डालने से वे यांत्रिक रूप से स्थिर हो जाते हैं और पीछे हटने की समस्या से बचा जा सकता है
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बड़े पैमाने पर उत्पादन की तैयारी: एलन मस्क ने दिसंबर 2025 में कहा था कि Neuralink 2026 में "हाई-वॉल्यूम प्रोडक्शन" शुरू करेगा और सर्जरी लगभग पूरी तरह से ऑटोमेटेड होगी। ट्रांसड्यूरल थ्रेडिंग इस योजना की मुख्य कुंजी है । मार्च 2026 तक कंपनी ने अपने PRIME क्लिनिकल ट्रायल में 7 प्रतिभागियों तक विस्तार कर लिया है
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सिर्फ मोटर रिस्टोरेशन नहीं: रोबोट अब दिमाग के किसी भी हिस्से तक पहुंच सकता है, इसलिए Neuralink का अब स्पीच कॉर्टेक्स (लॉक-इन पेशेंट्स के लिए संचार), पार्किंसंस, मिर्गी और डिप्रेशन जैसे क्षेत्रों पर भी फोकस है ।
पूरी तरह ऑटोमेटेड सर्जरी का रास्ता: ट्रांसड्यूरल इंसर्शन सबसे मुश्किल मैन्युअल स्टेप था। रोबोट का माइक्रॉन सटीकता से ड्यूरा को पार कर पाना, पूरी तरह से ऑटोमेटेड सर्जिकल प्रक्रिया में सबसे बड़ी बाधा को दूर करता है ।
1 जुलाई 2026 की यह घोषणा Neuralink के LinkedIn पोस्ट और मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए आई है, अभी यह किसी पीयर-रिव्यू जर्नल या FDA फाइलिंग में प्रकाशित नहीं हुई है । सुरक्षा और प्रभावकारिता के आंकड़ों की स्वतंत्र जांच बाकी है।
यह भी ध्यान रखना होगा कि ड्यूरा के जरिए इलेक्ट्रोड डालना न्यूरोसर्जरी में बिल्कुल नया नहीं है। स्टीरियोइलेक्ट्रोएन्सेफैलोग्राफी (sEEG) डेप्थ इलेक्ट्रोड्स को दशकों से कम जटिलताओं के साथ ट्रांसड्यूरली लगाया जाता रहा है । Neuralink की मुख्य सफलता अल्ट्रा-फाइन, फ्लेक्सिबल थ्रेड्स, उच्च चैनल काउंट (3,072 इलेक्ट्रोड तक) और पूरी तरह से रोबोटिक इंसर्शन का संयोजन है
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ट्रांसड्यूरल प्रक्रिया से थ्रेड स्थिरता, प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया (immune response) और कार्यात्मक परिणामों पर दीर्घकालिक डेटा अभी प्रकाशित नहीं हुआ है।