दूसरे हाफ की शुरुआत में जर्मनी ने जवाब दिया। 54वें मिनट में काई हावर्ट्ज ने गोल करके स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया ।
लेकिन इसके बाद जर्मनी ने शानदार प्रदर्शन किया। पूरे मैच में उनके पास 75% गेंद पर कब्जा था और उन्होंने 21 शॉट लगाए, जबकि पैराग्वे के पास सिर्फ 7 शॉट थे । फिर भी, वे नियमित समय या अतिरिक्त समय में जीत दर्ज नहीं कर सके।
मैच का सबसे घातक और विवादित पल अतिरिक्त समय के पहले हाफ के अंत में (101वें मिनट) आया । जर्मनी के डिफेंडर जोनाथन ताह ने कॉर्नर किक पर ऊंची छलांग लगाकर गेंद को पैराग्वे के गोलकीपर ऑरलैंडो गिल के पास से निकालते हुए गोल में डाल दिया। टीम जश्न मना रही थी कि अचानक रेफरी ने खेल रोककर VAR समीक्षा का संकेत दिया
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मोरक्को के रेफरी जलाल जायद ने मॉनिटर पर फुटेज देखी। उन्होंने पाया कि जर्मनी के वाल्डेमर एंटोन ने गिल के चेहरे/सिर पर अपने बूट से संपर्क किया था, जिसे गोलकीपर पर फाउल माना गया । इस पर फैसले ने भारी विवाद खड़ा कर दिया। द इंडिपेंडेंट ने इसे "एक कड़वा स्वाद छोड़ने वाला फैसला" बताया, जबकि BBC के रेफरी विश्लेषक डैरेन कैन ने कहा कि संपर्क "मुश्किल से" था
। गोल निरस्त होने के बाद मैच 1-1 से अतिरिक्त समय के अंत तक चला।
पैराग्वे के गोलकीपर ऑरलैंडो गिल ने दो अहम पेनल्टी बचाकर अपनी टीम को बढ़त दिलाई । जर्मनी की तरफ से काई हावर्ट्ज, निक वोल्टेमेड और जोनाथन ताह पेनल्टी से चूक गए
। अंत में, पैराग्वे के डिफेंडर जोस कैनाले ने निर्णायक सडन-डेथ पेनल्टी गोल करके टीम को 4-3 की जीत दिलाई
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यह जर्मनी की विश्व कप के इतिहास में पहली पेनल्टी शूटआउट हार थी। इससे पहले वे ऐसे चारों मैच जीत चुके थे । यह हार 2018 और 2022 में ग्रुप स्टेज से बाहर होने के बाद लगातार तीसरी नॉकआउट स्टेज की विफलता थी, जिससे कोच जूलियन नागेल्समैन की नौकरी पर गहरा संकट आ गया
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पैराग्वे के लिए यह एक ऐतिहासिक जीत थी। 2010 के बाद यह उनकी विश्व कप में पहली नॉकआउट स्टेज जीत थी, और उन्होंने पांच नॉकआउट मैचों में बिना गोल के रहने का सिलसिला तोड़ा । कई मीडिया ने इसे "पैराग्वे का सबसे बड़ा क्षण" और 2026 टूर्नामेंट का सबसे बड़ा उलटफेर बताया
। इंडिया टुडे ने इसे "देश के फुटबॉल इतिहास की सबसे बड़ी रात" कहा
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