WEF रिपोर्ट: पूर्व-पश्चिम आर्थिक विभाजन से दुनिया को 6.9 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान हो सकता है
WEF और Oliver Wyman की संयुक्त रिपोर्ट 'डीपनिंग डिवाइड्स' के मुताबिक, पूर्ण पूर्व पश्चिम आर्थिक विभाजन (ईस्ट वेस्ट डिकपलिंग) की स्थिति में वैश्विक अर्थव्यवस्था को 6.9 ट्रिलियन डॉलर तक का नुकसान हो सकता है। यह विखंडन पहले से ही सालाना 213 307 अरब डॉलर का नुकसान दे रहा है और वैश्विक मुद्रास्फीति में 0.2 0.3 फीसदी का इ...
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WEF और Oliver Wyman की संयुक्त रिपोर्ट 'डीपनिंग डिवाइड्स' के मुताबिक, पूर्ण पूर्व पश्चिम आर्थिक विभाजन (ईस्ट वेस्ट डिकपलिंग) की स्थिति में वैश्विक अर्थव्यवस्था को 6.9 ट्रिलियन डॉलर तक का नुकसान हो सकता है।
यह विखंडन पहले से ही सालाना 213 307 अरब डॉलर का नुकसान दे रहा है और वैश्विक मुद्रास्फीति में 0.2 0.3 फीसदी का इजाफा कर रहा है। उभरते बाजारों (जिनमें भारत और अफ्रीका के देश शामिल हैं) को सबसे ज्यादा नुकसान का सामना करन...
रिपोर्ट में कहा गया है कि यह विभाजन अब सिर्फ प्रतिद्वंद्वी देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि पारंपरिक रूप से गठबंधन वाली अर्थव्यवस्थाओं (एलाइड इकॉनमीज़) में भी फैल गया है। WEF ने इससे निपटने के लिए पांच नीतिगत उपाय सुझाए...
Search & fact-check with cited sources for What did the World Economic Forum's June 2025 report warn about the economic cost of East-West deConceptual representation of global economic fragmentation, as analyzed in the World Economic Forum's 2026 report 'Deepening Divides.'
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भू-आर्थिक विखंडन (जियोइकोनॉमिक फ्रैग्मेंटेशन) एक गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। विश्व आर्थिक मंच (WEF) की जून 2026 में जारी रिपोर्ट डीपनिंग डिवाइड्स: द कॉस्ट ऑफ अ मोर फ्रैग्मेंटेड फाइनेंशियल सिस्टम (Oliver Wyman के सहयोग से), वर्ष 2025-26 को वैश्वीकरण से एक संरचनात्मक रूप से विभाजित विश्व अर्थव्यवस्था में बदलाव का टर्निंग पॉइंट बताती है। यहाँ रिपोर्ट की प्रमुख चेतावनियों, अनुमानों और नीतिगत सिफारिशों का एक तथ्य-आधारित विश्लेषण प्रस्तुत है।
सबसे बुरी स्थिति में जीडीपी को 6.9 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान
पूर्ण पूर्व-पश्चिम आर्थिक विभाजन (फुल ईस्ट-वेस्ट इकोनॉमिक डिकपलिंग) की चरम स्थिति में वैश्विक अर्थव्यवस्था को 6.9 ट्रिलियन डॉलर तक का जीडीपी नुकसान हो सकता है । यह आंकड़ा WEF की जनवरी 2025 की पिछली रिपोर्ट, के अनुमानों को अपडेट करता है, जिसमें बहुत अधिक विखंडन की स्थिति में 0.6 ट्रिलियन डॉलर से 5.7 ट्रिलियन डॉलर (वैश्विक जीडीपी का लगभग 5%) तक के उत्पादन नुकसान का अनुमान लगाया गया था - यह प्रभाव 2008 के वित्तीय संकट या COVID-19 महामारी से भी बड़ा है । 6.9 ट्रिलियन डॉलर तक का बढ़ा हुआ अनुमान 2025-26 के दौरान व्यापार बाधाओं, निवेश प्रतिबंधों और वित्तीय डी-रिस्किंग नीतियों के लगातार बढ़ने को दर्शाता है ।
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इस पृष्ठ में एक स्रोत-समर्थित उत्तर शामिल है जिसे आप Studio Global के अंदर जारी रख सकते हैं।
"WEF रिपोर्ट: पूर्व-पश्चिम आर्थिक विभाजन से दुनिया को 6.9 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान हो सकता है" का संक्षिप्त उत्तर क्या है?
WEF और Oliver Wyman की संयुक्त रिपोर्ट 'डीपनिंग डिवाइड्स' के मुताबिक, पूर्ण पूर्व पश्चिम आर्थिक विभाजन (ईस्ट वेस्ट डिकपलिंग) की स्थिति में वैश्विक अर्थव्यवस्था को 6.9 ट्रिलियन डॉलर तक का नुकसान हो सकता है।
सबसे पहले सत्यापित करने योग्य मुख्य बिंदु क्या हैं?
WEF और Oliver Wyman की संयुक्त रिपोर्ट 'डीपनिंग डिवाइड्स' के मुताबिक, पूर्ण पूर्व पश्चिम आर्थिक विभाजन (ईस्ट वेस्ट डिकपलिंग) की स्थिति में वैश्विक अर्थव्यवस्था को 6.9 ट्रिलियन डॉलर तक का नुकसान हो सकता है। यह विखंडन पहले से ही सालाना 213 307 अरब डॉलर का नुकसान दे रहा है और वैश्विक मुद्रास्फीति में 0.2 0.3 फीसदी का इजाफा कर रहा है। उभरते बाजारों (जिनमें भारत और अफ्रीका के देश शामिल हैं) को सबसे ज्यादा नुकसान का सामना करन...
मुझे अभ्यास में आगे क्या करना चाहिए?
रिपोर्ट में कहा गया है कि यह विभाजन अब सिर्फ प्रतिद्वंद्वी देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि पारंपरिक रूप से गठबंधन वाली अर्थव्यवस्थाओं (एलाइड इकॉनमीज़) में भी फैल गया है। WEF ने इससे निपटने के लिए पांच नीतिगत उपाय सुझाए...
WEF रिपोर्ट: पूर्व-पश्चिम आर्थिक विभाजन से दुनिया को 6.9 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान हो सकता है
WEF और Oliver Wyman की संयुक्त रिपोर्ट 'डीपनिंग डिवाइड्स' के मुताबिक, पूर्ण पूर्व पश्चिम आर्थिक विभाजन (ईस्ट वेस्ट डिकपलिंग) की स्थिति में वैश्विक अर्थव्यवस्था को 6.9 ट्रिलियन डॉलर तक का नुकसान हो सकता है। यह विखंडन पहले से ही सालाना 213 307 अरब डॉलर का नुकसान दे रहा है और वैश्विक मुद्रास्फीति में 0.2 0.3 फीसदी का इ...
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यह विखंडन पहले से ही सालाना 213 307 अरब डॉलर का नुकसान दे रहा है और वैश्विक मुद्रास्फीति में 0.2 0.3 फीसदी का इजाफा कर रहा है। उभरते बाजारों (जिनमें भारत और अफ्रीका के देश शामिल हैं) को सबसे ज्यादा नुकसान का सामना करन...
रिपोर्ट में कहा गया है कि यह विभाजन अब सिर्फ प्रतिद्वंद्वी देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि पारंपरिक रूप से गठबंधन वाली अर्थव्यवस्थाओं (एलाइड इकॉनमीज़) में भी फैल गया है। WEF ने इससे निपटने के लिए पांच नीतिगत उपाय सुझाए...
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भू-आर्थिक विखंडन (जियोइकोनॉमिक फ्रैग्मेंटेशन) एक गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। विश्व आर्थिक मंच (WEF) की जून 2026 में जारी रिपोर्ट डीपनिंग डिवाइड्स: द कॉस्ट ऑफ अ मोर फ्रैग्मेंटेड फाइनेंशियल सिस्टम (Oliver Wyman के सहयोग से), वर्ष 2025-26 को वैश्वीकरण से एक संरचनात्मक रूप से विभाजित विश्व अर्थव्यवस्था में बदलाव का टर्निंग पॉइंट बताती है। यहाँ रिपोर्ट की प्रमुख चेतावनियों, अनुमानों और नीतिगत सिफारिशों का एक तथ्य-आधारित विश्लेषण प्रस्तुत है।
सबसे बुरी स्थिति में जीडीपी को 6.9 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान
पूर्ण पूर्व-पश्चिम आर्थिक विभाजन (फुल ईस्ट-वेस्ट इकोनॉमिक डिकपलिंग) की चरम स्थिति में वैश्विक अर्थव्यवस्था को 6.9 ट्रिलियन डॉलर तक का जीडीपी नुकसान हो सकता है । यह आंकड़ा WEF की जनवरी 2025 की पिछली रिपोर्ट, के अनुमानों को अपडेट करता है, जिसमें बहुत अधिक विखंडन की स्थिति में 0.6 ट्रिलियन डॉलर से 5.7 ट्रिलियन डॉलर (वैश्विक जीडीपी का लगभग 5%) तक के उत्पादन नुकसान का अनुमान लगाया गया था - यह प्रभाव 2008 के वित्तीय संकट या COVID-19 महामारी से भी बड़ा है । 6.9 ट्रिलियन डॉलर तक का बढ़ा हुआ अनुमान 2025-26 के दौरान व्यापार बाधाओं, निवेश प्रतिबंधों और वित्तीय डी-रिस्किंग नीतियों के लगातार बढ़ने को दर्शाता है ।
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"WEF रिपोर्ट: पूर्व-पश्चिम आर्थिक विभाजन से दुनिया को 6.9 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान हो सकता है" का संक्षिप्त उत्तर क्या है?
WEF और Oliver Wyman की संयुक्त रिपोर्ट 'डीपनिंग डिवाइड्स' के मुताबिक, पूर्ण पूर्व पश्चिम आर्थिक विभाजन (ईस्ट वेस्ट डिकपलिंग) की स्थिति में वैश्विक अर्थव्यवस्था को 6.9 ट्रिलियन डॉलर तक का नुकसान हो सकता है।
सबसे पहले सत्यापित करने योग्य मुख्य बिंदु क्या हैं?
WEF और Oliver Wyman की संयुक्त रिपोर्ट 'डीपनिंग डिवाइड्स' के मुताबिक, पूर्ण पूर्व पश्चिम आर्थिक विभाजन (ईस्ट वेस्ट डिकपलिंग) की स्थिति में वैश्विक अर्थव्यवस्था को 6.9 ट्रिलियन डॉलर तक का नुकसान हो सकता है। यह विखंडन पहले से ही सालाना 213 307 अरब डॉलर का नुकसान दे रहा है और वैश्विक मुद्रास्फीति में 0.2 0.3 फीसदी का इजाफा कर रहा है। उभरते बाजारों (जिनमें भारत और अफ्रीका के देश शामिल हैं) को सबसे ज्यादा नुकसान का सामना करन...
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रिपोर्ट में कहा गया है कि यह विभाजन अब सिर्फ प्रतिद्वंद्वी देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि पारंपरिक रूप से गठबंधन वाली अर्थव्यवस्थाओं (एलाइड इकॉनमीज़) में भी फैल गया है। WEF ने इससे निपटने के लिए पांच नीतिगत उपाय सुझाए...
पहले से ही हो रहा है भारी नुकसान: सालाना 213-307 अरब डॉलर
यह विखंडन सिर्फ भविष्य का जोखिम नहीं है; यह पहले से ही एक मापने योग्य नुकसान पहुंचा रहा है। WEF रिपोर्ट के अनुसार, भू-आर्थिक विखंडन वर्तमान में वैश्विक अर्थव्यवस्था को खोई हुई जीडीपी के रूप में सालाना 213-307 अरब डॉलर का नुकसान पहुंचा रहा है । साथ ही, यह वैश्विक मुद्रास्फीति में 0.2-0.3 प्रतिशत अंक का इजाफा कर रहा है, जिससे अधिकांश अर्थव्यवस्थाओं में क्रय शक्ति (खरीदारी क्षमता) कम हो रही है । ये लागतें कम हुए व्यापार की मात्रा, सीमाओं के पार पूंजी प्रवाह (क्रॉस-बॉर्डर कैपिटल फ्लो) में कमी और एकीकृत बाजारों द्वारा प्रदान की जाने वाली आर्थिक दक्षताओं के नुकसान के कारण उत्पन्न होती हैं ।
गठबंधन वाली अर्थव्यवस्थाओं तक फैल रहा है विभाजन
रिपोर्ट का एक चौंकाने वाला निष्कर्ष यह है कि विखंडन अब केवल भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों (जैसे अमेरिका-चीन) तक सीमित नहीं है। यह पारंपरिक रूप से गठबंधन वाली अर्थव्यवस्थाओं (एलाइड इकॉनमीज़) में भी फैल गया है, क्योंकि एक ही भू-राजनीतिक गुट के देशों के बीच भी व्यापार बाधाएं, वित्तीय डी-रिस्किंग नीतियां और आर्थिक सुरक्षा उपाय बढ़ रहे हैं । इस प्रवृत्ति को अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF), विश्व बैंक और विश्व व्यापार संगठन (WTO) जैसी बहुपक्षीय संस्थाओं के कमजोर पड़ने से तेजी मिली है, जिनकी विवाद-निपटान भूमिका कम हो गई है, जिसके कारण देश तेजी से द्विपक्षीय समझौतों और स्थानीय मुद्रा में निपटान पर निर्भर हो रहे हैं ।
अमेरिकी श्रमिकों की वास्तविक मजदूरी पर प्रभाव
रिपोर्ट अमेरिकी श्रमिकों की वास्तविक मजदूरी पर प्रभाव का विस्तृत अनुमान प्रस्तुत करती है, जिसमें उच्च कुशल श्रमिकों को सबसे अधिक गिरावट का सामना करना पड़ रहा है:
कम कुशल श्रमिक: वास्तविक मजदूरी में 0.33% की कमी
मध्यम कुशल श्रमिक: वास्तविक मजदूरी में 0.49% की कमी
उच्च कुशल श्रमिक: वास्तविक मजदूरी में 0.58% की कमी
यह खोज कि उच्च कुशल अमेरिकी श्रमिकों को सबसे तेज मजदूरी कटौती का सामना करना पड़ रहा है, वैश्विक रूप से एकीकृत क्षेत्रों (जैसे वित्त, प्रौद्योगिकी और उन्नत विनिर्माण) में उनके अधिक जोखिम के कारण है, जो विखंडन से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं ।
उभरते बाजारों को सबसे ज्यादा नुकसान क्यों? (अफ्रीका केस स्टडी)
प्रमुख भू-राजनीतिक गुटों के बाहर के देशों को असमान रूप से अधिक आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ता है। रिपोर्ट का अनुमान है कि गुट-निरपेक्ष देशों के लिए जीडीपी वृद्धि पर 10.7% का असर पड़ सकता है, जबकि गुट-संबद्ध अर्थव्यवस्थाओं के लिए यह 6.4% है । उभरते बाजार तीन मुख्य कारणों से विशेष रूप से संवेदनशील हैं:
खुले व्यापार और सीमाओं के पार पूंजी प्रवाह पर अधिक निर्भरता, जो उन्हें व्यवधानों के प्रति अधिक संवेदनशील बनाती है।
विविध आर्थिक बफ़र्स का अभाव, यानी उनके पास वापस लौटने के लिए कम घरेलू उद्योग या बड़े आंतरिक बाजार हैं।
प्रतिस्पर्धी गुटों के बीच फंस जाना, जिससे उन्हें निवेश में कमी, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में व्यवधान और उच्च वित्तपोषण लागत का सामना करना पड़ता है ।
अफ्रीका के लिए विशेष रूप से, आर्थिक नुकसान पहले से ही स्पष्ट है। अफ्रीकी विकास बैंक के 2025 के आउटलुक में कहा गया है कि टैरिफ-प्रेरित वैश्विक अनिश्चितता के कारण विकास दर में 0.2-0.4 प्रतिशत अंकों की कमी आई है, जो 2025 में 3.9% और 2026 में 4.0% रहने का अनुमान है । एक IMF कार्य पत्र में पाया गया कि उप-सहारा अफ्रीका विशेष रूप से संवेदनशील है क्योंकि इस क्षेत्र के व्यापार और वित्तीय संबंध कम विविध हैं, जिससे व्यापार संबंधों में कमी से उत्पन्न झटकों को अवशोषित करना कठिन हो जाता है । WEF की रिपोर्ट इस बात को पुष्ट करती है कि अफ्रीका सहित गुट-निरपेक्ष देशों को किसी भी डिकपलिंग परिदृश्य में सबसे अधिक उत्पादन हानि का सामना करना पड़ता है ।
WEF द्वारा सुझाए गए पांच नीतिगत उपाय
रिपोर्ट पांच ठोस कदमों की पहचान करती है जो नीति निर्माता विखंडन को प्रबंधित और कम करने के लिए उठा सकते हैं :
वित्तीय प्रणाली की सुरक्षा के लिए साझा गार्डरेल स्थापित करें: कानून के शासन की रक्षा करना, स्वतंत्र मौद्रिक नीति सुनिश्चित करना, संप्रभु संपत्तियों की जब्ती को सीमित करना और अनधिकृत पहुंच से सरकारी डेटा की रक्षा करना ।
आगे प्रणालीगत विखंडन का विरोध करें: सीमा पार भुगतान, संवाददाता बैंकिंग और वित्तीय बाजार बुनियादी ढांचे के लिए खुले चैनल बनाए रखना ।
वैश्विक वित्तीय प्रणाली में सुधार करें: बहुपक्षीय संस्थानों (IMF, विश्व बैंक, WTO) को मजबूत करना और वर्तमान भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को संबोधित करने के लिए उनके ढांचे को अपडेट करना ।
उभरते गुटों के बीच अंतर-संचालन (इंटरऑपरेबिलिटी) को बढ़ावा दें: सुनिश्चित करें कि नए वित्तीय बुनियादी ढांचे और भुगतान प्रणालियां (जैसे, डिजिटल मुद्राएं, वैकल्पिक निपटान प्रणालियां) बांटने के बजाय जोड़ सकें ।
समावेशी आर्थिक लचीलापन (इन्क्लूसिव इकोनॉमिक रेज़िलिएंस) में निवेश करें: लक्षित सहायता, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और क्षमता निर्माण के माध्यम से उभरती अर्थव्यवस्थाओं और कमजोर आबादी का समर्थन करना ताकि विखंडन के असममित बोझ को कम किया जा सके ।
रिपोर्ट का केंद्रीय संदेश स्पष्ट है: वैश्विक अर्थव्यवस्था एक टिपिंग पॉइंट पार कर चुकी है, और जानबूझकर नीतिगत हस्तक्षेप के बिना, विभाजन की लागत सभी अर्थव्यवस्थाओं के लिए बढ़ती रहेगी - लेकिन सबसे अधिक उन लोगों के लिए जो झटके को सहन करने में सबसे कम सक्षम हैं।
पहले से ही हो रहा है भारी नुकसान: सालाना 213-307 अरब डॉलर
यह विखंडन सिर्फ भविष्य का जोखिम नहीं है; यह पहले से ही एक मापने योग्य नुकसान पहुंचा रहा है। WEF रिपोर्ट के अनुसार, भू-आर्थिक विखंडन वर्तमान में वैश्विक अर्थव्यवस्था को खोई हुई जीडीपी के रूप में सालाना 213-307 अरब डॉलर का नुकसान पहुंचा रहा है । साथ ही, यह वैश्विक मुद्रास्फीति में 0.2-0.3 प्रतिशत अंक का इजाफा कर रहा है, जिससे अधिकांश अर्थव्यवस्थाओं में क्रय शक्ति (खरीदारी क्षमता) कम हो रही है । ये लागतें कम हुए व्यापार की मात्रा, सीमाओं के पार पूंजी प्रवाह (क्रॉस-बॉर्डर कैपिटल फ्लो) में कमी और एकीकृत बाजारों द्वारा प्रदान की जाने वाली आर्थिक दक्षताओं के नुकसान के कारण उत्पन्न होती हैं ।
गठबंधन वाली अर्थव्यवस्थाओं तक फैल रहा है विभाजन
रिपोर्ट का एक चौंकाने वाला निष्कर्ष यह है कि विखंडन अब केवल भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों (जैसे अमेरिका-चीन) तक सीमित नहीं है। यह पारंपरिक रूप से गठबंधन वाली अर्थव्यवस्थाओं (एलाइड इकॉनमीज़) में भी फैल गया है, क्योंकि एक ही भू-राजनीतिक गुट के देशों के बीच भी व्यापार बाधाएं, वित्तीय डी-रिस्किंग नीतियां और आर्थिक सुरक्षा उपाय बढ़ रहे हैं । इस प्रवृत्ति को अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF), विश्व बैंक और विश्व व्यापार संगठन (WTO) जैसी बहुपक्षीय संस्थाओं के कमजोर पड़ने से तेजी मिली है, जिनकी विवाद-निपटान भूमिका कम हो गई है, जिसके कारण देश तेजी से द्विपक्षीय समझौतों और स्थानीय मुद्रा में निपटान पर निर्भर हो रहे हैं ।
अमेरिकी श्रमिकों की वास्तविक मजदूरी पर प्रभाव
रिपोर्ट अमेरिकी श्रमिकों की वास्तविक मजदूरी पर प्रभाव का विस्तृत अनुमान प्रस्तुत करती है, जिसमें उच्च कुशल श्रमिकों को सबसे अधिक गिरावट का सामना करना पड़ रहा है:
कम कुशल श्रमिक: वास्तविक मजदूरी में 0.33% की कमी
मध्यम कुशल श्रमिक: वास्तविक मजदूरी में 0.49% की कमी
उच्च कुशल श्रमिक: वास्तविक मजदूरी में 0.58% की कमी
यह खोज कि उच्च कुशल अमेरिकी श्रमिकों को सबसे तेज मजदूरी कटौती का सामना करना पड़ रहा है, वैश्विक रूप से एकीकृत क्षेत्रों (जैसे वित्त, प्रौद्योगिकी और उन्नत विनिर्माण) में उनके अधिक जोखिम के कारण है, जो विखंडन से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं ।
उभरते बाजारों को सबसे ज्यादा नुकसान क्यों? (अफ्रीका केस स्टडी)
प्रमुख भू-राजनीतिक गुटों के बाहर के देशों को असमान रूप से अधिक आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ता है। रिपोर्ट का अनुमान है कि गुट-निरपेक्ष देशों के लिए जीडीपी वृद्धि पर 10.7% का असर पड़ सकता है, जबकि गुट-संबद्ध अर्थव्यवस्थाओं के लिए यह 6.4% है । उभरते बाजार तीन मुख्य कारणों से विशेष रूप से संवेदनशील हैं:
खुले व्यापार और सीमाओं के पार पूंजी प्रवाह पर अधिक निर्भरता, जो उन्हें व्यवधानों के प्रति अधिक संवेदनशील बनाती है।
विविध आर्थिक बफ़र्स का अभाव, यानी उनके पास वापस लौटने के लिए कम घरेलू उद्योग या बड़े आंतरिक बाजार हैं।
प्रतिस्पर्धी गुटों के बीच फंस जाना, जिससे उन्हें निवेश में कमी, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में व्यवधान और उच्च वित्तपोषण लागत का सामना करना पड़ता है ।
अफ्रीका के लिए विशेष रूप से, आर्थिक नुकसान पहले से ही स्पष्ट है। अफ्रीकी विकास बैंक के 2025 के आउटलुक में कहा गया है कि टैरिफ-प्रेरित वैश्विक अनिश्चितता के कारण विकास दर में 0.2-0.4 प्रतिशत अंकों की कमी आई है, जो 2025 में 3.9% और 2026 में 4.0% रहने का अनुमान है । एक IMF कार्य पत्र में पाया गया कि उप-सहारा अफ्रीका विशेष रूप से संवेदनशील है क्योंकि इस क्षेत्र के व्यापार और वित्तीय संबंध कम विविध हैं, जिससे व्यापार संबंधों में कमी से उत्पन्न झटकों को अवशोषित करना कठिन हो जाता है । WEF की रिपोर्ट इस बात को पुष्ट करती है कि अफ्रीका सहित गुट-निरपेक्ष देशों को किसी भी डिकपलिंग परिदृश्य में सबसे अधिक उत्पादन हानि का सामना करना पड़ता है ।
WEF द्वारा सुझाए गए पांच नीतिगत उपाय
रिपोर्ट पांच ठोस कदमों की पहचान करती है जो नीति निर्माता विखंडन को प्रबंधित और कम करने के लिए उठा सकते हैं :
वित्तीय प्रणाली की सुरक्षा के लिए साझा गार्डरेल स्थापित करें: कानून के शासन की रक्षा करना, स्वतंत्र मौद्रिक नीति सुनिश्चित करना, संप्रभु संपत्तियों की जब्ती को सीमित करना और अनधिकृत पहुंच से सरकारी डेटा की रक्षा करना ।
आगे प्रणालीगत विखंडन का विरोध करें: सीमा पार भुगतान, संवाददाता बैंकिंग और वित्तीय बाजार बुनियादी ढांचे के लिए खुले चैनल बनाए रखना ।
वैश्विक वित्तीय प्रणाली में सुधार करें: बहुपक्षीय संस्थानों (IMF, विश्व बैंक, WTO) को मजबूत करना और वर्तमान भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को संबोधित करने के लिए उनके ढांचे को अपडेट करना ।
उभरते गुटों के बीच अंतर-संचालन (इंटरऑपरेबिलिटी) को बढ़ावा दें: सुनिश्चित करें कि नए वित्तीय बुनियादी ढांचे और भुगतान प्रणालियां (जैसे, डिजिटल मुद्राएं, वैकल्पिक निपटान प्रणालियां) बांटने के बजाय जोड़ सकें ।
समावेशी आर्थिक लचीलापन (इन्क्लूसिव इकोनॉमिक रेज़िलिएंस) में निवेश करें: लक्षित सहायता, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और क्षमता निर्माण के माध्यम से उभरती अर्थव्यवस्थाओं और कमजोर आबादी का समर्थन करना ताकि विखंडन के असममित बोझ को कम किया जा सके ।
रिपोर्ट का केंद्रीय संदेश स्पष्ट है: वैश्विक अर्थव्यवस्था एक टिपिंग पॉइंट पार कर चुकी है, और जानबूझकर नीतिगत हस्तक्षेप के बिना, विभाजन की लागत सभी अर्थव्यवस्थाओं के लिए बढ़ती रहेगी - लेकिन सबसे अधिक उन लोगों के लिए जो झटके को सहन करने में सबसे कम सक्षम हैं।