यह विखंडन सिर्फ भविष्य का जोखिम नहीं है; यह पहले से ही एक मापने योग्य नुकसान पहुंचा रहा है। WEF रिपोर्ट के अनुसार, भू-आर्थिक विखंडन वर्तमान में वैश्विक अर्थव्यवस्था को खोई हुई जीडीपी के रूप में सालाना 213-307 अरब डॉलर का नुकसान पहुंचा रहा है । साथ ही, यह वैश्विक मुद्रास्फीति में 0.2-0.3 प्रतिशत अंक का इजाफा कर रहा है, जिससे अधिकांश अर्थव्यवस्थाओं में क्रय शक्ति (खरीदारी क्षमता) कम हो रही है
। ये लागतें कम हुए व्यापार की मात्रा, सीमाओं के पार पूंजी प्रवाह (क्रॉस-बॉर्डर कैपिटल फ्लो) में कमी और एकीकृत बाजारों द्वारा प्रदान की जाने वाली आर्थिक दक्षताओं के नुकसान के कारण उत्पन्न होती हैं
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रिपोर्ट का एक चौंकाने वाला निष्कर्ष यह है कि विखंडन अब केवल भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों (जैसे अमेरिका-चीन) तक सीमित नहीं है। यह पारंपरिक रूप से गठबंधन वाली अर्थव्यवस्थाओं (एलाइड इकॉनमीज़) में भी फैल गया है, क्योंकि एक ही भू-राजनीतिक गुट के देशों के बीच भी व्यापार बाधाएं, वित्तीय डी-रिस्किंग नीतियां और आर्थिक सुरक्षा उपाय बढ़ रहे हैं । इस प्रवृत्ति को अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF), विश्व बैंक और विश्व व्यापार संगठन (WTO) जैसी बहुपक्षीय संस्थाओं के कमजोर पड़ने से तेजी मिली है, जिनकी विवाद-निपटान भूमिका कम हो गई है, जिसके कारण देश तेजी से द्विपक्षीय समझौतों और स्थानीय मुद्रा में निपटान पर निर्भर हो रहे हैं
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रिपोर्ट अमेरिकी श्रमिकों की वास्तविक मजदूरी पर प्रभाव का विस्तृत अनुमान प्रस्तुत करती है, जिसमें उच्च कुशल श्रमिकों को सबसे अधिक गिरावट का सामना करना पड़ रहा है:
यह खोज कि उच्च कुशल अमेरिकी श्रमिकों को सबसे तेज मजदूरी कटौती का सामना करना पड़ रहा है, वैश्विक रूप से एकीकृत क्षेत्रों (जैसे वित्त, प्रौद्योगिकी और उन्नत विनिर्माण) में उनके अधिक जोखिम के कारण है, जो विखंडन से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं ।
प्रमुख भू-राजनीतिक गुटों के बाहर के देशों को असमान रूप से अधिक आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ता है। रिपोर्ट का अनुमान है कि गुट-निरपेक्ष देशों के लिए जीडीपी वृद्धि पर 10.7% का असर पड़ सकता है, जबकि गुट-संबद्ध अर्थव्यवस्थाओं के लिए यह 6.4% है । उभरते बाजार तीन मुख्य कारणों से विशेष रूप से संवेदनशील हैं:
अफ्रीका के लिए विशेष रूप से, आर्थिक नुकसान पहले से ही स्पष्ट है। अफ्रीकी विकास बैंक के 2025 के आउटलुक में कहा गया है कि टैरिफ-प्रेरित वैश्विक अनिश्चितता के कारण विकास दर में 0.2-0.4 प्रतिशत अंकों की कमी आई है, जो 2025 में 3.9% और 2026 में 4.0% रहने का अनुमान है । एक IMF कार्य पत्र में पाया गया कि उप-सहारा अफ्रीका विशेष रूप से संवेदनशील है क्योंकि इस क्षेत्र के व्यापार और वित्तीय संबंध कम विविध हैं, जिससे व्यापार संबंधों में कमी से उत्पन्न झटकों को अवशोषित करना कठिन हो जाता है
। WEF की रिपोर्ट इस बात को पुष्ट करती है कि अफ्रीका सहित गुट-निरपेक्ष देशों को किसी भी डिकपलिंग परिदृश्य में सबसे अधिक उत्पादन हानि का सामना करना पड़ता है
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रिपोर्ट पांच ठोस कदमों की पहचान करती है जो नीति निर्माता विखंडन को प्रबंधित और कम करने के लिए उठा सकते हैं :
रिपोर्ट का केंद्रीय संदेश स्पष्ट है: वैश्विक अर्थव्यवस्था एक टिपिंग पॉइंट पार कर चुकी है, और जानबूझकर नीतिगत हस्तक्षेप के बिना, विभाजन की लागत सभी अर्थव्यवस्थाओं के लिए बढ़ती रहेगी - लेकिन सबसे अधिक उन लोगों के लिए जो झटके को सहन करने में सबसे कम सक्षम हैं।