लुनिन की चेतावनी बिल्कुल स्पष्ट और दो टूक थी। उन्होंने वीडियो में कहा, "अगर मुझे जल्द ही क्रेमलिन में आमंत्रित नहीं किया गया और मैं आपके साथ लाइव नहीं आया, तो सेना क्रेमलिन के खिलाफ अपने हथियार बदल देगी।" उन्होंने दावा किया कि वे केवल असंतुष्ट सैन्य और सुरक्षा अधिकारियों का संदेश दे रहे हैं जो उनके पास आए थे ।
यह वीडियो बेहद तेज़ी से फैला। एक रिपोर्ट के अनुसार, 24 घंटों के भीतर इस वीडियो को लगभग 11 मिलियन बार देखा गया , जबकि एक अन्य मीडिया ने इसे 12 मिलियन से अधिक बार देखे जाने की बात कही
।
26 जून — क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने पत्रकारों को बताया कि अधिकारियों को वायरल वीडियो के बारे में पता है, लेकिन उन्होंने अभी तक इसे नहीं देखा है। उन्होंने इसे 'अजीब शब्दों वाला' बताया और कहा कि स्थिति पर टिप्पणी करना जल्दबाजी होगी । पेसकोव ने पुष्टि की कि वीडियो में सैन्य कमांडरों द्वारा सैनिकों के साथ दुर्व्यवहार के आरोप लगाए गए हैं
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27 जून — रूसी अधिकारियों ने लुनिन को गिरफ्तार कर लिया। कई रिपोर्टों के अनुसार, उन्हें उनके वीडियो संबोधन के बाद 11 दिनों के प्रशासनिक रिमांड में रखा गया । उनके घर की तलाशी ली गई। उनकी पत्नी ने एक यूक्रेनी मीडिया को बताया कि वह जीवित और स्वस्थ हैं, लेकिन उन्हें प्रशासनिक ज़िम्मेदारी में लिया गया है
। यह गिरफ्तारी इतनी तेज़ी से हुई कि यह साफ हो गया कि राज्य ने इस पूरे प्रकरण को बेहद शीघ्रता से नियंत्रित करने का प्रयास किया
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क्या लुनिन ने अपने बयान से पलट गए थे? कुछ सोशल मीडिया पोस्ट और एक आरएफई/आरएल रिपोर्ट में दावा किया गया कि लुनिन ने 24 घंटों के भीतर ही अपना बयान वापस ले लिया। उन्होंने कहा कि उनकी बातों को गलत तरीके से पेश किया गया और उन्होंने किसी विद्रोह की धमकी देने से इनकार किया । हालांकि, सभी स्रोत एकमत नहीं हैं। एक स्रोत में स्पष्ट रूप से बयान वापसी का जिक्र है
, जबकि अन्य स्रोत बिना किसी वापसी के सिर्फ गिरफ्तारी की सूचना देते हैं
। इसलिए, वापसी की खबर सामने आई है, लेकिन इसकी पुष्टि सभी संदर्भित स्रोतों से नहीं होती।
समानताएं चौंकाने वाली हैं, लेकिन अंतर भी उतने ही गहरे हैं।
लुनिन की घटना प्रिगोज़िन के विद्रोह की बयानबाजी और शिकायतों को तो दोहराती है, लेकिन इसके पैमाने में बहुत बड़ा अंतर है । यह एक यूक्रेन युद्ध के अनुभवी के सार्वजनिक विद्रोह का सबूत है, न कि किसी संगठित सैन्य साजिश का
। क्रेमलिन की त्वरित प्रतिक्रिया और लुनिन की गिरफ्तारी बताती है कि राज्य ने इस घटना को रोकने के लिए तुरंत कार्रवाई की
। लुनिन द्वारा अपने बयान से पलटना वास्तविक था या जबरदस्ती, यह स्पष्ट नहीं है, लेकिन यह घटना एक याद दिलाती है कि रूस की सेना के भीतर से सार्वजनिक असहमति, लाखों बार देखे जाने के बाद भी, कुछ ही दिनों में खामोश कर दी जा सकती है।