स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको (Robert Fico) ने स्पष्ट कहा है कि उनका देश नाटो के 70 अरब यूरो (लगभग 795 अरब रुपए) के नए यूक्रेन सैन्य सहायता पैकेज में हिस्सा नहीं लेगा। उन्होंने कहा कि 'स्लोवाकिया यूक्रेन के स... फिको ने 90 अरब यूरो के ईयू ऋण पैकेज का भी विरोध किया था, जिसे उन्होंने 'युद्ध ऋण' करार देते हुए...

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नाटो (NATO) का अगला बड़ा शिखर सम्मेलन 7-8 जुलाई 2026 को तुर्की की राजधानी अंकारा (Ankara) में होने वाला है, लेकिन इससे पहले ही गठबंधन के भीतर एक बड़ी फूट सामने आ गई है। स्लोवाकिया (Slovakia) के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको (Robert Fico) ने यूक्रेन को दिए जाने वाले नाटो के प्रस्तावित 70 अरब यूरो के विशाल सैन्य सहायता पैकेज में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया है। फिको का यह रुख हंगरी (Hungary) के बाद गठबंधन के भीतर सबसे मुखर विरोध के रूप में देखा जा रहा है ।
फिको ने सार्वजनिक तौर पर कहा कि स्लोवाकिया, नाटो के इस नए सैन्य फंडिंग प्रस्ताव का हिस्सा नहीं बनेगा। उन्होंने कहा, "मैं वह सब कुछ करूंगा जो संभव है ताकि स्लोवाकिया यूक्रेन की सैन्य जरूरतों के लिए ऋण देने में भाग न ले।" उन्होंने साफ शब्दों में यह भी कहा, "स्लोवाकिया यूक्रेन के सैन्य खर्चों का भुगतान नहीं करेगा।"
अपने इस रुख को अमल में लाने के लिए, फिको ने रक्षा मंत्री रॉबर्ट कालिन्याक (Robert Kaliňák) के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई। इस बैठक का उद्देश्य अंकारा जाने वाले स्लोवाक प्रतिनिधिमंडल के लिए यह तय करना था कि उनके पास किसी भी नए सैन्य ऋण या अतिरिक्त वित्तीय योगदान को मंजूरी देने का कोई अधिकार (मैंडेट) नहीं होगा । इसका मतलब है कि स्लोवाकिया इस मामले पर मतदान या सहमति नहीं देगा।
यह पहली बार नहीं है जब फिको ने यूक्रेन के लिए बड़ी वित्तीय मदद का विरोध किया हो। इससे पहले, दिसंबर 2025 में यूरोपीय संघ के नेताओं द्वारा सहमत और फरवरी 2026 में यूरोपीय संसद द्वारा औपचारिक रूप से अनुमोदित 90 अरब यूरो के ऋण पैकेज को भी फिको ने खारिज कर दिया था
। यह ऋण पैकेज दो हिस्सों में बंटा है: 60 अरब यूरो रक्षा के लिए और 30 अरब यूरो वित्तीय सहायता के लिए
। फिको ने इसे "युद्ध ऋण" (war loan) करार देते हुए तर्क दिया कि यह केवल "पीड़ा और हत्या को लंबा खींचेगा"
। दिसंबर 2025 में यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा (António Costa) को लिखे एक पत्र में उन्होंने स्पष्ट किया कि वे यूक्रेन के सैन्य खर्चों को वित्तपोषित करने वाले किसी भी समाधान का समर्थन नहीं करेंगे
। उल्लेखनीय है कि स्लोवाकिया और हंगरी केवल दो ऐसे ईयू सदस्य देश थे जिन्होंने 90 अरब यूरो के इस ऋण का समर्थन नहीं किया था
।
फिको लंबे समय से यूक्रेन की नाटो सदस्यता के खिलाफ रहे हैं। अक्टूबर 2024 में ही उन्होंने कहा था कि वह "अपने नेतृत्व की अवधि के लिए यूक्रेन को नाटो में शामिल होने से रोकेंगे" और स्लोवाक प्रतिनिधिमंडल को किसी भी त्वरित निमंत्रण पर वीटो करने का निर्देश देंगे । इसके अलावा, वह रूस पर लगाए गए यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों (sanctions) को लेकर लगातार संदेह व्यक्त करते रहे हैं। उनका तर्क है कि ये प्रतिबंध रूस से ज्यादा ईयू देशों की अर्थव्यवस्थाओं को नुकसान पहुंचाते हैं। उनकी सरकार ने विशेष रूप से ऊर्जा से जुड़े प्रतिबंधों के नवीनीकरण में देरी की है या उन्हें शर्तों पर रोका है, जो रूसी तेल और गैस पर स्लोवाकिया की निर्भरता को दर्शाता है
।
यूक्रेन को नई मदद देने से इनकार करने के साथ ही, फिको ने स्लोवाकिया द्वारा पहले दिए गए सैन्य उपकरणों के बदले मुआवजे की मांग भी तेज कर दी है। जून 2026 में, उन्होंने घोषणा की कि वह औपचारिक रूप से यूरोपीय संघ (EU) से इसकी भरपाई की मांग करेंगे । वह यह मामला यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन (Ursula von der Leyen) के सामने उठाने की योजना बना रहे हैं, जिसमें वह तर्क देंगे कि पिछली सरकारों द्वारा हस्तांतरित हथियारों के लिए ईयू को "उन्हें वापस भुगतान करना चाहिए"
। यह मुआवजा मूल रूप से यूरोपीय शांति सुविधा (European Peace Facility - EPF) से आने वाला था
। 2023 में फिको के सत्ता में आने के बाद से स्लोवाकिया ने यूक्रेन को सभी राजकीय सैन्य सहायता रोक दी है
।
फिको का यह कदम उनकी सरकार की विदेश नीति (foreign policy) में बड़े बदलाव को दर्शाता है। उनके प्रशासन ने "चार कोनों की दुनिया की राजनीति" अपना ली है, जिसमें पश्चिमी सैन्य सहायता पर खुला संदेह और मास्को के साथ संबंधों को "सामान्य" बनाने पर जोर दिया जाता है
। फिको एकमात्र यूरोपीय संघ के नेता थे जिन्होंने मास्को के विजय दिवस (Victory Day) समारोह में भाग लिया था
।
जहां एक ओर नाटो अंकारा शिखर सम्मेलन में रक्षा खर्च बढ़ाने, औद्योगिक उत्पादन क्षमता बढ़ाने और यूक्रेन को निरंतर समर्थन देने पर एकजुटता दिखाना चाहता है, वहीं फिको का यह रुख इस एकजुटता के लिए एक बड़ी चुनौती है। हंगरी के साथ मिलकर, स्लोवाकिया 70 अरब यूरो की प्रतिबद्धता और व्यापक सामरिक संदेश पर सर्वसम्मति के लक्ष्य को जटिल बना रहा है ।
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स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको (Robert Fico) ने स्पष्ट कहा है कि उनका देश नाटो के 70 अरब यूरो (लगभग 795 अरब रुपए) के नए यूक्रेन सैन्य सहायता पैकेज में हिस्सा नहीं लेगा। उन्होंने कहा कि 'स्लोवाकिया यूक्रेन के स...
स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको (Robert Fico) ने स्पष्ट कहा है कि उनका देश नाटो के 70 अरब यूरो (लगभग 795 अरब रुपए) के नए यूक्रेन सैन्य सहायता पैकेज में हिस्सा नहीं लेगा। उन्होंने कहा कि 'स्लोवाकिया यूक्रेन के स... फिको ने 90 अरब यूरो के ईयू ऋण पैकेज का भी विरोध किया था, जिसे उन्होंने 'युद्ध ऋण' करार देते हुए कहा था कि यह सिर्फ 'पीड़ा और हत्या को लंबा खींचेगा'। यह ऋण 60 अरब यूरो रक्षा और 30 अरब यूरो वित्तीय सहायता में बंटा है [1...
हंगरी के साथ, स्लोवाकिया यूक्रेन नीति पर नाटो के भीतर सबसे मुखर विरोधी देशों में से एक है। फिको ने यूक्रेन की नाटो सदस्यता, रूस पर ईयू प्रतिबंधों और पहले से दिए गए सैन्य उपकरणों के लिए ईयू से मुआवजे की मांग पर भी असहम...