यह ज़ेलेंस्की के 4 जून के उस खुले पत्र का अनुसरण है, जिसमें उन्होंने पुतिन को सीधी मुलाकात, वार्ता के दौरान पूर्ण युद्धविराम और कैदियों के आदान-प्रदान का प्रस्ताव दिया था । उस पत्र में कहा गया था: "यूक्रेन इस युद्ध को समाप्त करने का प्रस्ताव रखता है। यह ईमानदारी, गरिमा के साथ और इस गारंटी के साथ किया जाना चाहिए कि युद्ध फिर से नहीं भड़केगा"
।
25-26 जून की रात, यूक्रेन ने वह हमला किया जिसे रूसी रक्षा मंत्रालय ने पूर्ण पैमाने पर आक्रमण के बाद से रूसी क्षेत्र पर सबसे बड़ा रात्रि ड्रोन हमला बताया । रूस ने दावा किया कि उसकी वायु रक्षा प्रणालियों ने 12 रूसी क्षेत्रों तथा क्रीमिया, आज़ोव सागर और काला सागर के ऊपर 660 यूक्रेनी ड्रोनों को रोककर नष्ट कर दिया
। हमलों का लक्ष्य मॉस्को क्षेत्र और तुला क्षेत्र का एक बड़ा रासायनिक संयंत्र था
। NPR और कई अन्य मीडिया ने इसे युद्ध के सबसे बड़े यूक्रेनी ड्रोन हमलों में से एक बताया
।
इसी समय, कीव के अधिकारियों ने बताया कि रूस ने 26 जून की रात बैलिस्टिक मिसाइल हमला किया, जब ड्रोन बैराज जारी था ।
23 जून को, पुतिन ने कहा कि रूस यूक्रेन के साथ शांति वार्ता के लिए तैयार है, लेकिन केवल 2022 के इस्तांबुल मसौदा समझौते के आधार पर । रिपोर्टों के अनुसार, उन शर्तों में शामिल था कि यूक्रेन को:
पुतिन ने "युद्धक्षेत्र की वर्तमान वास्तविकताओं" और अगस्त 2025 में अमेरिका के साथ एंकोरेज में कथित रूप से हुए समझौतों को भी अतिरिक्त आधार बताया । इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर (ISW) ने आकलन किया कि पुतिन का यह ढांचा वास्तविक समझौते के बजाय यूक्रेन के आत्मसमर्पण की अधिकतम मांगों के बराबर है
।
25 जून को, ज़ेलेंस्की ने यूक्रेन की सुरक्षा सेवा (SBU) के 40 दिवसीय सामरिक 'प्रभाव अभियान' को औपचारिक रूप से मंजूरी दी, जिसका उद्देश्य रूस पर युद्ध समाप्त करने का दबाव बनाना है । सटीक रणनीति गोपनीय रखी गई है, लेकिन यह योजना यूक्रेन की बढ़ती लंबी दूरी की स्ट्राइक क्षमता का सीधा लाभ उठाती है - जिसमें रूसी ऊर्जा और सैन्य बुनियादी ढांचे पर ड्रोन हमले शामिल हैं - ताकि मॉस्को को बातचीत के लिए मजबूर किया जा सके
। 26 जून का ड्रोन हमला इसी रणनीति का प्रत्यक्ष निष्पादन प्रतीत होता है
।
ये समानांतर घटनाएं एक सुसंगत दोहरी रणनीति बनाती हैं:
पुतिन की जवाबी स्थिति 2022 के इस्तांबुल ढांचे पर आधारित सशर्त वार्ता है - वे शर्तें जिन्हें यूक्रेन ने तब खारिज कर दिया था और आज भी आत्मसमर्पण की मांग के रूप में देखता है । रूस ने इस पूरे अवधि में यूक्रेनी शहरों पर अपने हमले जारी रखे, जिसमें कीव पर बैलिस्टिक मिसाइल हमला भी शामिल है
।
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