ट्यूनीशिया के लिए मैच की शुरुआत सपने जैसी नहीं थी। तीसरे मिनट में डेंज़ल डमफ्रीज़ के दाएं से क्रॉस को ट्यूनीशियाई कप्तान एल्लीज़ सखीरी अपने ही गोल में डाल बैठे । यह उनके लिए एक दुःस्वप्न जैसी शुरुआत थी।
इसके चार मिनट बाद ही ब्रायन ब्रॉबी ने टूर्नामेंट में अपना तीसरा गोल करके स्कोर 2-0 कर दिया। वर्जिल वान डाइक ने एक फ्री किक को बखूबी बॉक्स के पार हेड किया और ब्रॉबी ने सही समय पर पहुंचकर गेंद को खाली नेट में डाल दिया । ब्रॉबी का यह फॉर्म उसके दो-गोल के प्रदर्शन के बाद आया है, जो उसने स्वीडन के खिलाफ किया था ।
54वें मिनट में हाज़िम मस्तौरी ने विश्व कप पदार्पण पर गोल करके ट्यूनीशिया के लिए वापसी की उम्मीद जगा दी ।
लेकिन ट्यूनीशिया की यह वापसी टिक नहीं पाई। 62वें मिनट में दूसरा आत्मघाती गोल (जिसका श्रेय डिफेंडर जान पॉल वान हेके को दिया गया) ने नीदरलैंड्स को फिर से दो गोल की बढ़त दिला दी, और स्कोर 3-1 हो गया । इस मैच में टूर्नामेंट का 12वां आत्मघाती गोल दर्ज हुआ, जो विश्व कप के रिकॉर्ड के बराबर है ।
इस परिणाम का ग्रुप F के बाकी मैचों पर काफी प्रभाव पड़ा:
| स्थान | टीम | अंक | जीत | ड्रॉ | हार | GF | GA | GD |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| 1 | नीदरलैंड्स | 7 | 2 | 1 | 0 | 10 | 4 | +6 |
| 2 | जापान | 5 | 1 | 2 | 0 | 7 | 3 | +4 |
| 3 | स्वीडन | 4 | 1 | 1 | 1 | 7 | 7 | 0 |
| 4 | ट्यूनीशिया | 0 | 0 | 0 | 3 | 2 | 12 | -10 |
ट्यूनीशिया का विश्व कप अभियान शुरू से ही बेहद खराब रहा:
ट्यूनीशिया ने 0 अंक, 2 गोल और 12 गोल खाकर टूर्नामेंट से विदाई ली । स्वीडन ने 1938 के बाद पहली बार विश्व कप में पांच गोल किए थे ।
नीदरलैंड्स के पास वह अवांछित उपाधि है जो अब तक विश्व कप नहीं जीतने वाली सबसे अच्छी टीम की है। वे तीन बार फाइनल में पहुंचे हैं – 1974 में पश्चिम जर्मनी से, 1978 में अर्जेंटीना से और 2010 में स्पेन से हारे – और वे एकमात्र ऐसी राष्ट्रीय टीम हैं जो कई फाइनल खेलने के बाद भी कभी टूर्नामेंट नहीं जीत पाई । कोई अन्य राष्ट्र ट्रॉफी उठाए बिना इतनी बार उपविजेता नहीं रहा ।
ट्यूनीशिया के लिए मैच की शुरुआत सपने जैसी नहीं थी। तीसरे मिनट में डेंज़ल डमफ्रीज़ के दाएं से क्रॉस को ट्यूनीशियाई कप्तान एल्लीज़ सखीरी अपने ही गोल में डाल बैठे । यह उनके लिए एक दुःस्वप्न जैसी शुरुआत थी।
इसके चार मिनट बाद ही ब्रायन ब्रॉबी ने टूर्नामेंट में अपना तीसरा गोल करके स्कोर 2-0 कर दिया। वर्जिल वान डाइक ने एक फ्री किक को बखूबी बॉक्स के पार हेड किया और ब्रॉबी ने सही समय पर पहुंचकर गेंद को खाली नेट में डाल दिया । ब्रॉबी का यह फॉर्म उसके दो-गोल के प्रदर्शन के बाद आया है, जो उसने स्वीडन के खिलाफ किया था ।
54वें मिनट में हाज़िम मस्तौरी ने विश्व कप पदार्पण पर गोल करके ट्यूनीशिया के लिए वापसी की उम्मीद जगा दी ।
लेकिन ट्यूनीशिया की यह वापसी टिक नहीं पाई। 62वें मिनट में दूसरा आत्मघाती गोल (जिसका श्रेय डिफेंडर जान पॉल वान हेके को दिया गया) ने नीदरलैंड्स को फिर से दो गोल की बढ़त दिला दी, और स्कोर 3-1 हो गया । इस मैच में टूर्नामेंट का 12वां आत्मघाती गोल दर्ज हुआ, जो विश्व कप के रिकॉर्ड के बराबर है ।
इस परिणाम का ग्रुप F के बाकी मैचों पर काफी प्रभाव पड़ा:
| स्थान | टीम | अंक | जीत | ड्रॉ | हार | GF | GA | GD |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| 1 | नीदरलैंड्स | 7 | 2 | 1 | 0 | 10 | 4 | +6 |
| 2 | जापान | 5 | 1 | 2 | 0 | 7 | 3 | +4 |
| 3 | स्वीडन | 4 | 1 | 1 | 1 | 7 | 7 | 0 |
| 4 | ट्यूनीशिया | 0 | 0 | 0 | 3 | 2 | 12 | -10 |
ट्यूनीशिया का विश्व कप अभियान शुरू से ही बेहद खराब रहा:
ट्यूनीशिया ने 0 अंक, 2 गोल और 12 गोल खाकर टूर्नामेंट से विदाई ली । स्वीडन ने 1938 के बाद पहली बार विश्व कप में पांच गोल किए थे ।
नीदरलैंड्स के पास वह अवांछित उपाधि है जो अब तक विश्व कप नहीं जीतने वाली सबसे अच्छी टीम की है। वे तीन बार फाइनल में पहुंचे हैं – 1974 में पश्चिम जर्मनी से, 1978 में अर्जेंटीना से और 2010 में स्पेन से हारे – और वे एकमात्र ऐसी राष्ट्रीय टीम हैं जो कई फाइनल खेलने के बाद भी कभी टूर्नामेंट नहीं जीत पाई । कोई अन्य राष्ट्र ट्रॉफी उठाए बिना इतनी बार उपविजेता नहीं रहा ।