सबसे पहले DDR4 और DDR5 की कीमतें आसमान छूने लगीं. मई 2026 तक, बेंचमार्क DDR4 8Gb चिप का रेट ऑल-टाइम हाई $20 प्रति यूनिट पर पहुंच गया था, जो पिछले महीने की तुलना में 25% अधिक था . 2026 की शुरुआत में कंज्यूमर DRAM की कीमतों में सैकड़ों प्रतिशत का उछाल आया, जिसे विश्लेषक 'RAMmageddon' कह रहे हैं .
जब DDR4/DDR5 महंगे हो गए और उनकी सप्लाई लंबी खिंच गई, तो कंज़्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स बनाने वाली कंपनियों ने पुराने DDR2 और DDR3 मेमोरी स्टैंडर्ड का रुख किया, ताकि वे अपनी प्रोडक्शन लाइनों को जारी रख सकें . इससे अचानक 2003 में लॉन्च हुए DDR2 की डिमांड बढ़ गई. TrendForce ने पुष्टि की कि DDR2 के कॉन्ट्रैक्ट प्राइस Q2 2026 में 55-60% बढ़े और आगे और बढ़ोतरी तय है .
क्षमता के इस पुनर्वितरण का एक गंभीर भौतिक कारण है. HBM का एक सिंगल बिट बनाने में DDR5 की तुलना में लगभग तीन गुना वेफर क्षमता खर्च होती है. यानी, HBM प्रोडक्शन बढ़ने का सीधा मतलब है कॉमोडिटी DRAM की आउटपुट में कमी . Utmel इसे '3:1 ट्रेड-ऑफ़' कहता है .
यह सप्लाई टाइटनिंग कम से कम 2027 तक जारी रहने की उम्मीद है. ICallin की रिपोर्ट के अनुसार, बड़ी तीनों कंपनियों का HBM पुनर्विन्यास कम से कम 2027 तक DDR4 और DDR5 कॉमोडिटी DRAM को 'संरचनात्मक रूप से भूखा' रखेगा . IDC ने 2026 में DRAM बिट-सप्लाई ग्रोथ केवल 16% रहने का अनुमान लगाया है, जो ऐतिहासिक औसत से काफी कम है .
पुरानी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता पर भी दबाव है. DDR3 की सप्लाई सीमित है, जिससे लंबी अवधि के सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट मुश्किल हो गए हैं . DDR4 और DDR5 अभी भी एलोकेशन कंट्रोल और विस्तारित लीड टाइम के अधीन हैं . हालांकि सैमसंग और SK हाइनिक्स ने DDR4 उत्पादन को 2026 तक बढ़ा दिया है, लेकिन यह ज्यादातर एंटरप्राइज़ और कॉन्ट्रैक्ट कस्टमर्स के लिए पहले से आरक्षित है .
कम्पोनेंट की लागत में भारी उछाल आया है. एक 16Gb DDR5 चिप, जिसकी कीमत सितंबर 2025 में $6.84 थी, दिसंबर 2025 तक बढ़कर $27.20 हो गई . सिर्फ 16GB लैपटॉप मॉड्यूल की मेमोरी की अनुमानित लागत असेंबली और मार्कअप से पहले लगभग $217.60 तक पहुंच गई .
2025 के अंत और 2026 की शुरुआत तक, कई लैपटॉप निर्माताओं ने पुराने सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट के जरिए लागत में हुए उछाल को कुछ हद तक सोख लिया . लेकिन जैसे-जैसे ये बफर खत्म हो रहे हैं, रिटेल कीमतें बढ़ने लगी हैं . Forbes की रिपोर्ट के अनुसार, PC निर्माता मेमोरी कम्पोनेंट की कीमतों में अनिश्चितता के कारण नए मॉडलों की निश्चित कीमत नहीं बता पा रहे थे .
हार्डवेयर निर्माता अब अपने प्रोडक्ट्स में DDR4/DDR5 की जगह DDR2 और DDR3 का उपयोग करने के लिए डिजाइन बदल रहे हैं, जिसका मतलब है कि 2026 में कुछ कंज़्यूमर डिवाइस पुराने और धीमे मेमोरी स्टैंडर्ड के साथ आएंगे . सैमसंग ने सार्वजनिक रूप से चेतावनी दी है कि मेमोरी की कमी 2026 में पूरे इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में कीमतें बढ़ाएगी .
निकट भविष्य में राहत की उम्मीद नहीं है. TrendForce को उम्मीद है कि DRAM की कीमतें कम से कम Q3 2026 तक बढ़ती रहेंगी, और DDR2 में 35-40% की और बढ़ोतरी होगी . SK हाइनिक्स की 2026 की पूरी प्रोडक्शन क्षमता पहले ही बिक चुकी है . कई विश्लेषकों को उम्मीद है कि यह सप्लाई संकट 2027 तक जारी रहेगा, क्योंकि निर्माता AI डिमांड के मजबूत रहने पर हाई-मार्जिन HBM से कम-मार्जिन वाले कॉमोडिटी DRAM की ओर नहीं लौटेंगे .
बाजार की यह एकाग्रता (एकाधिकार जैसी संरचना) लगातार एंटीट्रस्ट जांच को आमंत्रित करती है. जनवरी 2026 में अमेरिका में सैमसंग, माइक्रोन और SK हाइनिक्स के खिलाफ एक प्रस्तावित क्लास-एक्शन मुकदमा दायर किया गया, जिसमें DRAM की कीमतें तय करने की साजिश का आरोप लगाया गया . एक फेडरल जज ने अक्टूबर 2025 में इसी तरह के पहले के दावों को खारिज कर दिया था , लेकिन अपील प्रक्रिया और नए मुकदमे जारी हैं.
इस तरह की जांच का ऐतिहासिक आधार भी है. चीन ने 2018 में भी कीमतों में उछाल के दौरान तीनों निर्माताओं के खिलाफ DRAM मूल्य निर्धारण की जांच शुरू की थी . अमेरिकी न्याय विभाग ने 2007 में DRAM मूल्य निर्धारण साजिश के लिए सैमसंग से $90 मिलियन का समझौता हासिल किया था, और 2000 के दशक में कई कंपनियों ने दोष स्वीकार किया और $729 मिलियन से अधिक का जुर्माना भरा था . दक्षिण कोरियाई अधिकारियों ने कहा है कि वे DRAM की बढ़ती कीमतों पर कार्रवाई करेंगे, जिसमें बाजार और मूल्य निर्धारण की निगरानी शामिल है .
सबसे पहले DDR4 और DDR5 की कीमतें आसमान छूने लगीं. मई 2026 तक, बेंचमार्क DDR4 8Gb चिप का रेट ऑल-टाइम हाई $20 प्रति यूनिट पर पहुंच गया था, जो पिछले महीने की तुलना में 25% अधिक था . 2026 की शुरुआत में कंज्यूमर DRAM की कीमतों में सैकड़ों प्रतिशत का उछाल आया, जिसे विश्लेषक 'RAMmageddon' कह रहे हैं .
जब DDR4/DDR5 महंगे हो गए और उनकी सप्लाई लंबी खिंच गई, तो कंज़्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स बनाने वाली कंपनियों ने पुराने DDR2 और DDR3 मेमोरी स्टैंडर्ड का रुख किया, ताकि वे अपनी प्रोडक्शन लाइनों को जारी रख सकें . इससे अचानक 2003 में लॉन्च हुए DDR2 की डिमांड बढ़ गई. TrendForce ने पुष्टि की कि DDR2 के कॉन्ट्रैक्ट प्राइस Q2 2026 में 55-60% बढ़े और आगे और बढ़ोतरी तय है .
क्षमता के इस पुनर्वितरण का एक गंभीर भौतिक कारण है. HBM का एक सिंगल बिट बनाने में DDR5 की तुलना में लगभग तीन गुना वेफर क्षमता खर्च होती है. यानी, HBM प्रोडक्शन बढ़ने का सीधा मतलब है कॉमोडिटी DRAM की आउटपुट में कमी . Utmel इसे '3:1 ट्रेड-ऑफ़' कहता है .
यह सप्लाई टाइटनिंग कम से कम 2027 तक जारी रहने की उम्मीद है. ICallin की रिपोर्ट के अनुसार, बड़ी तीनों कंपनियों का HBM पुनर्विन्यास कम से कम 2027 तक DDR4 और DDR5 कॉमोडिटी DRAM को 'संरचनात्मक रूप से भूखा' रखेगा . IDC ने 2026 में DRAM बिट-सप्लाई ग्रोथ केवल 16% रहने का अनुमान लगाया है, जो ऐतिहासिक औसत से काफी कम है .
पुरानी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता पर भी दबाव है. DDR3 की सप्लाई सीमित है, जिससे लंबी अवधि के सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट मुश्किल हो गए हैं . DDR4 और DDR5 अभी भी एलोकेशन कंट्रोल और विस्तारित लीड टाइम के अधीन हैं . हालांकि सैमसंग और SK हाइनिक्स ने DDR4 उत्पादन को 2026 तक बढ़ा दिया है, लेकिन यह ज्यादातर एंटरप्राइज़ और कॉन्ट्रैक्ट कस्टमर्स के लिए पहले से आरक्षित है .
कम्पोनेंट की लागत में भारी उछाल आया है. एक 16Gb DDR5 चिप, जिसकी कीमत सितंबर 2025 में $6.84 थी, दिसंबर 2025 तक बढ़कर $27.20 हो गई . सिर्फ 16GB लैपटॉप मॉड्यूल की मेमोरी की अनुमानित लागत असेंबली और मार्कअप से पहले लगभग $217.60 तक पहुंच गई .
2025 के अंत और 2026 की शुरुआत तक, कई लैपटॉप निर्माताओं ने पुराने सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट के जरिए लागत में हुए उछाल को कुछ हद तक सोख लिया . लेकिन जैसे-जैसे ये बफर खत्म हो रहे हैं, रिटेल कीमतें बढ़ने लगी हैं . Forbes की रिपोर्ट के अनुसार, PC निर्माता मेमोरी कम्पोनेंट की कीमतों में अनिश्चितता के कारण नए मॉडलों की निश्चित कीमत नहीं बता पा रहे थे .
हार्डवेयर निर्माता अब अपने प्रोडक्ट्स में DDR4/DDR5 की जगह DDR2 और DDR3 का उपयोग करने के लिए डिजाइन बदल रहे हैं, जिसका मतलब है कि 2026 में कुछ कंज़्यूमर डिवाइस पुराने और धीमे मेमोरी स्टैंडर्ड के साथ आएंगे . सैमसंग ने सार्वजनिक रूप से चेतावनी दी है कि मेमोरी की कमी 2026 में पूरे इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में कीमतें बढ़ाएगी .
निकट भविष्य में राहत की उम्मीद नहीं है. TrendForce को उम्मीद है कि DRAM की कीमतें कम से कम Q3 2026 तक बढ़ती रहेंगी, और DDR2 में 35-40% की और बढ़ोतरी होगी . SK हाइनिक्स की 2026 की पूरी प्रोडक्शन क्षमता पहले ही बिक चुकी है . कई विश्लेषकों को उम्मीद है कि यह सप्लाई संकट 2027 तक जारी रहेगा, क्योंकि निर्माता AI डिमांड के मजबूत रहने पर हाई-मार्जिन HBM से कम-मार्जिन वाले कॉमोडिटी DRAM की ओर नहीं लौटेंगे .
बाजार की यह एकाग्रता (एकाधिकार जैसी संरचना) लगातार एंटीट्रस्ट जांच को आमंत्रित करती है. जनवरी 2026 में अमेरिका में सैमसंग, माइक्रोन और SK हाइनिक्स के खिलाफ एक प्रस्तावित क्लास-एक्शन मुकदमा दायर किया गया, जिसमें DRAM की कीमतें तय करने की साजिश का आरोप लगाया गया . एक फेडरल जज ने अक्टूबर 2025 में इसी तरह के पहले के दावों को खारिज कर दिया था , लेकिन अपील प्रक्रिया और नए मुकदमे जारी हैं.
इस तरह की जांच का ऐतिहासिक आधार भी है. चीन ने 2018 में भी कीमतों में उछाल के दौरान तीनों निर्माताओं के खिलाफ DRAM मूल्य निर्धारण की जांच शुरू की थी . अमेरिकी न्याय विभाग ने 2007 में DRAM मूल्य निर्धारण साजिश के लिए सैमसंग से $90 मिलियन का समझौता हासिल किया था, और 2000 के दशक में कई कंपनियों ने दोष स्वीकार किया और $729 मिलियन से अधिक का जुर्माना भरा था . दक्षिण कोरियाई अधिकारियों ने कहा है कि वे DRAM की बढ़ती कीमतों पर कार्रवाई करेंगे, जिसमें बाजार और मूल्य निर्धारण की निगरानी शामिल है .