23 जून, 2026 को मेटा की ओवरसाइट बोर्ड ने Instagram से एक AI से बनी अश्लील डीपफेक वीडियो हटाने का आदेश दिया और आम लोगों, खासकर गैर सार्वजनिक हस्तियों की सुरक्षा के लिए बड़ी नीतिगत सुधारों की मांग की। बोर्ड ने AI जनित नकली तस्वीरों/वीडियो को 'डिफ़ॉल्ट रूप से गैर सहमति वाला' मानने, पीड़ित की ओर से भरोसेमंद संपर्कों को...
शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: Search & fact-check with cited sources for What did Meta's Oversight Board rule on June 23 regarding an AI-generated sexualized deepfake vid. Article summary: On June 23, 2026, Meta's Oversight Board told Meta to remove an AI-generated sexualized video of a woman on Instagram and called for stronger protections for ordinary, non-public people targeted by sexualized deepfakes [. Topic tags: general, general web, education, user generated. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, cha
23 जून, 2026 को मेटा की स्वतंत्र ओवरसाइट बोर्ड (Oversight Board) ने एक ऐतिहासिक फैसले में मेटा को आदेश दिया कि वह Instagram से एक महिला का AI जनित (AI-generated) अश्लील डीपफेक वीडियो (sexualized deepfake video) तुरंत हटाए । बोर्ड ने मेटा के उस शुरुआती आकलन को गलत बताया जिसमें कहा गया था कि पोस्ट के 'बिना सहमति' (non-consensual) होने के कोई संकेत नहीं हैं
। इस फैसले के साथ ही बोर्ड ने आम लोगों, खासकर महिलाओं और गैर-सार्वजनिक हस्तियों (non-public figures) को इस प्रकार के AI शोषण से बचाने के लिए कई बड़ी नीतिगत सिफारिशें भी कीं
।
एक यूज़र ने ओवरसाइट बोर्ड में अपील की थी कि उसने एक ऐसी पोस्ट रिपोर्ट की थी जो उसकी एक दोस्त का AI से बना अश्लील वीडियो था, जो उसकी सहमति के बिना बनाया गया था और उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा रहा था । मेटा ने शुरू में इस पोस्ट को हटाने से इनकार कर दिया था, यह कहते हुए कि इसमें 'बिना सहमति' के कोई सबूत नहीं है
। बोर्ड ने मेटा के इस फैसले को पलट दिया और वीडियो को तुरंत हटाने का आदेश दिया
।
बोर्ड की सिफारिशों का मकसद मेटा की नीतियों को 'फ़ोटोशॉप के ज़माने' से निकालकर AI के दौर में लाना है । प्रमुख बदलाव इस प्रकार हैं:
बोर्ड ने स्पष्ट कहा कि यौन संदर्भों (sexualized contexts) में AI से बनाई गई किसी व्यक्ति की नकल (impersonation) को 'डिफ़ॉल्ट रूप से गैर-सहमति वाला' (non-consensual by default) माना जाना चाहिए । इसका मतलब है कि अब पीड़ित को यह साबित करने की ज़रूरत नहीं होगी कि सामग्री उसकी सहमति के बिना बनाई गई है, बल्कि प्लेटफ़ॉर्म को ही इसे गैर-कानूनी मानना होगा
। बोर्ड ने इसे मेटा की 'एडल्ट सेक्सुअल एक्सप्लॉइटेशन' (Adult Sexual Exploitation) नीति में जोड़ने की सिफारिश की
।
एक बड़ी प्रक्रियात्मक सिफारिश यह है कि यूज़र 'कनेक्टेड अकाउंट्स' (connected accounts) नामित कर सकेंगे - जैसे कि भरोसेमंद दोस्त या परिवार के सदस्य - जो पीड़ित की ओर से गैर-सहमति वाली अंतरंग छवियों (non-consensual intimate imagery) जैसे उल्लंघनों की रिपोर्ट कर सकेंगे । इससे उन समस्याओं का समाधान होगा जहाँ पीड़ित को सामग्री के बारे में पता ही नहीं होता या वह आघात या डर के कारण खुद रिपोर्ट नहीं कर पाती
।
बोर्ड ने मेटा से कहा कि वह AI जनित गैर-सहमति वाली यौन छवियों/वीडियो के लिए एक समर्पित, वैश्विक रिपोर्टिंग श्रेणी (dedicated global reporting category) बनाए । फिलहाल, ऐसी सामग्री को धमकाने और उत्पीड़न (bullying and harassment) के एक सामान्य नियम के तहत वर्गीकृत किया जाता है, जिससे रिपोर्ट करना और ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है
।
बोर्ड ने मेटा की 'डिरॉगेटरी सेक्सुअलाइज़्ड फ़ोटोशॉप' (derogatory sexualized photoshop) जैसी पुरानी और अपमानजनक शब्दावली की आलोचना की है । बोर्ड चाहता है कि मेटा स्पष्ट और सटीक शब्दों का इस्तेमाल करे, जो AI के ज़माने के हिसाब से हों और सामग्री की 'गैर-सहमति' वाली प्रकृति पर ज़ोर दें, न कि इसे बनाने के तरीके (जैसे फ़ोटोशॉप) पर
।
एक अन्य AI-सामग्री मामले में, बोर्ड ने मेटा से AI जनित सामग्री की पहचान के लिए स्केलेबल टूल लागू करने को कहा, जिसमें C2PA कंटेंट क्रेडेंशियल्स स्टैंडर्ड (मीडिया की उत्पत्ति और संशोधनों को ट्रैक करने का एक मानक) अपनाना शामिल है । बोर्ड ने पाया कि मेटा का मौजूदा सिस्टम यूज़र द्वारा खुद लेबल करने पर बहुत अधिक निर्भर है और इसमें मज़बूत स्वचालित पहचान (automated detection) का अभाव है, खासकर वीडियो और ऑडियो के लिए
।
इस फैसले का केंद्रबिंदु आम, गैर-सार्वजनिक लोगों (non-public figures) की सुरक्षा में कमी को दूर करना था। बोर्ड ने जोर देकर कहा कि जब कोई आम आदमी या औरत इस तरह के AI शोषण का शिकार होता है, तो उस पर खुद यह साबित करने का बोझ होता है कि सामग्री उसकी सहमति के बिना बनाई गई है, जबकि सार्वजनिक हस्तियों (public figures) के पास ऐसा करने के लिए संसाधन और सार्वजनिक सहायता होती है । यह मामला एक महिला के AI जनित यौन शोषण से जुड़ा था, जिसकी शिकायत उसके एक दोस्त ने की थी
।
बोर्ड ने यह भी स्वीकार किया कि इस तरह के डीपफेक महिलाओं और लड़कियों को असमान रूप से नुकसान पहुंचाते हैं । मज़बूत स्वचालित पहचान, सबूत के बोझ में बदलाव और स्पष्ट नीतियों की मांग करके, बोर्ड ने लैंगिक-आधारित ऑनलाइन शोषण (gender-based online abuse) की व्यवस्थित प्रकृति को संबोधित करने की कोशिश की
।
मेटा को ओवरसाइट बोर्ड की सिफारिशों पर 60 दिनों के भीतर जवाब देना है । जहाँ व्यक्तिगत मामले (वीडियो हटाने) का फैसला बाध्यकारी (binding) है, वहीं व्यापक नीतिगत सिफारिशें बाध्यकारी नहीं हैं, लेकिन इनका बड़ा सार्वजनिक और प्रतिष्ठात्मक महत्व होता है
। यह फैसला 2024 और 2025 के पिछले बोर्ड फैसलों पर आधारित है, जिनमें मेटा की डीपफेक नीतियों को 'असंगत' (incoherent) और 'पर्याप्त रूप से स्पष्ट नहीं' (not sufficiently clear) पाया गया था
।
Studio Global AI
इस पृष्ठ में एक स्रोत-समर्थित उत्तर शामिल है जिसे आप Studio Global के अंदर जारी रख सकते हैं।
23 जून, 2026 को मेटा की ओवरसाइट बोर्ड ने Instagram से एक AI से बनी अश्लील डीपफेक वीडियो हटाने का आदेश दिया और आम लोगों, खासकर गैर सार्वजनिक हस्तियों की सुरक्षा के लिए बड़ी नीतिगत सुधारों की मांग की।
23 जून, 2026 को मेटा की ओवरसाइट बोर्ड ने Instagram से एक AI से बनी अश्लील डीपफेक वीडियो हटाने का आदेश दिया और आम लोगों, खासकर गैर सार्वजनिक हस्तियों की सुरक्षा के लिए बड़ी नीतिगत सुधारों की मांग की। बोर्ड ने AI जनित नकली तस्वीरों/वीडियो को 'डिफ़ॉल्ट रूप से गैर सहमति वाला' मानने, पीड़ित की ओर से भरोसेमंद संपर्कों को शिकायत दर्ज कराने की अनुमति देने, और AI जनित यौन शोषण सामग्री के लिए एक वैश्विक रिपोर्टिंग श्रेणी ब...