6 नवंबर 2026 को कच्चा तेल अप्रैल 2020 के बाद अपनी सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट की ओर था। इसकी मुख्य वजह यह थी कि निवेशकों ने अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद ईरान युद्ध के लंबा खिंचने और तेल-सप्लाई बाधित रहने के जोखिम को कम मानना शुरू किया। डेमोक्रेट्स ने कांग्रेस के दोनों सदनों पर नियंत्रण हासिल किया; बाजार में यह उम्मीद बनी कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर युद्ध को जल्द खत्म करने का दबाव बढ़ सकता है। शेयर बाज़ार की बिकवाली ने भी तेल पर दबाव डाला।
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लेकिन यह कीमतों में आई गिरावट किसी समझौते या सामान्य तेल-ढुलाई की पुष्टि नहीं थी। मध्य पूर्व में जहाज़ों पर हमले जारी थे और इन घटनाओं ने तेल की कीमतों को कुछ सहारा दिया।
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16% और करीब 13% की गिरावट में फर्क क्या है?
ब्रेंट की साप्ताहिक गिरावट के आंकड़े इस बात पर निर्भर कर सकते हैं कि तुलना किस वायदा अनुबंध से की जा रही है। वायदा बाज़ार में एक कॉन्ट्रैक्ट की अवधि खत्म होने पर कारोबार अगले महीने के कॉन्ट्रैक्ट में चला जाता है—यहां दिसंबर से जनवरी में। लगातार अगले निकटतम कॉन्ट्रैक्ट को जोड़कर बनाया गया “फ्रंट-मंथ” आंकड़ा इस बदलाव से प्रभावित हो सकता है; जनवरी कॉन्ट्रैक्ट की तुलना अलग आधार देती है। इसलिए दोनों प्रतिशत सीधे-सीधे एक ही माप नहीं हैं।
6 नवंबर की रिपोर्टों में फ्रंट-मंथ ब्रेंट के लिए करीब 16% की साप्ताहिक गिरावट बताई गई, जबकि दूसरी रिपोर्टिंग में गिरावट 13% से अधिक बताई गई। उपलब्ध स्रोत दिसंबर-से-जनवरी रोल का सटीक गणित स्वतंत्र रूप से पुष्ट नहीं करते, इसलिए इन आंकड़ों को अलग तुलना-पद्धतियों और रिपोर्टिंग समय के संदर्भ में पढ़ना बेहतर है।
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बाजार ने शांति की उम्मीद खरीदी, पक्की शांति नहीं
ब्रेंट गुरुवार की तेज गिरावट के बाद उछला और शुक्रवार को भी कारोबार में सुधार दिखा। बाजार एक ओर युद्ध खत्म होने की संभावना तौल रहा था, तो दूसरी ओर जहाज़ों पर हमलों और तेल की ढुलाई में संभावित बाधाओं को भी देख रहा था।
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3 इसीलिए साप्ताहिक गिरावट के बीच दिन-प्रतिदिन तेज उतार-चढ़ाव संभव था।
कूटनीतिक बातचीत की खबरों से सप्लाई जोखिम कम होने की उम्मीद जरूर जगी, लेकिन बातचीत और सामान्य तेल-प्रवाह एक बात नहीं हैं। ईरान की ओर से मध्यस्थों के प्रस्तावों की समीक्षा और क़तर की कोशिशें संभावित रास्ते का संकेत थीं; जब तक भरोसेमंद शिपिंग और डिलीवरी बहाल न हों, बाजार के लिए जोखिम खत्म नहीं होता।
जोखिम का आकलन अब भी दोतरफा था
Eurasia Group ने ईरान पर नए अमेरिकी हमलों की संभावना 65% से घटाकर 60% की, लेकिन समझौते की संभावना भी 20% से घटाकर 10% कर दी। उसके अनुमान में गतिरोध जारी रहने की संभावना 15% से बढ़कर 30% हो गई। यानी कम कीमतें यह नहीं बता रही थीं कि बाजार को समझौता तय लग रहा है; निवेशक युद्ध-विराम की उम्मीद और फिर से तनाव बढ़ने के जोखिम, दोनों को तौल रहे थे।
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Gelber and Associates ने भी आगाह किया कि कूटनीतिक प्रगति से भरोसेमंद जहाज़रानी और डिलीवरी सुनिश्चित होने से पहले तेल-प्रवाह को तेजी से सामान्य मान लेना जल्दबाज़ी होगी। दूसरी ओर, Citi Research ने कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य पूरी तरह खुलने और लॉजिस्टिक्स लागत सामान्य होने पर तेल की कीमतों में और गिरावट आ सकती है। ये आकलन अलग-अलग संभावित स्थितियों पर आधारित थे, न कि किसी पक्के नतीजे पर।
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निचोड़: उस सप्ताह तेल की गिरावट का बड़ा कारण युद्ध के जल्द थमने की उम्मीद थी, जिसे अमेरिकी चुनावों ने हवा दी। लेकिन जहाज़ों पर जारी हमलों और समझौते की अनिश्चितता का मतलब था कि कीमतें गिरने के बावजूद सप्लाई जोखिम बना हुआ था।
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