गुरुवार, 5 नवंबर को बम की झूठी धमकियों ने यूरोप की कम-से-कम 27 उड़ानों को प्रभावित किया। Reuters के आंकड़े का हवाला देते हुए CNBC ने यह संख्या बताई। कुछ विमानों को अनियोजित रूप से उतरना पड़ा, जबकि कुछ को सैन्य लड़ाकू विमानों ने एस्कॉर्ट किया। जांच में विस्फोटक नहीं मिले, लेकिन धमकियों के पीछे कौन था और क्या सभी घटनाएं आपस में जुड़ी थीं—यह स्पष्ट नहीं हुआ।
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उड़ानों पर क्या असर पड़ा?
धमकी मिलने के बाद हर उड़ान के लिए अलग सुरक्षा कदम उठाए गए। कुछ विमानों का रास्ता बदला गया, तो कुछ अपने गंतव्य तक पहुंचे लेकिन उन्हें सैन्य एस्कॉर्ट मिला। विमानों की सुरक्षा जांच भी की गई।
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- Aer Lingus: डबलिन से रोम जा रही उड़ान EI402 को फ्रांस के नॉरमैंडी क्षेत्र में Évreux सैन्य एयर बेस की ओर मोड़ा गया। विमान सुरक्षित उतरा। उसमें सवार सभी 151 यात्री और चालक दल के छह सदस्य सुरक्षित थे; बम-निष्क्रियकरण दल ने विमान की जांच की।
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- Ryanair: मैड्रिड, कोपेनहेगन और लंदन स्टैनस्टेड से सोफिया जा रही तीन उड़ानों को धमकी मिली। बुल्गारिया के लड़ाकू विमानों ने उन्हें एस्कॉर्ट किया और जांच में विस्फोटक नहीं मिले।
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- Finnair: कंपनी ने बताया कि हेलसिंकी से रोम और वियना जा रही उड़ानों को धमकियां मिलीं। रोम जा रही उड़ान को इटली के लड़ाकू विमानों ने एस्कॉर्ट किया और वह रोम पहुंची। धमकियां झूठी निकलीं।
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- Wizz Air: TheJournal.ie की रिपोर्ट के अनुसार, मिलान से वारसा जा रही एक उड़ान का मार्ग बदलकर उसे वियना ले जाया गया।
अन्य उड़ानों और हवाई अड्डों को लेकर भी धमकियों की खबरें आईं। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों से हर घटना का पूरा ब्यौरा नहीं मिलता और Air Europa या Iberia की उड़ानों पर असर के विशिष्ट दावों की पुष्टि नहीं होती।
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Aer Lingus की उड़ान को Évreux क्यों ले जाया गया?
फ्रांस के अधिकारियों के मुताबिक, बम की धमकी मिलने के बाद डबलिन–रोम उड़ान का मार्ग बदला गया। फ्रांसीसी सैन्य विमान उसे Évreux एयर बेस तक ले गए, जहां वह सुरक्षित उतरी और उसकी जांच की गई।
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फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबास्तियन लेकोर्नू के कार्यालय ने कहा कि विमान को रोकने के लिए सैन्य विमान भेजे गए, क्योंकि पायलट ने अधिकारियों के साथ “उम्मीद के मुताबिक सहयोग नहीं किया।” क्षेत्रीय अभियोजक के मुताबिक, पायलट और सह-पायलट से पूछताछ की गई। एक अलग रिपोर्ट में आरोप था कि पायलट ने शुरू में एयर बेस पर उतरने से इनकार किया था। लेकिन उपलब्ध जानकारी से कॉकपिट में ठीक-ठीक क्या हुआ या चालक दल ने वैसा कदम क्यों उठाया, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं होती।
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रिपोर्टों के अनुसार यात्री और चालक दल सुरक्षित थे। लेकिन मोड़कर उतारने और सुरक्षा जांच के दौरान उनका अनुभव कैसा रहा, इसका विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है।
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धमकी वाले संदेशों में क्या था?
AFP के मुताबिक, रोम और सोफिया के हवाई अड्डों को भेजे गए कुछ संदेशों में महिलाओं के प्रति अपमानजनक भाषा थी और वे “Male State के लड़ाकों” के नाम से भेजे गए होने का दावा करते थे। Reuters की एक रिपोर्ट में कहा गया कि एक ईमेल में हेलसिंकी और डबलिन से आने वाली उड़ानों में उपकरण रखे होने और उनके 60 मिनट में फटने की बात कही गई थी।
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“Male State” नाम रूस के एक महिला-विरोधी आंदोलन से मिलता-जुलता है, जिसे रिपोर्टों में रूस में प्रतिबंधित और 2021 में चरमपंथी घोषित बताया गया है। लेकिन किसी धमकी में संगठन का नाम लिखे होने भर से यह साबित नहीं होता कि संदेश उसी संगठन या उसके सदस्यों ने भेजा था। उपलब्ध रिपोर्टें न तो संदेश भेजने वालों की पहचान करती हैं और न ही यह पुष्टि करती हैं कि वे सभी घटनाएं एक-दूसरे से जुड़ी थीं।
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ब्रिटेन की परिवहन मंत्री हीदी अलेक्जेंडर ने इन्हें “दुर्भावनापूर्ण झूठी धमकियां” कहा। यूरोपीय संघ के परिवहन आयुक्त अपोस्तोलोस त्सित्सिकोस्तास ने धमकियों को अस्वीकार्य बताया, लेकिन कहा कि घटनाओं के आपस में जुड़े होने पर निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी होगी।
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एक ही हफ्ते में धमकियों की दूसरी बड़ी लहर
5 नवंबर की घटनाओं से पहले भी इसी हफ्ते धमकियां मिली थीं। Euronews के अनुसार, मंगलवार को करीब 27 उड़ानों को निशाना बनाया गया था और वारसा का एक हवाई अड्डा कुछ समय के लिए बंद करना पड़ा था।
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5 नवंबर को प्रभावित उड़ानों की प्रकाशित संख्याएं अलग-अलग हैं। कुछ रिपोर्टों ने एक दर्जन से अधिक उड़ानों का आंकड़ा दिया, जबकि Reuters, CNBC और RTÉ ने कम-से-कम 27 उड़ानों की बात कही। इसलिए इन आंकड़ों को अलग-अलग प्रकाशित अनुमान समझना चाहिए—एक ही, स्वतंत्र रूप से सत्यापित अंतिम संख्या नहीं।
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फिलहाल इतना साफ है कि धमकियों से हवाई यातायात में खासा व्यवधान हुआ और एहतियातन सुरक्षा जांच की गई। जांच में विस्फोटक नहीं मिले, लेकिन धमकियां किसने भेजीं और क्या उनके पीछे कोई साझा साजिश थी, यह अधिकारियों ने स्थापित नहीं किया है।
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