चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने यूरोपीय संघ (ईयू) के नए आयात शुल्कों पर चिंता जताई है। 5 नवंबर को मंत्रालय की प्रवक्ता हुआंग लिंग ने कहा कि चीन इन कदमों को लेकर चिंतित है और ईयू को इनके असर का सावधानी से आकलन करना चाहिए। उन्होंने ई-कॉमर्स समेत अन्य क्षेत्रों में चीन–ईयू सहयोग के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनाने की भी अपील की।
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हुआंग ने सीमा-पार ई-कॉमर्स को अंतरराष्ट्रीय व्यापार का नया तरीका बताते हुए कहा कि इससे दुनिया भर के कारोबारों और उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प मिलते हैं। उपलब्ध रिपोर्ट में उन्होंने Shein या Temu का नाम लेकर बात नहीं की और न ही किसी खास चीनी निर्यातक पर असर का विवरण दिया। इन प्लेटफॉर्म का उल्लेख ईयू के शुल्कों पर कुछ अन्य रिपोर्टों में है—यह हुआंग के बयान से अलग बात है।
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€2 फीस और €3 ड्यूटी में क्या फर्क है?
ये दो अलग शुल्क हैं और इनके लागू होने के नियम भी अलग हैं:
- €3 कस्टम ड्यूटी: 1 जुलाई 2026 से ईयू के बाहर से आने वाले उन कम-मूल्य के कंसाइनमेंट पर अस्थायी रूप से €3 प्रति वस्तु की ड्यूटी लगती है जिनका आंतरिक मूल्य €150 तक है। इससे पहले इन कंसाइनमेंट को कस्टम ड्यूटी से छूट थी। यह तयशुदा ड्यूटी 1 जुलाई 2028 तक लागू रहने वाली है; उसके बाद सामान के प्रकार के अनुसार सामान्य कस्टम ड्यूटी लागू होंगी।
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- €2 हैंडलिंग फीस: 1 नवंबर से ईयू के बाहर से भेजी जाने वाली पात्र ऑनलाइन खरीद पर यह फीस लगती है। यह सामान के मूल्य की परवाह किए बिना लागू होती है और पार्सल की संख्या के बजाय सामान की श्रेणी या कस्टम घोषणा की संबंधित लाइन के आधार पर वसूली जाती है।
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मसलन, एक पार्सल में एक ही श्रेणी के टी-शर्ट हों तो €2 की हैंडलिंग फीस लगेगी। अगर उसी पार्सल में टी-शर्ट और टोपी—दो अलग श्रेणियां—हों, तो फीस €4 होगी। यह उदाहरण सिर्फ €2 वाली हैंडलिंग फीस का है; इसमें लागू कस्टम ड्यूटी या अन्य शुल्क शामिल नहीं हैं।
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ईयू संसद के अनुसार, हैंडलिंग फीस वही इकाई देती है जो उस पार्सल के अन्य कस्टम शुल्कों के भुगतान के लिए जिम्मेदार है। इससे यह स्पष्ट होता है कि कस्टम प्रक्रिया में भुगतान की जिम्मेदारी किसकी है, लेकिन यह तय नहीं होता कि विक्रेता या प्लेटफॉर्म लागत खुद उठाएगा या ग्राहकों तक पहुंचाएगा।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, हैंडलिंग फीस स्थायी और वापस न की जाने वाली है—यहां तक कि सामान लौटाने पर भी। यह दावा हैंडलिंग फीस के बारे में है; उपलब्ध जानकारी से कस्टम ड्यूटी के रिफंड पर कोई सामान्य नियम स्थापित नहीं होता।
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ईयू ने फीस क्यों लगाई?
यूरोपीय आयोग के अनुसार, हैंडलिंग फीस का मकसद कस्टम अधिकारियों की बढ़ती लागत की भरपाई करना है। इसमें आयात की निगरानी के लिए जरूरी डिजिटल संसाधन और कर्मचारियों का काम शामिल है।
पार्सलों की संख्या भी इस बहस का एक अहम हिस्सा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले वर्ष €150 से कम मूल्य वाले 5.8 अरब पार्सल ईयू में दाखिल हुए—यह उससे पहले के वर्ष से 26% अधिक था। रिपोर्ट ने यूरोपीय आयोग के हवाले से यह भी कहा कि आयोग का अनुमान था कि इनमें से अधिकतर पार्सलों का मूल्य कस्टम ड्यूटी से बचने के लिए कम बताया गया था।
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रॉयटर्स ने यह भी रिपोर्ट किया कि कम लागत वाले ई-कॉमर्स पार्सलों को निशाना बनाने वाले ईयू शुल्क 2028 से 2034 तक हर साल ईयू बजट के लिए €6 अरब जुटा सकते हैं। यह अनुमानित राजस्व है, अब तक वसूली गई रकम नहीं।
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ये आंकड़े बताते हैं कि ईयू बड़ी संख्या में कम-मूल्य के आयात को संसाधित करने की लागत पर ध्यान क्यों दे रहा है। हालांकि, उनसे यह तय नहीं होता कि नए शुल्कों का अंतिम बोझ उपभोक्ताओं पर कितना पड़ेगा या व्यापार का कितना हिस्सा दूसरी जगह जाएगा। चीन ने अपने बयान में शुल्कों के असर का सावधानी से आकलन करने और सहयोग जारी रखने की बात कही।
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