NASA की Neil Gehrels Swift वेधशाला ने 4 नवंबर 2026 को सुबह 7:39 बजे EST (12:39 UTC) पर पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश किया। अमेरिकी स्पेस फोर्स ने इस घटना को ट्रैक किया और NASA ने समय तथा स्थान की पुष्टि की: प्रवेश उत्तर सुमात्रा, इंडोनेशिया के ऊपर हुआ। इस अनियंत्रित वापसी के साथ करीब 22 साल का मिशन खत्म हुआ—जबकि इसे मूल रूप से दो साल के लिए भेजा गया था।
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Swift कब और कहाँ वायुमंडल में लौटी?
NASA के अनुसार, Swift ने लगभग 3.4° उत्तरी अक्षांश और 98.6° पूर्वी देशांतर पर वायुमंडल में प्रवेश किया। ये निर्देशांक उस जगह को बताते हैं जहाँ वेधशाला ने वायुमंडल में प्रवेश किया था; इनसे यह साबित नहीं होता कि उसका कोई मलबा वहीं गिरा।
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पहले के अनुमानों में संभावित बचे हुए टुकड़ों के गिरने की जगह भूमध्य रेखा के आसपास 20.6° उत्तर से 20.6° दक्षिण अक्षांश के बीच बताई गई थी। इस पट्टी का बड़ा हिस्सा समुद्र पर है, लेकिन इसमें कुछ भूभाग भी आते हैं।
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पहले के अनुमान और वास्तविक समय
Swift की कक्षा नीचे आती रही, इसलिए उसके वायुमंडल में प्रवेश के समय के अनुमान भी बदलते रहे। 2 नवंबर को NASA ने अमेरिकी स्पेस फोर्स का अनुमान बताया था: 4 नवंबर को लगभग 08:30 UTC, जिसमें 11 घंटे की अनिश्चितता थी। Aerospace Corporation का अनुमान 09:11 UTC था, जिसमें करीब 12 घंटे का अंतर संभव बताया गया था। Swift का वास्तविक प्रवेश समय—12:39 UTC—दोनों अनुमानित अवधियों के भीतर था।
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उपग्रहों की कक्षाओं पर नजर रखने वाले Jonathan McDowell ने स्पेस फोर्स के ट्रैकिंग डेटा के आधार पर प्रवेश का समय और स्थान बताया। हालांकि उपलब्ध रिपोर्टिंग में उनके बदलते अनुमानों का पूरा क्रम नहीं है और न ही इंडोनेशिया की BRIN एजेंसी की सलाहों से तुलना करने के लिए पर्याप्त जानकारी है।
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NASA ने पृथ्वी पर किसी व्यक्ति को नुकसान पहुँचने की आशंका लगभग 2,100 में 1 बताई थी। यह दुनिया भर में इस घटना से किसी को नुकसान होने का अनुमान था—हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग जोखिम का आंकड़ा नहीं।
करीब 3,200 पाउंड वजनी वेधशाला का अधिकांश हिस्सा वायुमंडल में जल जाने की उम्मीद थी। NASA के मिशन के मुख्य वैज्ञानिक Brad Cenko ने कहा था कि सघन टंगस्टन के कुछ हिस्से और दर्पण के कुछ टुकड़े बच सकते हैं। लेकिन उपलब्ध रिपोर्टिंग में किसी मलबे के बरामद होने की पुष्टि नहीं है।
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कक्षा नीचे क्यों आई?
Swift की कक्षा धीरे-धीरे नीचे होती गई क्योंकि पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल का खिंचाव बढ़ रहा था। NASA के अनुसार, 20 अक्टूबर तक वेधशाला पृथ्वी से करीब 171 मील (275 किलोमीटर) की ऊँचाई पर आ गई थी। वहाँ बढ़ते खिंचाव के बीच वह अपने दूरबीनों को स्थिर रखने के लिए पर्याप्त भरपाई नहीं कर पा रही थी; इसके कुछ समय बाद विज्ञान संबंधी काम रोक दिया गया।
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हाल के वर्षों में तीव्र सौर गतिविधि ने भी वायुमंडलीय खिंचाव बढ़ाने और कक्षा नीचे लाने में योगदान दिया। NASA ने Swift की कक्षा ऊँची करने के लिए बचाव प्रयास भी कराया था, लेकिन निजी LINK यान प्रक्षेपण के बाद समस्याओं में घिर गया और प्रयास सफल नहीं हुआ। नतीजतन Swift की कक्षा बढ़ाने वाला बचाव नहीं हो सका। उपलब्ध स्रोत LINK की विफलता के सभी तकनीकी विवरण नहीं देते, इसलिए उसके प्रणोदन तंत्र या अन्य प्रणालियों के बारे में अधिक विशिष्ट दावा करना उपलब्ध सबूतों से आगे जाना होगा।
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दो साल का मिशन, करीब 22 साल की उपलब्धियाँ
Swift को 20 नवंबर 2004 को गामा-किरण विस्फोटों का अध्ययन करने के लिए लॉन्च किया गया था। उसका नियोजित मिशन दो साल का था, लेकिन उसने करीब 22 साल तक ब्रह्मांड का अवलोकन किया। NASA के मुताबिक, उसने 2,000 से अधिक गामा-किरण विस्फोटों का पता लगाया और 1,400 से अधिक सुपरनोवा का अध्ययन किया। उसने ब्लैक होल द्वारा तारों के टूटने की घटनाएँ देखीं, सक्रिय आकाशगंगाओं पर नजर रखी, पूरे आकाश का एक्स-रे सर्वेक्षण किया और क्षुद्रग्रहों तथा धूमकेतुओं का अध्ययन किया।
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मिशन के आखिरी दौर में भी Swift ने सैकड़ों वैज्ञानिक लक्ष्यों का अवलोकन किया। इनमें तारों के विस्फोटों के अवशेष, दूर की आकाशगंगाओं में सक्रिय विशालकाय ब्लैक होल और धूमकेतु शामिल थे। उसका आखिरी अवलोकन 20 अक्टूबर 2026 को हुआ।
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वायुमंडल में प्रवेश के साथ Swift का अवलोकन कार्य भले ही थम गया हो, लेकिन उसका वैज्ञानिक रिकॉर्ड बना हुआ है। NASA के अनुसार, इसके संग्रह में करीब 22 साल के ब्रह्मांडीय विस्फोटों के माप, कई तरंगदैर्घ्यों पर लिए गए स्पेक्ट्रम और 15 लाख से अधिक चित्र हैं—जिनका वैज्ञानिक अध्ययन जारी रह सकता है।
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