यूरोपीय संसद की परिवहन और पर्यावरण समितियों ने 4 नवंबर 2026 को बड़ी कंपनियों के वाहन बेड़ों को स्वच्छ बनाने के प्रस्ताव का समर्थन किया। मतदान 89–29 से हुआ और चार सदस्य अनुपस्थित रहे। लेकिन आयोग के मूल प्रस्ताव से एक अहम बदलाव यह है कि सदस्य देशों के लिए स्वच्छ वाहनों के पंजीकरण के लक्ष्य अब बाध्यकारी न्यूनतम शर्तों के बजाय “आकांक्षी” लक्ष्य होंगे।
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यानी लक्ष्य तय होंगे, पर उनसे यह गारंटी नहीं मिलेगी कि हर देश निश्चित न्यूनतम हिस्सेदारी हासिल करेगा। ये लक्ष्य देशों में नई कॉरपोरेट गाड़ियों के पंजीकरण से जुड़े हैं—हर बड़ी कंपनी पर सीधे लागू होने वाला एक समान खरीद-कोटा नहीं।
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लक्ष्य क्या होंगे और आयोग के प्रस्ताव से क्या बदला?
यूरोपीय आयोग ने दिसंबर 2025 में प्रस्ताव रखा था कि सदस्य देशों में नई कॉरपोरेट गाड़ियों के पंजीकरण में शून्य और कम उत्सर्जन वाले वाहनों की न्यूनतम हिस्सेदारी तय की जाए। समितियों ने इसके बजाय 2030 और 2035 के लिए 67% से 95% तक के राष्ट्रीय आकांक्षी लक्ष्य रखने का समर्थन किया है।
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इसलिए बदलाव लक्ष्य के स्तर पर है: आयोग ने न्यूनतम हिस्सेदारी का प्रस्ताव दिया था, जबकि समिति की स्थिति में उन्हीं लक्ष्यों को हासिल करने की बाध्यता कम है। अंतिम नियम बनने से पहले प्रस्ताव में और बदलाव हो सकते हैं।
किन कंपनियों और वाहनों पर लागू होगा प्रस्ताव?
प्रस्ताव के दायरे में यूरोपीय संघ के देशों में पंजीकृत कॉरपोरेट कारें और वैन आएंगी, यदि उन्हें 250 से अधिक कर्मचारियों और 5 करोड़ यूरो से अधिक सालाना कारोबार वाली बड़ी कंपनियां पंजीकृत कराती हैं।
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कुछ खास कामों के लिए विशेष रूप से बनाए गए वाहनों को छूट देने का प्रस्ताव है। इनमें नागरिक सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने, आवश्यक सेवाएं देने और सैन्य आवाजाही के लिए इस्तेमाल होने वाले वाहन शामिल हैं।
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2028 से देशों को क्या करना होगा?
समितियों की स्थिति के मुताबिक, सदस्य देशों को 2028 से कॉरपोरेट वाहनों में शून्य और कम उत्सर्जन वाले वाहनों की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय योजनाएं बनानी, लागू करनी और समय-समय पर अपडेट करनी होंगी। इन योजनाओं में बाजार के हालात, कर और वित्तीय व्यवस्थाओं तथा संबंधित नीतियों और उपायों का आकलन शामिल होगा।
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इस तरह, लक्ष्य आकांक्षी होने पर भी देशों के लिए योजना बनाने की जिम्मेदारी बनी रहेगी। दोनों बातों में फर्क है: योजना बनाना प्रस्तावित दायित्व है, जबकि लक्ष्य की संख्या बाध्यकारी न्यूनतम नहीं होगी।
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2032 से वित्तीय सहायता पर प्रस्तावित पाबंदी
समितियों की स्थिति में कहा गया है कि 2032 से सदस्य देश कॉरपोरेट कारों और वैन के लिए वित्तीय सहायता तभी दें, जब वाहन शून्य या कम उत्सर्जन वाला हो। इसके अलावा, सहायता केवल यूरोपीय संघ में बने वाहनों तक सीमित रखने की बात है। “यूरोपीय संघ में बना” किसे माना जाएगा, इसकी परिभाषा इंडस्ट्रियल एक्सेलेरेटर एक्ट के तहत तय की जानी है।
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कॉरपोरेट बेड़े अहम क्यों हैं?
यूरोपीय संसद के मुताबिक, यूरोपीय संघ में खरीदी जाने वाली नई कारों में 58% और नई वैन में 90% कॉरपोरेट वाहनों की हिस्सेदारी है। इसलिए बड़ी कंपनियों के वाहन खरीदने के फैसले स्वच्छ वाहनों की बाजार में हिस्सेदारी को प्रभावित कर सकते हैं।
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फिर भी, आकांक्षी लक्ष्य बाध्यकारी न्यूनतम की तुलना में इस बात की कम निश्चितता देते हैं कि कितने स्वच्छ वाहन पंजीकृत होंगे। असल असर अंतिम कानून और सदस्य देश उसे कैसे लागू करते हैं, इस पर निर्भर करेगा।
आगे क्या होगा?
समितियों का मतदान कानून का अंतिम रूप नहीं है। परिषद के एक दस्तावेज़ के मुताबिक, यूरोपीय संसद की योजना 23 नवंबर 2026 को पूर्ण सत्र में अपनी स्थिति अपनाने की है। इसलिए फिलहाल समिति के प्रस्ताव को बीच का चरण समझना चाहिए, लागू हो चुका नियम नहीं।