बहरीन में हुए IISS मनामा संवाद में यूएई और मिस्र के अधिकारियों ने चेताया कि ईरान के साथ फिर लड़ाई शुरू होने से क्षेत्रीय संकट सुलझने के बजाय और गहरा सकता है। यूएई के राष्ट्रपति के राजनयिक सलाहकार अनवर गर्गाश ने राजनीतिक समाधान का रास्ता तलाशने पर जोर दिया। मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलआती ने आशंका जताई कि संघर्ष का नया दौर पहले से अधिक विनाशकारी हो सकता है। कतर की अगुवाई में मध्यस्थता जारी थी, लेकिन खबरों के मुताबिक कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ था।
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‘राजनीतिक रास्ता’ निकालने की अपील
गर्गाश ने कहा कि यूएई ने संकट टालने के लिए कूटनीतिक प्रयास किए हैं और अब भी राजनीतिक समाधान चाहता है। उन्होंने कहा कि देश किसी नई सैन्य भिड़ंत का इच्छुक नहीं है, हालांकि वह सबसे खराब स्थिति के लिए भी तैयार है।
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मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलआती ने 31 अक्टूबर को कहा कि उन्हें इस बात की “बेहद चिंता” है कि तनाव फिर बढ़ा तो उसका असर कहीं अधिक विनाशकारी और व्यापक हो सकता है।
13 वहीं, बहरीन ने ईरान को शामिल करते हुए क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचा बनाने की बात कही।
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मंच से खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के महासचिव ने भी ईरान से शांति प्रयासों का जवाब देने की अपील की। उपलब्ध रिपोर्टिंग इस अपील की पुष्टि करती है, लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि परिषद ने व्यापक तौर पर ‘पारस्परिक कूटनीति’ की मांग की थी।
जवाबी कार्रवाई की चेतावनी से बढ़ी चिंता
ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने 31 अक्टूबर को सैन्य कमांडरों से कहा कि नई धमकियों का तुरंत और “भौगोलिक सीमाओं के बिना” जवाब दिया जाए।
21 खाड़ी देशों के अधिकारियों की नए संघर्ष को लेकर चिंता के बीच इस बयान ने यह आशंका बढ़ाई कि जवाबी कार्रवाई संघर्ष में सीधे शामिल पक्षों से आगे तक फैल सकती है।
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उपलब्ध खबरें अधिक कड़ी जवाबी कार्रवाई की आशंका का समर्थन करती हैं। हालांकि, उनसे खाड़ी के सभी देशों और जॉर्डन पर हमलों का पूरा ब्यौरा या तेल ठिकानों, हवाई अड्डों और बिजली संयंत्रों को निशाना बनाए जाने की विशिष्ट सूची स्वतंत्र रूप से स्थापित नहीं होती।
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कतर की मध्यस्थता जारी, नतीजा तय नहीं
मध्यस्थों ने तेहरान का दौरा किया था और ईरानी प्रतिनिधिमंडल दोहा में था। लेकिन ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि बातचीत से कोई अंतिम नतीजा नहीं निकला है।
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प्रस्तावों में होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर खोलने की बात थी। इसके लिए ईरान ने शत्रुता समाप्त करने, ईरानी बंदरगाहों पर लगी पाबंदियां हटाने और जमी हुई ईरानी संपत्तियां जारी करने जैसी शर्तें रखीं।
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19 खबरों के मुताबिक, अराघची ने यह भी कहा कि अगर ईरान की शर्तें मान ली जाएं तो जलडमरूमध्य सात दिन के बजाय दो दिन में खोला जा सकता है। यह सशर्त प्रस्ताव था—जलडमरूमध्य खोलने पर सहमति नहीं।
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मनामा से मिल रही तस्वीर यही थी: बातचीत चल रही है, लेकिन तनाव बढ़ने की आशंका बनी हुई है। अधिकारियों ने राजनीतिक समाधान की अपील की; उपलब्ध रिपोर्टिंग में किसी समझौते पर पहुंचने की पुष्टि नहीं थी।
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