रूसी कब्ज़े वाले ओलेश्की के आसपास छह दिन के युद्धविराम ने नागरिकों को वहाँ से निकलने और मानवीय सहायता पहुँचाने के लिए थोड़ी राहत दी। यह स्थानीय रोक 27 अक्टूबर को शुरू हुई और 1 नवंबर को बिना बढ़ाए समाप्त हो गई। खबरों में इसे युद्ध का सबसे लंबा कई-दिन का युद्धविराम बताया गया, लेकिन इससे यूक्रेन के अन्य हिस्सों में लड़ाई नहीं रुकी।
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युद्धविराम कहाँ और कब लागू हुआ
युद्धविराम की शुरुआत 27 अक्टूबर को कीव समयानुसार सुबह 3 बजे हुई। शुरुआत में इसका दायरा ओलेश्की और खेरसॉन क्षेत्र के आसपास के इलाकों तक था। बाद की खबरों के मुताबिक, मानवीय काफिलों को सुरक्षित रास्ता देने के लिए इसे खेरसॉन क्षेत्र के और हिस्सों तक बढ़ाया गया। विस्तार की सटीक सीमाएँ सार्वजनिक रूप से नहीं बताई गईं।
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यह रोक 1 नवंबर को मॉस्को समयानुसार आधी रात—यानी GMT के मुताबिक रात 9 बजे—समाप्त हुई। यूक्रेनी अधिकारियों ने कहा कि रूस ने इसे आगे बढ़ाने का प्रस्ताव ठुकरा दिया।
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मध्यस्थता और राहत अभियान
रूस और यूक्रेन, दोनों ने अमेरिकी प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप को युद्धविराम कराने में मदद का श्रेय दिया। खबरों में पोप लियो XIV की भूमिका का भी ज़िक्र हुआ। इससे पहले वेटिकन ने ओलेश्की में मानवीय युद्धविराम की उनकी अपील की जानकारी दी थी। कूटनीतिक प्रयासों में किसकी क्या भूमिका थी, इस बारे में अलग-अलग विवरण सामने आए; उपलब्ध खबरें बातचीत का एक ही विस्तृत और पुष्ट ब्यौरा नहीं देतीं।
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युद्धविराम का मकसद भोजन और दवाइयों की गंभीर कमी से जूझ रहे लोगों की मदद करना और इच्छुक निवासियों को बाहर निकलने का मौका देना था। सीबीएस न्यूज़ के मुताबिक, यूक्रेनी और रूसी मानवीय प्रतिनिधिमंडलों ने 30 अक्टूबर को निकासी शुरू की। लोगों को रूस और बेलारूस के रास्ते यूक्रेन लौटाया गया।
3 खबरों में एक दुर्लभ संयुक्त अभियान के तहत सैकड़ों निवासियों के निकलने की बात कही गई, लेकिन उपलब्ध स्रोत ओलेश्की से निकाले गए लोगों की अंतिम कुल संख्या नहीं बताते।
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एसोसिएटेड प्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, कुछ निवासियों को यूक्रेन या रूस के नियंत्रण वाले इलाके में जाने अथवा शहर में रहकर भोजन और दवाइयाँ पाने का विकल्प दिया गया था।
14 इससे अलग, यूक्रेनी सेना ने 1 नवंबर को खेरसॉन के संकटग्रस्त इलाकों से 167 लोगों को निकालने की जानकारी दी। यह संख्या ओलेश्की से निकाले गए लोगों का कुल आँकड़ा नहीं थी।
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राहत की तैयारियों में तय रास्तों से बारूदी सुरंगें हटाना भी शामिल था। एसोसिएटेड प्रेस ने बताया कि मानवीय सहायता का एक काफिला तैयार था और ओलेश्की में प्रवेश के लिए इंतज़ार कर रहा था। बाद में पोप लियो ने मानवीय मिशन पूरा होने का स्वागत किया। इन खबरों में तैयारियों और मिशन का ज़िक्र है, लेकिन पहुँचाई गई सहायता का पूरा सार्वजनिक हिसाब नहीं दिया गया।
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इस रोक से क्या पता चला—और क्या नहीं
दोनों पक्षों ने कहा कि छह दिन की रोक के दौरान कोई उल्लंघन नहीं हुआ। यह पक्षों के अपने बयान का विवरण है; उपलब्ध खबरें यह साबित नहीं करतीं कि युद्धविराम की स्वतंत्र रूप से निगरानी की गई थी।
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इस सीमित समझौते ने दिखाया कि स्थानीय स्तर पर की गई व्यवस्था से निकासी और राहत कार्यों के लिए जगह बनाई जा सकती है। लेकिन युद्धविराम का दायरा सीमित था, इसे आगे नहीं बढ़ाया गया और यह पूरे युद्ध को रोकने वाला समझौता नहीं था। इसी दौरान निप्रो में रूसी ड्रोन हमले ने याद दिलाया कि युद्धविराम क्षेत्र के बाहर हमले जारी थे।
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पोप लियो ने मानवीय मिशन का स्वागत किया और उम्मीद जताई कि सहयोग से शांति की नई पहलें शुरू हो सकती हैं।
15 यह उम्मीद ज़रूर थी, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि ओलेश्की का स्थानीय युद्धविराम व्यापक कूटनीतिक सफलता में बदल गया। इसका सबसे स्पष्ट नतीजा नागरिकों और राहत प्रयासों के लिए मिली एक छोटी, व्यावहारिक राहत थी।