3 नवंबर के अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई फिर शुरू होने की आशंका ने खाड़ी के निवेशकों को सतर्क रखा। रविवार, 1 नवंबर को क्षेत्र के ज्यादातर शेयर बाजार नीचे गए, लेकिन कतर का बाजार इस रुझान से अलग चला।
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बाजारों में क्या हुआ?
सऊदी अरब: मुख्य सूचकांक 0.8% गिरा। रॉयटर्स की अरबी रिपोर्ट के अनुसार, उस दिन कारोबार किए गए लगभग सभी शेयरों में गिरावट आई।
3 हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों से Saudi Arabian Mining, Jabal Omar Development और Elm के नतीजों या उनकी कमाई से जुड़ी शेयर-चाल के विशिष्ट आंकड़ों की पुष्टि नहीं होती।
कतर: मुख्य सूचकांक 4.6% चढ़ा और क्षेत्रीय गिरावट के बीच अलग दिशा में रहा।
3 उपलब्ध स्रोत इस बढ़त के पीछे किसी एक कंपनी या कारण को निर्णायक रूप से नहीं बताते।
मिस्र: मिस्र के सूचकांक में 1.9% गिरावट और Commercial International Bank तथा Talaat Moustafa Group के शेयरों में कमी के आंकड़े उपलब्ध स्रोतों से स्वतंत्र रूप से पुष्ट नहीं होते। इसलिए इन्हें यहां सत्यापित बाजार-तथ्य के रूप में पेश नहीं किया जा सकता।
निवेशक किस बात से चिंतित थे?
खाड़ी देशों में यह आशंका थी कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 3 नवंबर के चुनावों के बाद ईरान पर सैन्य कार्रवाई फिर शुरू कर सकते हैं। तेहरान ने पहले चेतावनी दी थी कि नए हमलों की स्थिति में वह पड़ोसी देशों में अमेरिकी और इजरायली ठिकानों को निशाना बना सकता है।
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3 ऐसी आशंकाएं निवेशकों को क्षेत्रीय जोखिम के प्रति अधिक संवेदनशील बना सकती हैं।
कुछ रिपोर्टों में खाड़ी सरकारों को संभावित “छोटे, तीव्र सैन्य अभियान” और ईरान की जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार रहने को कहे जाने की बात थी।
5 अन्य रिपोर्टों में 4 नवंबर से हमले शुरू होने की संभावना का जिक्र किया गया।
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16 ये संभावित सैन्य तैयारियों से जुड़ी रिपोर्टें थीं—इस बात का प्रमाण नहीं कि हमले का आदेश दिया जा चुका था।
इसी दौरान दोहा में ईरानी वार्ताकारों और कतरी मध्यस्थों के बीच लगातार तीसरे दिन बातचीत चल रही थी। इसका मकसद संघर्ष खत्म करने के लिए समझौते की राह तलाशना था।
1 बाजारों के लिए यही दोहरी तस्वीर अहम थी: एक ओर तनाव बढ़ने का जोखिम, दूसरी ओर कूटनीतिक बातचीत से तनाव घटने की संभावना।