14 अक्टूबर 2026 को Colossal Biosciences ने GenoMorph नाम के AI प्लेटफॉर्म की घोषणा की। कंपनी के मुताबिक, यह डोडो जैसे लक्षण विकसित करने के लिए संभावित आनुवंशिक लक्ष्यों की पहचान में मदद करता है। कंपनी ने डोडो की चोंच के आकार और बनावट से जुड़े करीब 2,300 संभावित DNA तत्वों के साथ-साथ जीनोम और पक्षियों की प्रजनन कोशिकाओं पर काम में प्रगति की जानकारी दी। ये डोडो-जैसा पक्षी बनाने की दिशा में उठाए गए कदम हैं—इस बात का प्रमाण नहीं कि विलुप्त डोडो वापस आ गया है।
1
9
कम डोडो DNA के बीच GenoMorph कैसे काम करता है
Colossal के मुताबिक, डोडो पर काम के लिए उसके पास केवल एक जीनोम है, जबकि मैमथ परियोजना में करीब 100 जीनोम उपलब्ध हैं। डोडो के संदर्भ में इतने सीमित आनुवंशिक डेटा के कारण यह पहचानना कठिन है कि उसके विशिष्ट शारीरिक लक्षणों के पीछे DNA के कौन-से अंतर हो सकते हैं।
9
कंपनी सिर्फ डोडो के DNA पर निर्भर रहने के बजाय तुलनात्मक जीनोमिक्स को विकास-विज्ञान और 3D शारीरिक बनावट के आंकड़ों के साथ जोड़ती है। विश्लेषण में 70 से अधिक जीवित पक्षी प्रजातियों की जानकारी ली जाती है। खोपड़ी के माप और भ्रूण-विकास से जुड़े डेटा की मदद से यह अनुमान लगाया जाता है कि चोंच के आकार और बनावट जैसे लक्षणों से कौन-से नियामक DNA तत्व जुड़े हो सकते हैं।
8
14
GenoMorph खुद जीन में बदलाव नहीं करता। इसका काम संभावित लक्ष्यों की बड़ी सूची को छांटकर ऐसे विकल्प देना है जिन्हें शोधकर्ता प्रयोगों में परख सकें।
5
करीब 2,300 संभावित लक्ष्य—पुष्ट कारण नहीं
Colossal ने चोंच के लक्षणों से जुड़े करीब 2,300 संभावित नियामक तत्वों की जानकारी दी: इनमें 653 चोंच के आकार और 1,698 उसकी मोटाई व चौड़ाई से जुड़े हैं। ये अनुमानित संबंध हैं, साबित कारण नहीं। यह जानने के लिए प्रयोग जरूरी होंगे कि कौन-से तत्व वास्तव में इन लक्षणों को प्रभावित करते हैं और उनमें बदलाव से मनचाहा परिणाम मिलता है या नहीं।
1
11
14
कंपनी ने इस काम का विवरण bioRxiv पर प्रीप्रिंट के रूप में देने की योजना बताई। संभावित तत्वों की जांच होने तक इस घोषणा को शोध के अगले चरण के लिए लक्ष्य तय करने की प्रगति समझना चाहिए—इसका प्रमाण नहीं कि डोडो की चोंच दोबारा बनाई जा सकती है।
14
डोडो-जैसे पक्षी की दिशा में प्रस्तावित योजना
Colossal की योजना डोडो से जुड़े लक्षणों को निकोबार कबूतर की कोशिकाओं में शामिल करने की है। कंपनी इसे डोडो का सबसे करीबी जीवित रिश्तेदार बताती है। उसने यह भी कहा कि सॉफ्टवेयर की मदद से डोडो जीनोम का 95% हिस्सा तैयार हो चुका है। यह सॉफ्टवेयर उसके डायर वुल्फ प्रोजेक्ट के लिए विकसित किया गया था। उस परियोजना में आनुवंशिक रूप से बदले गए ग्रे भेड़िए तैयार किए गए थे, जिनमें डायर वुल्फ के कुछ चुने हुए लक्षण थे—वे विलुप्त जानवर की हूबहू आनुवंशिक प्रतियां नहीं थे।
1
10
14
घोषित अन्य पड़ावों में विकसित हो रहे पक्षी भ्रूणों में सीधे जीन-संपादन जांचने के लिए लिपिड नैनोपार्टिकल प्रणाली, टेक्सास में 36 निकोबार कबूतरों की कॉलोनी, अंडाणु और शुक्राणु में विकसित हो सकने वाली प्रारंभिक जनन कोशिकाओं को तैयार करना, और मुर्गी के स्टेम-सेल काइमेरा से चूजे निकलना शामिल हैं। ये विकास व्यापक शोध प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि डोडो का भ्रूण तैयार हो गया है।
1
घोषणा से क्या साबित नहीं होता
संभावित DNA तत्वों की प्रयोगों से पुष्टि अभी बाकी है। कई आनुवंशिक बदलावों को साथ काम करना होगा और वे भरोसेमंद ढंग से अगली पीढ़ी तक पहुंचने चाहिए। कंपनी जिस लक्ष्य की बात कर रही है, वह डोडो के अहम लक्षणों वाला पक्षी है—विलुप्त प्रजाति की हूबहू आनुवंशिक पुनर्रचना नहीं। डोडो-जैसे पक्षी के अंडे से निकलने की कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की गई।
11
14
अगर भविष्य में ऐसे पक्षियों को मॉरीशस में बसाने की कोशिश होती है, तो वहां के आवास और पारिस्थितिकी से जुड़े सवाल भी अहम होंगे। बताई गई योजना में किसी जगह को चुनने से पहले स्थानीय वैज्ञानिकों, संरक्षण समूहों और सरकार के साथ आकलन और परामर्श शामिल है।
14