सिंगापुर ग्रां प्री की स्प्रिंट क्वालिफाइंग में शुक्रवार, 9 अक्टूबर को हुई गड़बड़ी के लिए FIA ने रेस कंट्रोल की मानवीय चूक स्वीकार की। SQ1 में लाल झंडे के बाद सत्र दोबारा शुरू हुआ, लेकिन ओवरटेक मोड वापस चालू नहीं किया गया। जब यह चूक समझ में आई, तब मोड को केवल 27 सेकंड के लिए सक्रिय किया गया और फिर बंद कर दिया गया।
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SQ1 में क्या गड़बड़ी हुई?
सर्जियो पेरेज़ की कैडिलैक टर्न 5 पर बैरियर से टकराई। क्षतिग्रस्त फ्रंट विंग का मलबा ट्रैक पर गिरने के बाद SQ1 रोकना पड़ा। लाल झंडे के दौरान ओवरटेक मोड बंद था। सत्र फिर शुरू होने पर उसे दोबारा चालू करने के लिए रेस कंट्रोल के FIA अधिकारी को मैन्युअल कार्रवाई करनी थी, लेकिन यह कदम छूट गया। FIA ने स्पष्ट किया कि यह रेस कंट्रोल की मानवीय गलती थी—क्वालिफाइंग में हुई टाइमिंग-सिस्टम की समस्या से अलग।
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ओवरटेक मोड से ड्राइवरों को सामान्य ऊर्जा-सीमा के मुकाबले अतिरिक्त ऊर्जा मिलती है; रिपोर्टों के मुताबिक यह आधा मेगाजूल था। मोड उपलब्ध न होने से SQ1 के उस हिस्से में सभी कारों को अतिरिक्त ऊर्जा का समान इस्तेमाल करने का मौका नहीं मिला। कुछ ड्राइवरों ने कम पावर की शिकायत की, लेकिन उपलब्ध रिपोर्टें यह पक्के तौर पर नहीं बतातीं कि सबसे पहले किस ड्राइवर या टीम ने रेस कंट्रोल को खबर दी, या संदेश किस तरह पहुँचाया गया।
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27 सेकंड बाद मोड फिर क्यों बंद हुआ?
चूक का पता लगने पर रेस कंट्रोल ने ओवरटेक मोड चालू किया, लेकिन 27 सेकंड बाद उसे फिर बंद कर दिया। अधिकारियों को चिंता थी कि सत्र के बीच में इसे बहाल करने से उन ड्राइवरों को फायदा मिल सकता है जो उन्हीं सेकंडों में टाइम्ड लैप पर थे, जबकि दूसरे ड्राइवर उस स्थिति में नहीं थे। इस फैसले से आगे असमान लाभ मिलने का जोखिम घटा, लेकिन इससे पहले की गई लैपों पर पड़े फर्क की भरपाई नहीं हुई।
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कार्लोस सैन्ज़ और लांस स्ट्रोल SQ1 से आगे नहीं बढ़ सके। FIA की स्वीकारोक्ति पुष्टि करती है कि लाल झंडे के बाद मोड उपलब्ध नहीं था, लेकिन उपलब्ध रिपोर्टिंग सैन्ज़ या स्ट्रोल के लिए कोई निश्चित समय-हानि नहीं बताती। न ही यह साबित करती है कि इस गलती ने अकेले तय किया कि कौन अगले चरण में पहुँचा। इसलिए इसके असर को बढ़ा-चढ़ाकर बताना ठीक नहीं होगा।
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टाइमिंग की दिक्कत अलग थी
क्वालिफाइंग में एक दूसरी समस्या भी आई: कुछ लैप टाइम शुरुआत में सही तरह दर्ज या प्रदर्शित नहीं हुए, जिसके कारण SQ2 शुरू होने में देरी हुई। FIA ने कहा कि यह टाइमिंग और स्कोरिंग की गड़बड़ी ओवरटेक मोड वाली रेस-कंट्रोल चूक से अलग थी। ओवरटेक मोड की समस्या SQ1 के लाल झंडे के बाद के हिस्से तक सीमित थी; रिपोर्टों के अनुसार बाद के क्वालिफाइंग चरण इससे प्रभावित नहीं हुए।
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वेरस्टैपेन स्प्रिंट पोल पर
मैक्स वेरस्टैपेन ने SQ3 में 1:31.156 का सबसे तेज़ समय दर्ज कर जॉर्ज रसेल को 0.120 सेकंड से पीछे छोड़ा और स्प्रिंट पोल हासिल किया। चार्ल्स लेक्लेर तीसरे, ऑस्कर पियास्त्री चौथे, लैंडो नॉरिस पाँचवें और लुईस हैमिल्टन छठे रहे। चैंपियनशिप लीडर किमी एंटोनेली सातवें स्थान पर क्वालिफाई हुए।
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SQ1 में पीले झंडों के दौरान हैमिल्टन को पार करने के मामले में वेरस्टैपेन की जाँच हुई थी। स्टीवर्ड्स ने आगे कार्रवाई नहीं की, इसलिए उन्होंने पोल बरकरार रखा। स्प्रिंट शनिवार, 10 अक्टूबर को होना तय था।
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कुल मिलाकर, SQ1 के एक हिस्से में ओवरटेक मोड तक पहुँच समान नहीं रही—और FIA ने उस चूक की जिम्मेदारी स्वीकार की। लेकिन उपलब्ध रिपोर्टिंग यह स्थापित नहीं करती कि इस गलती ने अंतिम क्वालिफाइंग क्रम बदल दिया।